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सिर्फ 10 जातियों को मिलता है OBC कोटे का फायदा, 1000 जातियों को नहीं मिलता कोई लाभ

केंद्र सरकार की नौकरियों और शैक्षिक संस्थानों में अन्य पिछड़ी जातियों (ओबीसी) को मिलने वाले आरक्षण के लाभों का एक चौथाई हिस्सा केवल 10 जातियों को मिलता है

Updated On: Nov 23, 2018 10:36 AM IST

FP Staff

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सिर्फ 10 जातियों को मिलता है OBC कोटे का फायदा, 1000 जातियों को नहीं मिलता कोई लाभ

केंद्र सरकार की नौकरियों और शैक्षिक संस्थानों में अन्य पिछड़ी जातियों (ओबीसी) को मिलने वाले आरक्षण के लाभों का एक चौथाई हिस्सा केवल 10 जातियों को मिलता है, जबकि लगभग एक हजार जातियां ऐसी हैं जिनको कोई लाभ नहीं मिलता है. यह डेटा केंद्र सरकार द्वारा स्थापित पैनल द्वारा साझा किया गया है, जिसे ओबीसी कोटा के अधिक न्यायसंगत वितरण के लिए गठित किया गया था.

हालांकि पैनल द्वारा जारी परामर्श पत्र में किसी एक जाति को मिलने वाले आरक्षण की अलग से जानकारी नहीं है, जो डेटा को और अधिक सटीक विश्लेषण प्रदान करता. राष्ट्रपति ने ओबीसी की केंद्रीय सूची के उप-वर्गीकरण पर विचार-विमर्श करने के लिए पिछड़ा वर्ग पैनल को नियुक्त किया है. पैनल ने पता लगाया कि ओबीसी की केंद्रीय सूची में शामिल विभिन्न समुदायों में लाभ के वितरण में उच्च स्तर पर असमानता मौजूद है.

पैनल को ओबीसी की केंद्रीय सूची को उप-वर्गीकृत करने का काम सौंपा गया है, जिसमें 2633 प्रविष्टियां शामिल हैं. न्यूज18 को मिले परमार्श पत्र के अनुसार, जिसे कई राज्यों को भेजा गया है, पैनल ने कहा कि उसका काम इस सूची तक ही सीमित था, जो 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से संबंधित है जहां ओबीसी आरक्षण लागू है.

आरक्षण में लाभ के वितरण को समझने के लिए पैनल ने ओबीसी के लिए निर्धारित कोटा के अंतर्गत केंद्र सरकार की शैक्षिक संस्थानों में पिछले तीन सालों के दौरान लिए गए प्रवेश पर जाति-वार डेटा एकत्र किया और सेवाओं एवं संगठनों में पिछले पांच सालों में हुई भर्ती के आंकड़ों की भी मांग की.

परमार्श पत्र बताता है, 'इस डेटा को एकत्रित करना एक कठिन काम था. अधिकांश संगठन ओबीसी श्रेणी के अंतर्गत लाभ लेने वाली जातियों का अलग रिकॉर्ड नहीं रखते हैं. सामान्य तौर पर रिकॉर्ड एससी, एसटी और ओबीसी के नाम पर होता है. लाभार्थियों की जाति का डेटा उनके द्वारा दिए गए जाति प्रमाण पत्र से एकत्रित किया गया.'

आयोग द्वारा एकत्रिक डेटा से पता चला कि लाभ का एक चौथाई हिस्सा मात्र 10 जातियों को, दूसरा चौथाई 38 जातियों को, तीसरा चौथाई 102 जातियों को और अंतिम चौथाई करीब 1500 जातियों को मिलता है. इससे भी खराब स्थिति यह है कि 1500 जातियों में से 994 जातियों को 25% में से केवल 2.68% ही मिलता है. इसके अलावा केंद्रीय सूची में शामिल 983 जातियां ऐसी हैं जिनका लाभ में कोई हिस्सा नहीं है. पिछड़ा वर्ग पैनल के अनुसार अकादमिक संस्थानों में भी असमानता की कुछ ऐसी ही तस्वीर है.

बता दें कि कैबिनेट ने अगस्त में रिटायर्ड जज जी रोहणी की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यों के पैनल के कार्यकाल को नवंबर तक बढ़ाया था. पैनल का कार्यकाल 31 मई तक बढ़ाने की मांग की जा रही है.

(न्यूज 18 के लिए देबायन रॉय की रिपोर्ट)

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