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ओणम: दस दिनों तक चलने वाला ये त्योहार क्यों होता है खास?

बताया जाता है कि केरल के त्रिकाकरा मंदिर में ही ओणम की शुरुआत हुई थी

Updated On: Aug 21, 2018 12:55 PM IST

FP Staff

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ओणम: दस दिनों तक चलने वाला ये त्योहार क्यों होता है खास?

केरल के प्रमुख त्योहारों में से एक ओणम इस साल 15 अगस्त से शुरू हो चुका है और 27 अगस्त तक रहेगा. यह त्योहार दस दिनों तक मनाया जाता है. इन दस दिनों तक केरल में जश्न का माहोल होता है. पूरे केरल को खूबसूरती के साथ सजाया जाता है. घरों में रंग-बिरंगी रंगोलिया बनाई जाती हैं.

ओणम के पहले दिन रंगोली के चारों तरफ फूलों का एक गोला बनाया जाता है. इसके बाद बढ़ते दिनों के साथ ये गोले भी बढ़ जाते हैं. फिर इसमें वामन अवतार में विष्णु, राजा महाबली और उनके अंग रक्षकों की प्रतिष्ठा होती है. ये मुर्तियां कच्ची मिट्टी से बनाई जाती हैं.

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ओणम के इन दस दिनों तक घरों में पकवान बनते हैं और पूरे घर चमचमाती लइटों से सजाया जाता है. ओणम के दौरान लोग शाम को घरों से निकलकर अलग-अलग इलाकों में घुमने निकलते हैं. इस दौरान कई इवेंट्स भी आयोजित किए जाते हैं. ओणम के आखिरी दिन हाथी पर परेड निकाली जाती है.

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 त्रिकाकरा मंदिर से हुई थी इस पर्व की शुरुआत 

बताया जाता है कि केरल के त्रिकाकरा मंदिर में ही ओणम की शुरुआत हुई थी. इसलिए ये त्योहार इस मंदिर में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है. ओणम के दौरान मंदिर में कई आयोजन होते हैं. साथ ही दस दिनों तक यहां एक खास तरह का झंडा फहराया जाता है. ओणम के दौरान आयोजित कार्यक्रमों में लोकनृत्यों के साथ-साथ पुली -कली डांस भी किया जाता है. इस डांस को करने के लिए पुरुष बाघ की तरह मेकअप करते हैं और कुछ शिकारी बनकर भी डांस करते हैं.

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