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अब नया कानून बनाने से पहले बताना होगा कि इससे नहीं बढ़ेगा मुकदमों का बोझ

मंत्रालयों को यह सुनिश्चित करना होगा कि नए कानून और मौजूदा कानून में संशोधन से मुकदमें ना बढ़ें

Bhasha Updated On: Sep 24, 2017 02:23 PM IST

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अब नया कानून बनाने से पहले बताना होगा कि इससे नहीं बढ़ेगा मुकदमों का बोझ

भविष्य में अगर केंद्रीय मंत्रालय कोई नया कानून लाने की योजना बनाता है तो उसे यह बताना पड़ेगा कि क्या कानून के लागू होने से अदालत में मुकदमों का बोझ बढ़ेगा.

सरकार के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने एक दस्तावेज के हवाले से कहा कि मंत्रालयों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि नए कानून और मौजूदा कानून में संशोधन से मुकदमें ना बढ़ें.

कानून राज्य मंत्री पी पी चौधरी ने अपने वरिष्ठ मंत्री रवि शंकर और कैबिनेट सचिवालय को नोट लिखा है.

पदाधिकारी ने कहा कि प्रस्तावित विधेयकों में वैकल्पिक विवाद समाधानों की बात भी होनी चाहिए ताकि कानूनों से पैदा हुए विवादों को अदालत के बाहर ही सुलझाया जा सकें.

बनेगा मुकदमा आकलन का प्रावधान

अगर सरकार सुझाव को स्वीकार कर लेती है तो भविष्य में संसद में पेश किए जाने वाले सभी विधेयकों में ‘मुकदमा आकलन’ प्रावधान होगा और संबंधित मंत्रालय को यह स्पष्ट करना होगा कि विधेयक के कानून बनने के बाद क्या उसे मुकदमें होने की उम्मीद है.

जुलाई के आखिरी सप्ताह में कानून मंत्रालय में न्याय विभाग ने मुकदमेबाजी कम करने के तरीकों पर एक बैठक की थी जिसमें सरकार एक पक्षकार थी. चौधरी का नोट इसी बैठक का नतीजा है.

कानून मंत्रालय के अनुसार, देश की विभिन्न अदालतों में लंबित तीन करोड़ से ज्यादा मामलों में से 46 फीसदी मामलों में सरकारी विभाग या सरकारी निकाय शामिल हैं.

पिछले साल अक्तूबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकार को ‘सबसे बड़ा वादी’ बताते हुए कहा था कि न्यायपालिका पर बोझ कम करने की जरूरत है जो अपना ज्यादातर समय ऐसे मामलों से निपटने में खर्च करती है, जहां सरकार पक्षकार होती है.

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