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इलाहाबाद में बढ़ती जा रही है महिला रिक्शा मालिकों की संख्या

परियोजना से जुड़ीं एक अन्य चालक सपना ने कहा कि वह पहले दिनभर में 600 रुपए कमाती थीं, लेकिन सिर्फ 200 रुपए घर ले जाती थीं

Bhasha Updated On: Aug 05, 2018 06:45 PM IST

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इलाहाबाद में बढ़ती जा रही है महिला रिक्शा मालिकों की संख्या

कभी दिन भर के लिए खुद से चलाने के लिए किराए पर लिया गया रिक्शा पकड़ने के लिए घर से रोज 10 किलोमीटर चलकर जाने वाली इलाहाबाद की मारिया अब स्वयं रिक्शा मालिक बन गई हैं.

इतिहास (ऑनर्स) के तृतीय वर्ष की छात्रा मारिया एक ई-रिक्शा चालक भी हैं. अपने पड़ोसियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के साथ ही मारिया अन्य लोगों को भी लाती ले जाती हैं.

मारिया ने फोन पर पीटीआई को दिए गए साक्षात्कार में कहा, ‘‘अब, जब मेरे पास खुद का रिक्शा है, तो मुझे इसका किराया भरने की चिंता नहीं रहती. मैं इसे अपनी सुविधा के अनुसार जितने भी घंटे चाहूं चला सकती हूं, जिससे कि मुझे अपनी पढ़ाई और घर के काम के लिए समय मिल जाता है.’’

दिसंबर में वाहिनी परियोजना के अधीन ‘एसएमवी ग्रीन ग्रीन सॉल्यूशंस’ के तहत मारिया को भर्ती किया गया था.

इलाहाबाद का यह स्टार्ट अप रिक्शा समुदाय के साथ मिलकर सस्ती, स्वच्छ एवं सुरक्षित गतिशीलता प्रदान करने के लिए काम कर रहा है. पिछले साल दिसंबर में इसे शुरू किए जाने के बाद से अभी तक इससे छह महिला ई-रिक्शा चालक जुड़ चुकी हैं.

वाहिनी बेड़ा का संचालन इलाहाबाद के रामपुर, सराय इनायत, राजापुर और सिविल लाइन्स इलाके में होता है. इसका लक्ष्य सुरक्षित, किफायती और पर्यावरण अनुकूल परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है.

परियोजना से जुड़ीं एक अन्य चालक सपना ने कहा कि वह पहले दिनभर में 600 रुपए कमाती थीं, लेकिन सिर्फ 200 रुपए घर ले जाती थीं. शेष रकम किराए के रूप में रिक्शा मालिक की जेब में चली जाती थी.

उन्होंने कहा कि रिक्शा का मालिक बनने से काफी राहत है. इससे न सिर्फ उनकी रोजाना की आमदनी दोगुनी से अधिक हो गई है, बल्कि घरेलू कामकाज का भी प्रबंधन करना आसान हो गया है.

सपना ने कहा, ‘मैं अपने हिसाब से उपयुक्त समय में रिक्शा चलाती हूं. इससे मुझे घरेलू कामकाज को भी देखने का वक्त मिल जाता है.’

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