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इतना भी क्या तनाव है कि सुसाइड करने वाली 37 फीसदी महिलाएं भारतीय हैं

आत्महत्या करना अपराध है लेकिन ये अपराध भारतीय महिलाएं बाकी देशों की महिलाओं की तुलना में दोगुना करती हैं.

Updated On: Sep 13, 2018 08:56 PM IST

Pankaj Kumar Pankaj Kumar

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इतना भी क्या तनाव है कि सुसाइड करने वाली 37 फीसदी महिलाएं भारतीय हैं

आत्महत्या करना अपराध है लेकिन ये अपराध भारतीय महिलाएं बाकी देशों की महिलाओं की तुलना में दोगुना करती हैं. वहीं हिंदुस्तानी पुरुषों में ये दर लगभग डेढ़ गुना ज्यादा है. आंकड़ों के मुताबिक भारत की आबादी दुनिया की कुल जनसंख्या का 18 फीसदी है लेकिन दुखद रूप से दुनियाभर में आत्महत्या करने वाली कुल महिलाओं में 37 फीसदी हिस्सा भारतीय महिलाओं का है. पुरुषों में ये थोड़ा कम 24 फीसदी है. ये आंकड़े हमारे समाज की स्याह तस्वीर की तरफ इशारा करते हैं जो हम भौतिक चकाचौंध में देख नहीं पाते.

दरअसल सुसाइड रेट पर आए एक ताजा अध्ययन के मुताबिक (जिसे पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया, इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च, इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ मैट्रिक्स एंड इवेल्युएशन और स्वास्थ मंत्रालय भारत सरकार ने मिल-जुल कर तैयार किया है) भारत में 15 से 39 साल की उम्र में हुई मौत की वजहों में सबसे बड़ी वजह सुसाइड है और भारतीय औरतों में ये दर 71.2 फीसदी है. जबकि पुरुषों में 57.7 फीसदी है.

ताजा अध्ययन के मुताबिक अगर यही औसत बरकरार रहा तो साल 2030 तक सस्टेनेबल डेवलपमेंट लक्ष्य को पा लेने की संभावना 10 फीसदी से भी कम है. दरअसल सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल (SDG) के मुताबिक सुसाइड डेथ रेट एक तिहाई घटाने का लक्ष्य होता है, जबकि 2016 तक के आंकड़ों के अध्ययन से ये साफ हो जाता है कि भारत के बड़ी आबादी वाले राज्यों में एक तिहाई सुसाइड रेट कम करने की संभावना 10 फीसदी से भी कम है. इन राज्यों की आबादी देश की कुल जनसंख्या का 81.3 फीसदी है.

suicide

रिपोर्ट के मुताबिक भारत में साल 2016 में सुसाइड से हुई मौतों की संख्या 2,30,314 है और पिछले 26 साल में सुसाइड की औसत दर में लगातार इजाफा हुआ है. 1990 में वैश्विक दर की तुलना में भारत में सुसाइड से हुई मौत का दर महिलाओं में 25.3 फीसदी था वहीं 2016 में ये दर बढ़कर 36.6 फीसदी हो गया. वहीं वैश्विक अनुपात में पुरुषों में औसत रेट में बढ़ोतरी 18.7 से बढ़कर 24.3 फीसदी हो गई.

लेकिन संतोषजनक बात यह है कि देश के अंदर अगर सुसाइड रेट की तुलना की जाय तो यह पिछले 26 साल में 26.7 फीसदी घटी है. साल 1990 में भारत में महिलाओं में सुसाइड डेथ रेट (एसडीआर) 20 प्रति 1 लाख था तो वो साल 2016 में घटकर 14.7 प्रति लाख हो गया जबकि पुरुषों के बीच सुसाइड डेथ रेट का ग्राफ पिछले 26 सालों में लगभग सामान्य दर्ज किया गया है. साल 1990 में सुसाइड डेथ रेट 22.3 प्रति लाख था जो कि साल 2016 में 21.2 दर्ज किया गया.

लेकिन वैश्विक अनुपात के हिसाब से भारत में सुसाइड डेथ रेट (एसडीआर) महिलाओं में 2.1 गुना ज्यादा है जबकि पुरुषों में ये दर 1.4 गुना ज्यादा है. भारतीय महिलाओं में 15 से 39 साल और 75 साल से ऊपर की महिलाओं में सुसाइड डेथ रेट रेट सबसे ज्यादा पाया गया है. 15 से 39 साल में हुई मौत की सबसे बड़ी वजह भारत में सुसाइड ही है. जबकि विश्व में यह दूसरा बड़ा कारण पाया गया है.

राज्यों के हिसाब से तमिलनाडु में सबसे ज्यादा सुसाइड डेथ रेट महिलाओं में दर्ज किया गया है और इसका अनुपात 26.9 प्रति लाख है. जबकि मिजोरम की महिलाओं में ये दर सबसे कम 2.6 प्रति लाख है. पुरुषों में सबसे ज्यादा सुसाइड डेथ रेट कर्नाटक में दर्ज किया गया है. कर्नाटक में सुसाइड डेथ रेट 36.1 प्रति लाख है वहीं नगालैंड में सुसाइड डेथ रेट 6.6 प्रति लाख दर्ज किया गया है जो कि सबसे कम है. स्टडी के मुताबिक भारत में सुसाइड डेथ रेट उन राज्यों में कम है जिन्हें विकास के पैमाने पर कम विकसित माना जाता है.

वैसे एक्सपर्ट ने अपने अध्ययन में पाया है कि वैश्विक स्तर पर पुरुषों में सुसाइड डेथ रेट महिलाओं की अपेक्षा ज्यादा है लेकिन वैश्विक अनुपात में भारतीय महिलाओं में सुसाइड डेथ रेट चिंताजनक है.

इस रिपोर्ट को तैयार करने वाली मुख्य सदस्या और पीएचएफआई की मेंबर राखी डंडोना का कहन है, ' हमें एक समग्र योजना महिलाओं में सुसाइड डेथ रेट को कम करने के लिए बनानी होगा और राज्यों के हिसाब से हमारी रिसर्च इससे निपटने के लिए किए गए प्रयास में काफी मददगार होगी.'

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