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खबरदार... किसी भी पुरुष को 'नामर्द' बोलने पर हो सकती है जेल

कोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा है कि किसी भी पुरुष को 'नामर्द' बोलना मानहानि के अंतर्गत आता है

Updated On: Nov 11, 2018 02:28 PM IST

FP Staff

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खबरदार... किसी भी पुरुष को 'नामर्द' बोलने पर हो सकती है जेल

अब किसी पुरुष को 'नामर्द' बोलना आपको जेल पहुंचा सकता है. बॉम्बे हाईकोर्ट के नागपुर बेंच ने अपने एक फैसले में कहा है कि किसी भी पुरुष को 'नामर्द' बोलना मानहानि के अंतर्गत आता है. ऐसे में अगर कोई शख्स ऐसी बात करता है, तो उसे जेल की सजा के साथ जुर्माना का भुगतान करना पड़ सकता है.

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक खबर अनुसार एक मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने एक महिला की कानूनी कार्यवाही से निर्वाहन आवेदन को अस्वीकार्य कर दिया, जिस पर उसके पति ने 'नामर्द' बोलने का आरोप लगाया है.

दोनों ही पति-पत्नी के बीच तलाक का मामला चल रहा था.  बीते 21 नवंबर, 2016 को जब महिला अपने मायके गई, तभी से दोनों के रिश्ते में दरार आ गई. मायके में रहने के दौरान ही महिला ने कोर्ट में तलाक की अर्जी डाल दी. दोनों की एक बच्ची भी है. ऐसे में जब कोर्ट में तलाक का मामला चला तो बच्ची की कस्टडी पिता को मिल गई.

महिला को कोर्ट का यह फैसला ठीक नहीं लगा और उसने कोर्ट के इस फैसले को हाईकोर्ट में यह कहते हुए चुनौती दे दी कि उसका पति 'नामर्द' है.

Bombay High Court

बॉम्बे हाईकोर्ट

धारा 499 के तहत इस शब्द का प्रयोग और प्रकाशन दोनों ही मानहानि के अंतर्गत आएंगी

महिला के इस आरोप से परेशान पति ने अपनी पत्नी और उसके घरवालों पर मानहानि का मुकदमा दायर कर दिया. महिला ने इस दौरान सुनवाई में कहा कि वह अपने पति की नामर्दगी को लेकर कुछ नहीं बोलना चाहती थी, लेकिन उसकी हरकतों ने उसे ऐसा करने को मजबूर कर दिया. महिला ने बताया कि उसकी बेटी भी मेडिकल ओवुलेशन तकनीक से हुई है.

मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस शुकरे ने कहा कि महिला जिस तरह से अपने पति पर आरोप लगा रही है, उससे साफ पता चल रहा है कि यह मानहानि का मामला है. पत्नी जानबूझकर अपने पति की छवि को खराब करना चाह रही है. वैसे भी पत्नी ने अपन पति को धमकी दी थी कि अगर उसने उसकी बात नहीं मानी तो वह उसकी छवि खराब कर देगी.

ऐसे में कोर्ट का यह फैसला उन मर्दों के लिए मददगार साबित होगा जो नपुंसकता के आधार पर तलाक का सामना कर रहे हैं.

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, नपुंसक शब्द के तार्किक या व्याकरणिक अर्थ को अगर समझें तो यह शब्द किसी पुरुष के पुरुषत्व पर प्रतिकूल असर छोड़ता है. साथ ही दूसरों से उस पुरुष के बारे में अपमान वाली राय आमंत्रित करने की प्रवृत्ति रखता है. इसलिए धारा 499 के तहत इस शब्द का प्रयोग और प्रकाशन दोनों ही मानहानि के अंतर्गत आएंगी. वहीं आईपीसी की धारा 500 के तहत ऐसा करने वाले पर सजा का प्रावधान भी दिया गया है.

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