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डिजिटल इंडिया: रेल टिकट पर कटती है कई तरह से जेब !

रेलवे टिकट खिड़की से रिजर्वेशन करवाना ऑनलाइन बुकिंग से सस्ता पड़ता है

Updated On: Dec 04, 2016 06:57 PM IST

IANS

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डिजिटल इंडिया: रेल टिकट पर कटती है कई तरह से जेब !

भोपाल: देश भर में इस समय डिजिटल इंडिया की बहस जोरों पर है, सभी के अपने-अपने तर्क हैं.

केंद्र सरकार ने नोटबंदी के चलते रेल यात्रा की टिकट ऑनलाइन बुकिंग के चलन को बढ़ाने के लिए सर्विस टैक्स में 31 दिसंबर तक की छूट दी है.

लेकिन आपको यह बात हैरान कर सकती है कि ऑनलाइन से ट्रेन का टिकट बुक कराने पर सिर्फ सर्विस टैक्स नहीं चुकाना होता, बल्कि कई और तरीकों से भी जेब पर भार पड़ता है.

500 और 1000 रुपये के नोट बंद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ नबंवर की रात को देश के नाम दिए संदेश में 500 और 1,000 रुपये के नोटों को अमान्य करने की घोषणा की थी.

कैशलेस को बढ़ावा देने के लिए और यात्रियों को बेहतर सुविधा दिलाने के मकसद से आईआरसीटीसी के जरिए टिकट बुक कराने पर 23 नवंबर से 31 दिसंबर तक सर्विस टैक्स से छूट दी गई है.

आईआरसीटीसी के जरिए स्लीपर टिकट बुक कराने पर 20 रुपये और एसी क्लास में 40 रुपये सर्विस टैक्स देना पड़ता है.

आरटीआई से टिकट बुकिंग की जानकारी 

ऑनलाइन टिकट बुकिंग पर लगने वाले सरचार्ज को लेकर मध्यप्रदेश के नीमच के रहने वाले आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौर ने 21 सितंबर को पीएमओ पब्लिक ग्रीवांस के जरिए प्रधानमंत्री का ध्यान आकर्षित किया था.

इसमें उन्होंने लिखा था कि एक तरफ सरकार डिजिटल इंडिया या ऑनलाइन लेनदेन को बढ़ावा देने पर अपना जोर लगा रही है.

लेकिन रेलवे का ऑनलाइन टिकट लेनदेन ऑफलाइन (काउंटर से) लेनदेन की तुलना में महंगा है.

रेल टिकट ऑनलाइन बुकिंग करना महंगा 

Online Booking

सहूलियत है लेकिन महंगी है आॅनलाइन बुकिंग

गौर ने इसमें जिक्र किया था कि ऑनवार्ड (लंबी दूरी की यात्रा उदाहरण के तौर पर भोपाल से दिल्ली और दूसरी गाड़ी मे दिल्ली से अमृतसर) यात्रा पर ऑफ लाइन टिकट लेने पर एक बार ही रिजर्वेशन चार्ज लगता है.

साथ ही टेलिस्कोपिक यात्रा का रियायती लाभ मिलता है, जबकि ऑनलाइन टिकट कराने पर ऑनवार्ड का लाभ नहीं मिलता (दो बार टिकट बनाना पड़ता है).

इसके चलते दो बार रिजर्वेशन चार्ज लगता है, साथ ही टेलिस्कोपिक यात्रा का रियायती लाभ भी नहीं मिलता.

सरकार और यात्रियों दोनों को है फायदा

उन्होंने लिखा कि ऑनलाइन टिकट कराने से सरकार और यात्रियों दोनों को फायदा होता है.

जहां तरफ रेलवे के संसाधनों पर दवाब नहीं पड़ता है वहीं, रेलवे केंद्र तक आने जाने के लिए परिवहन की बचत होती है, इससे पर्यावरण पर भी बुरा असर नहीं पड़ता है.

यात्री का जोखिम भी कम होता है, इसके अलावा, सारा लेन-देन सरकार की निगरानी में होता है. इसलिए ऑफलाइन जैसी ऑनवार्ड यात्रा का लाभ ऑनलाइन में भी दिया जाए.

सुझाव को रेलवे को भेजा जाएगा 

17 अक्टूबर को सेंट्रल पब्लिक ग्रेविएंस रिडेसर एंड मोनीटरिंग सिस्टम (सीपीजीआरएएमएस) के जरिए गौर को जो जवाब आया.

उसमें सुझाव को काफी उपयोगी बताते हुए संबंधित कार्यालय इंडियन रेलवे केटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन को भेजने की बात कहीं गई.

गौर ने कहा कि ऑनलाइन टिकट पर सिर्फ सर्विस चार्ज ही नहीं लगता है, कई बैंक प्रति ट्रॉन्जेक्शन पर 10 रुपये लेते हैं.

वहीं ऑनवर्ड यात्रा का विकल्प तो होता है, लेकिन दो टिकट लेने होते हैं, जिसके चलते दो बार रिजर्वेशन चार्ज लगता है और टेलिस्कोपिक यात्रा का रियायती लाभ नहीं मिलता.

ऑफलाइन बुकिंग जेब पर नहीं पड़ती भारी 

ऑनलाइन और ऑफलाइन रिजर्वेशन की सच्चाई जानने के लिए भोपाल के मुख्य आरक्षण पर्यवेक्षक भानु दास से संपर्क किया गया.

उन्होंने बताया कि रेलवे में ऑफलाइन (खिड़की से) पर ऑनवार्ड (आगे की यात्रा) टिकट का प्रावधान है, इसमें एक बार ही रिजर्वेशन चार्ज देना पड़ता है, वहीं टेलिस्कोपिक यात्रा का रियायती लाभ भी मिलता है.

 

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