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शोपियां घटना की जांच के लिए गठित हो SIT: उमर अब्दुल्ला

27 जनवरी को शोपियां में सुरक्षाबलों के काफिले पर पत्थरबाजों ने हमला कर दिया था, अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षाबलों ने जवाबी कार्रवाई की जिसमें 3 लोग मारे गए थे

Updated On: Feb 02, 2018 04:56 PM IST

Bhasha

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शोपियां घटना की जांच के लिए गठित हो SIT: उमर अब्दुल्ला
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जम्मू-कश्मीर विधानसभा में विपक्ष के नेता उमर अब्दुल्ला ने शोपियां जिले में सुरक्षा बलों की गोलीबारी में तीन लोगों के मारे जाने की घटना की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित करने की मांग की है. दरअसल, एक काफिले पर पत्थरबाजों  ने हमला कर दिया था जिसके बाद सुरक्षाबलों ने यह कार्रवाई की थी.

उमर ने विधानसभा में कहा कि शोपियां घटना की दोनों एफआईआर की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय एसआईटी गठित करने का वह विनम्र अनुरोध करते हैं. मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती द्वारा सदन में गृह, सामान्य प्रशासन, योजना विभागों को अनुदान पर लाए एक प्रस्ताव पर उमर ने यह कहा.

उमर ने कहा कि पुलिस द्वारा दर्ज की गई दो एफआईआर को लेकर अब एक तकरार शुरू हो गई है इसलिए थाना प्रभारी द्वारा इसकी जांच करना मुश्किल होगा.

पत्थरबाजों ने किया था सुरक्षाबलों के काफिले पर हमला

अधिकारियों ने बताया कि थल सेना ने 27 जनवरी की इस घटना के बारे में जम्मू -कश्मीर पुलिस को अपना बयान दे दिया है और इसने पथराव कर रही भीड़ पर गोलीबारी करने की अपनी वजह भी बताई है. यह घटना उस वक्त हुई थी जब थल सेना के काफिले पर शोपियां जिले में हमला हुआ था.

थल सेना द्वारा गुरुवार को सौंपे गए पक्ष के मुताबिक सुरक्षा बल के काफिले पर पत्थरबाजों के एक समूह ने हमला किया जिसके जवाब में इसके कर्मियों ने खुद की जान बचाने के लिए गोलीबारी की. दक्षिण कश्मीर स्थित शोपियां जिले में हुई इस घटना के बारे में पुलिस के एक एफआईआर दर्ज करने के बाद थल सेना ने बयान दिया है.

राज्य पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर में किसी आरोपी का नाम नहीं है लेकिन इसमें कहा गया है कि मेजर आदित्य के नेतृत्व वाली 10 गढ़वाल राइफल्स की एक कंपनी ड्यूटी पर जा रही थी तभी इसपर एक उग्र भीड़ ने पत्थरों से हमला कर दिया.

इस घटना ने बढ़ा दी है बीजेपी और पीडीपी में विवाद

शोपियां घटना राज्य के सत्तारूढ़ गठबंधन की साझेदार पीडीपी और बीजेपी के बीच विवाद की एक मुख्य वजह बन गई है. बीजेपी के एक विधायक ने सदन में मांग की कि थल सेना के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द किया जाए. हालांकि, महबूबा ने कहा कि एफआईआर को इसके तार्किक निष्कर्ष तक ले जाया जाएगा.

उमर ने मुख्यमंत्री को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि सुरक्षाबलों के खिलाफ दर्ज पिछली एफआईआर में कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई. उन्होंने कहा कि साल 2000 से राज्य सरकार ने केंद्रीय सुरक्षा बलों, खासतौर पर थल सेना के खिलाफ अभियोजन की इजाजत के लिए 50 अनुरोध केंद्र को भेजे हैं. 47 अनुरोध खारिज कर दिए गए और तीन अब भी लंबित हैं... यह हमारा ट्रैक रिकार्ड है.

उमर ने कहा कि राज्य में सुरक्षा हालात बदतर हो रहे हैं. उन्होंने फारूक अहमद डार को मुआवजा देने की पुरजोर हिमायत की, जिन्हें थल सेना की एक जिप्सी के बोनट से बांध दिया गया था.

उन्होंने हैरानगी जताई कि डार को बांधने वाली थल सेना को पुरस्कार मिला लेकिन चुनाव में मतदान करने वाला यह युवक क्या मुआवजा पाने का हकदार नहीं है. पूर्व मुख्यमंत्री ने महबूबा से कहा कि वह नई दिल्ली में बैठे अपने समकक्षों को सलाह दें कि वे वहां से राज्य के लिए फैसले न लें और राज्य नेतृत्व से मशविरा करें.

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