S M L

देश की एक तिहाई महिलाओं को उनके पति पीटते हैं: स्टडी

रिपोर्ट में कहा गया है 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' जैसे अभियान के बावजूद पितृसत्तात्मक रवैया महिलाओं के सामाजिक दर्जे को लगातार कमजोर कर रहा है

Updated On: Nov 11, 2018 06:16 PM IST

Bhasha

0
देश की एक तिहाई महिलाओं को उनके पति पीटते हैं: स्टडी

भारत में करीब एक-तिहाई शादीशुदा महिलाएं पतियों के हाथों हिंसा की शिकार होती हैं. हैरानी की बात है कि कई महिलाओं को पति के हाथों मार खाने से कोई गुरेज भी नहीं है. एक स्टडी ने अपने विश्लेषण में यह बात कहते हुए लैंगिक आधार पर हिंसा को देश की सबसे बड़ी चिंता में से एक बताया है.

वडोदरा के गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) 'सहज' ने 'इक्वल मीजर्स 2030' के साथ मिलकर यह स्टडी की है. 'इक्वल मीजर्स 2030' 9 सिविल सोसायटी और निजी क्षेत्र के संगठनों की ब्रिटेन के साथ वैश्विक साझेदारी है. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएचएफएस) 4 के आंकड़ों का हवाला देते हुए सहज ने एक रिपोर्ट में कहा कि 15 से 49 साल के आयु वर्ग की महिलाओं में से करीब 27 प्रतिशत ने 15 साल की उम्र से ही हिंसा बर्दाश्त की है.

जाति, वर्ग और लिंग के आधार पर विकास में काफी पीछे भारत

इसमें कहा गया है, 'एक ओर तो भारत में आर्थिक विकास की दर अच्छी है वहीं दूसरी ओर वह जाति, वर्ग और लिंग के आधार पर भेदभाव का सामना कर रहे लोगों के लिए समान विकास हासिल करने में बहुत पीछे है.' सहज ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, 'भारत में विवाहित महिलाओं में से करीब एक तिहाई महिलाएं पति के हाथों हिंसा का शिकार हैं और कई महिलाएं पति के हाथों मार खाना स्वीकार कर लेती हैं'

रिपोर्ट में कहा गया है 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' जैसे अभियान के बावजूद पितृसत्तात्मक रवैया महिलाओं के सामाजिक दर्जे को लगातार कमजोर कर रहा है. इसका नतीजा लड़कियों के कमजोर स्वास्थ्य, उनकी मृत्यु के मामलों से लेकर जन्म के समय यौन अनुपात बिगड़ने के रूप में सामने आता है.'

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
KUMBH: IT's MORE THAN A MELA

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi