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अब पहचान नहीं, काम पर मिल रहे हैं पद्म पुरस्कार: पीएम

मन की बात कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा कि आपका भी इस बात पर ध्यान गया होगा कि बहुत सामान्य लोगों को पद्म-पुरस्कार मिल रहे हैं

Bhasha Updated On: Jan 28, 2018 05:07 PM IST

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अब पहचान नहीं, काम पर मिल रहे हैं पद्म पुरस्कार: पीएम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि पिछले तीन वर्षो में पद्म पुरस्कार की पूरी प्रक्रिया बदल गई है, अब कोई भी नागरिक किसी को भी मनोनीत कर सकता है और पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन हो जाने से पारदर्शिता आ गई है.

आकाशवाणी पर प्रसारित ‘मन की बात’ कार्यक्रम में अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि इन दिनों पद्म-पुरस्कारों के संबंध में काफी चर्चा आप भी सुनते होंगे. लेकिन थोड़ा अगर बारीकी से देखेंगे तो आपको गर्व होगा. गर्व इस बात का कि कैसे-कैसे महान लोग हमारे बीच में हैं और कैसे आज हमारे देश में सामान्य व्यक्ति बिना किसी सिफारिश के उन ऊंचाइयों तक पहुंच रहे हैं.

मोदी ने कहा कि हर वर्ष पद्म-पुरस्कार देने की परंपरा रही है लेकिन पिछले तीन वर्षों में इसकी पूरी प्रक्रिया बदल गई है. अब कोई भी नागरिक किसी को भी मनोनीत कर सकता है. पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन हो जाने से पारदर्शिता आ गई है. एक तरह से इन पुरस्कारों की चयन-प्रक्रिया पूरी तरह से बदल गई है.

बहुत आम लोगों को मिले हैं पुरस्कार

उन्होंने कहा कि आपका भी इस बात पर ध्यान गया होगा कि बहुत सामान्य लोगों को पद्म-पुरस्कार मिल रहे हैं. ऐसे लोगों को पद्म-पुरस्कार दिए गए हैं जो आमतौर पर बड़े-बड़े शहरों में, अखबारों में, टी.वी. में, समारोह में नजर नहीं आते हैं.

मोदी ने कहा, ‘अब पुरस्कार देने के लिए व्यक्ति की पहचान नहीं, उसके काम का महत्व बढ़ रहा है. ’ प्रधानमंत्री ने इस संदर्भ में कचरे से खिलौना बनाने में योगदान देने वाले आईआईटी कानपुर के छात्र रहे अरविंद गुप्ता और कर्नाटक की सितावा जोद्दती का जिक्र किया .

मोदी ने कहा कि सितावा जोद्दती ने अनगिनत महिलाओं का जीवन बदलने में महान योगदान दिया है. इन्होंने सात वर्ष की उम्र में ही स्वयं को देवदासी के रूप में समर्पित कर दिया था.

उन्होंने मध्य प्रदेश के भज्जू श्याम का जिक्र किया जिन्होंने विदेशों में भारत का नाम रोशन किया.

मोदी ने हर्बल दवा बनाने वाली केरल की आदिवासी महिला लक्ष्मी कुट्टी, अस्पताल बनाने के लिए दूसरों के घरों में बर्तन मांजे, सब्जी बेचने वाली पश्चिम बंगाल की 75 वर्षीय सुभासिनी मिस्त्री का भी जिक्र किया.

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘मुझे पूरा विश्वास है कि हमारी बहुरत्ना-वसुंधरा में ऐसे कई नर-रत्न हैं, कई नारी-रत्न हैं जिनको न कोई जानता है, न कोई पहचानता है. ऐसे व्यक्तियों की पहचान न बने तो उससे समाज का भी घाटा हो जाता है.’

उन्होंने कहा कि पद्म-पुरस्कार तो सिर्फ एक माध्यम है लेकिन देशवासियों से को भी हमारे आस-पास समाज के लिए जीने वाले, समाज के लिए खपने वाले, किसी न किसी विशेषता को ले करके जीवन भर काम करने वाले लोग हैं. कभी न कभी उनको समाज के बीच में लाना चाहिए. वो मान-सम्मान के लिए काम नहीं करते हैं लेकिन उनके काम के कारण हमें प्रेरणा मिलती है.

मोदी ने कहा कि ऐसे लोगों को स्कूलों में, कालेजों में बुला करके उनके अनुभवों को सुनना चाहिए. पुरस्कार से भी आगे, समाज में भी कुछ प्रयास होना चाहिए.

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