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मंडी में प्याज 50 पैसे/किलो, किसानों ने सड़क पर छोड़ दी पैदावार

पिछले कुछ सालों में एमपी सरकार ने 8 रुपए प्रति किलो की दर से सीधा किसानों से ही प्याज लेना शुरु कर दिया था. इसके जरिए वो किसानों की समस्याओं का समाधान करना चाहते थे

Updated On: Dec 04, 2018 04:30 PM IST

FP Staff

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मंडी में प्याज 50 पैसे/किलो, किसानों ने सड़क पर छोड़ दी पैदावार

मध्यप्रदेश के मालवा क्षेत्र स्थित नीमच एक प्रमुख कृषि मंडी है. रविवार को यहां प्याज 50 पैसे प्रति किलो की दर से बिक रही थी. वहीं अदरक का भाव 2 दो रुपए प्रति किलो था. किसानों को रुलाने वाली ये स्थिति इस सीजन में प्याज और अदरक की बंपर फसल की वजह से आई है. इससे साफ जाहिर होता कि आखिर देशभर के किसान क्यों खेत छोड़ सड़कों पर उतर आए हैं और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने को मजबूर हैं.

सरकार किसानों को फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य का किया अपना वादा पूरा नहीं कर पाई. बार बार आश्वासन के बावजूद किसानों के हाथ सिर्फ निराशा ही लगी है. मंडियों में अपनी फसलों की कीमत कौड़ियों के बराबर मिलने के गुस्से में किसान अब अपनी ही पैदावार को नष्ट करने लगे हैं. कुछ किसान अपनी फसलों को जानवरों को खिला दे रहे हैं तो कुछ सड़कों पर फेंक दे रहे.

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बंपर फसल होने के कारण नीमच मंडी में रोजाना प्याज और अदरक के 10-10 हजार बैग आ रहे हैं. सोमवार को कई क्षेत्रों में जाम की स्थिति बन आई क्योंकि किसान ट्रैक्टरों में अपनी प्याज और अदरक की फसल लेकर सीधा मंडी आ पहुंचे. राजस्थान और आस पास के किसानों के पास कोई और विकल्प न होने के कारण वो अपनी फसलों को वहीं छोड़कर चले जा रहे हैं. क्योंकि फसलों को वापस ले जाने पर और ज्यादा घाटा होगा.

इतना होने के बाद भी खुदरा बाजार में प्याज 15-20 रुपए किलो बिक रहा और अदरक तो 30-40 रुपए किलो पर तौला जा रहा है. हालांकि यह कोई पहली बार नहीं है जब प्याज की इस तरह गिरी हैं. 2016 में तो स्थिति और भी खराब थी जब प्याज की कीमतें 30 पैसा प्रति किलो पर आ गई थी.

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एमपी सरकार खरीद रही थी किसानों की पैदावार:

पिछले कुछ सालों में एमपी सरकार ने 8 रुपए प्रति किलो की दर से सीधा किसानों से ही प्याज लेना शुरु कर दिया था. इसके जरिए वो किसानों की समस्याओं का समाधान करना चाहते थे. लेकिन इस स्कीम में भी कई तरह कि खामियां, धांधलियों की खबरें सामने आईं.

मध्यप्रदेश चुनावों में किसानों का मुद्दा बहुत गर्म रहा और बीजेपी के साथ साथ कांग्रेस ने इसके जरिए अपना वोट बैंक बनाने की कोशिश की. एक तरफ जहां कांग्रेस ने किसानों का कर्ज माफ करने की घोषणा कर उनको अपनी तरफ खींचने की कोशिश की तो वहीं बीजेपी ने 15 साल के शासन में किसानों के लिए किए गए कार्यों को गिनाकर उन्हें अपनी तरफ खींचने का प्रयास किया.

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