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झर गए पात बिसर गए टहनी: पूर्व सांसद और साहित्यकार बालकवि बैरागी नहीं रहे

जाने माने साहित्यकार औऱ पूर्व सांसद बालकवि बैरागी ने राजनीति में भी अहम भूमिका निभाई और हिंदी फिल्मों में 25 से ज्यादा गानें लिखे हैं

Updated On: May 14, 2018 02:57 PM IST

Bhasha

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झर गए पात बिसर गए टहनी: पूर्व सांसद और साहित्यकार बालकवि बैरागी नहीं रहे
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जाने माने कवि, लेखक और पूर्व सांसद बालकवि बैरागी का उनके गृह नगर मनासा में 13 मई रविवार शाम निधन हो गया. वह 87 साल के थे. उनके बेटे ने बताया कि रविवार दोपहर वह मंदसौर जिले के चंगेरी में पेट्रोल पंप के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल होने गए थे. वहां से वह मनासा अपने घर लौटे. घर पर कुछ लोगों से बातचीत के बाद आराम करने अपने कमरे में चले गए.

शाम 4 बजे बैरागी के निजी सहायक दिलीप सोनी उन्हें चाय के लिए जगाने पहुंचे, लेकिन उनके शरीर में कोई हलचल नहीं थी. इसके बाद दिलीप सोनी ने उनके परिवारवालों और डॉक्टर मनोज संघई को इसकी जानकारी दी. संघई ने जांच के बाद बालकवि बैरागी के निधन की पुष्टि कर दी. बैरागी के बेटे सुशीलनंद बैरागी और परिवार के अन्य सदस्य उदयपुर गए हुए थे.

राजनीति और बैरागी

राजनीति में बैरागी की दिलचस्पी कॉलेज से ही थी. कॉलेज की राजनीति में उनकी सक्रिय भूमिका थी. मध्यप्रदेश में वह 1980 से 1984 तक मंत्री रहें. इसके बाद 1984 से 1989 तक वह लोकसभा सदस्य रहे. बाद में वह राज्यसभा के भी सदस्य रहे. राजनीति में आने से पहले साहित्यकार बैरागी पढ़ाते थे.

बैरागी ने हिंदी फिल्मों के लिए 25 से अधिक गीत लिखे, जिनमें से ‘तू चंदा मैं चांदनी, तू तरुवर मैं शाख रे’ शामिल है. उन्होंने कई हिन्दी कविताएं लिखीं, जिनमें से ‘झर गए पात बिसर गए टहनी’ प्रसिद्ध है.

बैरागी नीमच जिले के मनासा इलाके में रहते थे. उनका जन्म मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले की मनासा तहसील के रामपुरा गांव में 10 फरवरी 1931 को हुआ था. उनके जन्म का नाम नंदराम दास बैरागी था.  1952 में कांग्रेस के उम्मीदवार कैलाशनाथ काटजू ने मनासा में एक चुनावी सभा में इनके गीत सुन कर ‘बालकवि’ नाम दे दिया. उसी दिन से नन्दराम दास बैरागी ‘बालकवि बैरागी’ बनकर पहचाने जाने लगे.

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