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यूपी: तबादले के वार से सुस्त पड़े 'सरकार'

तबादले की वजह से प्रशासनिक स्तर पर छाई सुस्ती आम जनता और विकास पर भारी पड़ रही है

Shivaji Rai Updated On: Jul 08, 2017 11:10 AM IST

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यूपी: तबादले के वार से सुस्त पड़े 'सरकार'

सूबे में सत्ता परिवर्तन के साथ प्रशासनिक फेरबदल आम बात है. सत्ता परिवर्तन के साथ नई सरकार शासकीय कार्यों में तेजी के लिए अपने हिसाब से प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती करती है.

यूपी में भी प्रशासनिक फेरबदल का क्रम पिछले महीनों से जारी है. चुस्त-दुरुस्त बनाने को लेकर व्यापक स्तर पर तबादले भी हुए हैं और जारी भी हैं. लेकिन 'ज्यों-ज्यों दवा की मर्ज बढ़ता गया' वाली स्थिति बन गई है.

तबादले ही सरकारी कार्य में सुस्ती की वजह बन गए हैं. तबादले की लटकती तलवार की वजह से अधिकारियों के कामकाज में उदासीनता दिख रही है. अधिकारी अनमने भाव से काम कर रहे हैं. जितना आवश्यक है उतना करने के बाद शांति से अपने तबादले के आदेश का इंतजार कर रहे हैं.

तबादला दूसरे विभाग में होना हो या गैरजनपद में, जिनके तबादले की संभावना थोड़ी भी है वह उदासीनता के साथ येन केन प्रकारेण कार्यों का कोरम पूरा कर रहे हैं. जिसकी वजह से कई विभागों में राजकाज का पहिया या तो ठहर सा गया है या नाम मात्र का चल रहा है.

योगी आदित्यनाथ

बार-बार तबादलों से सरकारी कार्य में सुस्ती

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रशासनिक अधिकारियों के साथ लगातार समीक्षा बैठक कर रहे हैं, प्रशासन का पेंच कस रहे हैं. लेकिन उसका प्रभाव भी इन अधिकारियों पर न के बराबर हो रहा है. तबादले की आशंका में पड़े अधिकारी नई जगह और नए दायित्व की सोच में ही डूबे दिख रहे हैं.

पिछले तीन महीनों में योगी सरकार ने 4 बार बड़े स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल किए. सत्ता संभालने के साथ ही अप्रैल में 44 आईएएस अधिकारियों का तबादला हुआ. दोबारा मई में 74 आईएएस अधिकारियों का तबादला किया गया. इसी महीने में 41 आईपीएस और 25 आईएएस अधिकारियों तबादला किया गया.

योगी सरकार को कुर्सी संभाले पर्याप्त वक्त भी हो चुका है. और प्रशासनिक बदलाव के लिहाज से पर्याप्त वक्त भी गुजर चुका है. बावजूद इसके अब भी सूबे के दर्जनों बड़े अधिकारी तबादले के इंतजार में समय व्यतीत कर रहे हैं. इन अधिकारियों की उदासीनता का आलम यह है कि इन्हीं की वजह से सरकार पर भी हीलाहवाली का आरोप लगना शुरू हो गया है.

चाहे वह 15 जून तक राज्य की सड़कों की मरम्मत का मामला हो या पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में शांति बहाली का, नाकामी की वजहों में उनकी उदासीनता भी अहम मानी जा रही है.

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प्रशासनिक स्तर पर छाई सुस्ती विकास पर पड़ रही भारी

जन समस्याओं के निस्तारण में जिस तेजी की उम्मीद लोगों ने योगी सरकार से लगा रखी थी, मुख्यमंत्री योगी की सक्रियता के बावजूद वह टूट रही है. इन अधिकारियों की उदासीनता का ही परिणाम है कि मुख्यमंत्री के जनता दर्शन कार्यक्रम में आने वाली 4000 से 6000 जन शिकायतों में ज्यादातर शिकायतें सामान्य स्तर की आ रही हैं.

जिनका सहज निस्तारण ब्लॉक और जिला स्तर पर संभव है. इसी के मद्देनजर योगी आदित्यनाथ ने 10 जिलों के जिला अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की और शिथिलता पर फटकार भी लगाई. साथ ही नियमित समीक्षा बैठक की हिदायत भी दी. मौजूदा हालत को देखते हुए इतना तो साफ है कि तबादले की वजह से प्रशासनिक स्तर पर छाई सुस्ती आम जनता और विकास पर भारी पड़ रही है!

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