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देश की पंचायतों में महिला प्रतिनिधियों की संख्या 13 लाख से ज्यादा: सरकार

राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की पंचायती राज संस्थाओं में निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की संख्या के ब्योरे के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में इनकी संख्या सबसे अधिक 2 लाख 72 हजार 733 है जबकि मध्य प्रदेश में एक लाख 96 हजार 490 है

Updated On: Dec 27, 2018 04:20 PM IST

Bhasha

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देश की पंचायतों में महिला प्रतिनिधियों की संख्या 13 लाख से ज्यादा: सरकार

सरकार ने गुरुवार को संसद को बताया कि मौजूदा समय में देश की पंचायती राज संस्थाओं में निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की संख्या 13 लाख से ज्यादा है. लोकसभा में बीजेपी सांसद रामचरण बोहरा के एक सवाल के लिखित जवाब में केंद्रीय पंचायत राज राज्य मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला ने सदन को बताया कि वर्तमान में देश की पंचायती राज संस्थाओं में निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की कुल संख्या 13 लाख 67 हजार 594 है.

राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की पंचायती राज संस्थाओं में निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की संख्या के ब्योरे के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में इनकी संख्या सबसे अधिक 2 लाख 72 हजार 733 है जबकि मध्य प्रदेश में एक लाख 96 हजार 490 और महाराष्ट्र में एक लाख 21 हजार 490 है.

बिहार की पंचायतों में निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की संख्या 57 हजार 887 है जबकि छत्तीसगढ़ में इनकी संख्या 93 हजार 287 और राजस्थान में 70 हजार 527 है. जम्मू-कश्मीर की पंचायतों में निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की संख्या 11 हजार 169 है जबकि कर्नाटक में 50,892 और केरल में 9 हजार 630 है. पश्चिम बंगाल में महिला पंचायत प्रतिनिधियों की संख्या 29 हजार 518, मणिपुर में 868, सिक्किम में 548, त्रिपुरा में 3,006 और असम में 13,410 है.

मंत्री ने बताया कि पंचायती राज मंत्रालय द्वारा पंचायतों में निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों के बारे में कराए गए देशव्यापी अध्ययन का प्रकाशन वर्ष 2008 में किया गया था. इस अध्ययन में आत्म-सम्मान, आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमताओं को बढ़ाने सहित विभिन्न पहलुओं पर निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों के सशक्तिकरण का आकलन किया गया.

उन्होंने कहा कि अध्ययन से पता चलता है कि ग्राम सभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है और महिलाओं से संबंधित मुद्दों, जैसे- पेयजल, स्वच्छता और बाल-लिंगानुपात पर ध्यान दिया जा रहा है. अध्ययन में बताया गया कि निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों ने स्कूलों में लड़कियों के नामांकन को प्रोत्साहित करने और घरेलू हिंसा को कम करने के प्रयास किए हैं.

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