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नोटबंदी: नो काम की बात, ओनली बकवास!

नोटबंदी को लेकर लोग खामखां परेशान हैं. पढ़िए और मजे लिजिए...

Updated On: Nov 18, 2016 02:44 PM IST

Kinshuk Praval Kinshuk Praval

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नोटबंदी: नो काम की बात, ओनली बकवास!

नोटबंदी को लेकर लोग खामखां परेशान हैं. जिनके बैंक अकाउन्ट में दो हजार रुपये भी नहीं पड़े, वो भी ऐसे दिखा रहे हैं जैसे मोदी जी उनके करोड़ों रुपये को रद्दी बताकर कबाड़ी को बेच गए.

नोटबंदी से कुल 5 लोगों की नींद हराम है. पहले खुद मोदी जी. गाजीपुर में बता रहे थे कि ‘मित्रों बहुत जगना पड़ रहा है क्योंकि मीटिंग कर रहा हूं ताकि आप लोगों को एटीएम में दिक्कत न हो.’

दूसरे बैंक वाले. ये मोदी जी की वजह से परेशान हैं क्योंकि दिन में इतने नोट गिन रहे हैं कि इतने नोटों के दर्शन तो पूरे करियर में भी नहीं हुए.

तीसरे नेतागण परेशान हैं. घर में छिपा कर रखा कैश देखकर ये चिंता है कि इसे ठिकाने कहां लगाएं? क्योंकि गंगा में नोट बहाने के प्लान को तो मोदी जी ने फेल कर दिया . मोदी जी ने कहा है न भई की – ‘पापियों....नहीं धुलेंगे दाग.’

कल तक दाग अच्छे लगते थे और अब मिट नहीं रहे.

चौथे अर्थशास्त्री परेशान हैं. लोग चैनल पर बिठाकर पूछ रहे हैं, फोन पर मशविरा कर रहे हैं, चौक-चौराहों पर उनसे नोटबंदी के फायदे नुकसान पूछ रहे हैं. जवाब देते-देते अब वो भी कनफ्यूज़िया गए हैं.

पांचवें परेशान वो लोग हैं, जिनके पास कोई काम नहीं था लेकिन अब नोटबंदी से माथापच्ची का काम मिल गया.

वो रिसर्च कर रहे हैं कि नोटबंदी से क्या अच्छा, क्या बुरा हो सकता है.

कुछ की राय है कि इस बार नोटबंदी की वजह से प्रदूषण कम होगा.

कुछ का कहना है कि बढ़ भी सकता है क्योंकि नोटों को जब फसलों की तरह जलाया जाएगा तो उसका धुआं सीधे मोदी जी के घर की तरफ ही आएगा.

वहीं कुछ लोगों का कहना है कि नोटबंदी से सामाजिक बुराइयां खत्म होंगी. जैसे लोग शराब छोड़ देंगे. दहेज नहीं मांगेंगे. रिश्वत न देंगे और न लेंगे. लेकिन कुछ लोग इससे अलग राय रखते हैं .

उनका कहना है कि नोटबंदी से गम में डूबे लोग ज्यादा पीएंगे. दहेज मांगने वाले किश्त बांध देंगे 8 साल की क्योंकि 8 साल के बाद दहेज की एक्सपायरी खत्म हो जाती है.

रिश्वत को लेकर उनका मानना है कि नोटबंदी के आर्टिकल 36 के पैरा 77 की पांचवी लाइन (जो कि धुंधलाई हुई सी है) उसमें ये कहीं नहीं लिखा है कि रिश्वत लेना मुश्किल होगा. इसलिये नोटबंदी वाले रिश्वत के ऑप्शन पर परेशान न हों.

कुछ विश्लेषक तो सारी हदें पार कर चुके हैं . उनका मानना है कि नोटबंदी से मानसून पर असर पड़ना तय है. इस बार महाराष्ट्र के विदर्भ और प्यासे बुंदेलखंड में जमकर बारिश हो सकती है.

नोटबंदी को लेकर शराबबंदी की मुहिम चलाने वाले कई एनजीओ ये मानते हैं कि जब नोट ही नहीं होगा तो फिर शराब कैसे बंद होगी. इसलिये उनके धंधे पर इसका असर पड़ सकता है. वो मायूस हैं और फैसले के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र में अपील कर सकते हैं .

उधर कुछ लोग जो खुद को भारत-पाकिस्तान मामलों के जानकार बताते हैं क्योंकि वो बंटवारे के बाद हिंदुस्तान आए थे, उनका मानना है कि नोटबंदी से सीमा पर तनाव कम होगा. सीजफायर का उल्लंघन नहीं होगा. गोला-बारूद नहीं दागा जाएगा.क्योंकि जब पैसा ही नहीं होगा तो बम कहां से फटेगा?

लेकिन नोटबंदी पर जब हमने मौसम विभाग से उनकी राय जानी तो उनका कहना था कि नोटबंदी की गर्माहट की वजह इस साल तापमान ज्यादा नीचे नहीं गिरेगा. मौसम विभाग के मुताबिक पचास दिन तक पारा पचास के करीब इस सर्दी के मौसम में जा सकता है.

खास बात ये है कि महंगाई और बेरोजगारी पर भी नोटबंदी का असर देखा जा रहा है. तकरीबन एक लाख युवाओं ने अपने बायोडाटा टंच कर लिये हैं क्योंकि पीएम मोदी ने गोवा में कहा था कि वो एक लाख लड़कों को काम पर लगा देंगे.

नोटबंदी के कारण नमक महंगा हो गया. देश के लिये अपनी टुच्ची सोच न्योछावर करने वालों ने महंगे नमक को लेकर दांडी मार्च किया. सुना है कि 400 रुपये किलो नमक बिका.

नोटबंदी को लेकर रास्ते में ट्रैफिक भी कम हुआ है. दिल्ली में सड़कों पर कम ट्रैफिक को देखते हुए ऑड-ईवन के बारे में अब लोग नहीं सोचते. हां, अब दिन की जगह रात में ज्यादा ट्रैफिक दिखाई देने लगा है. खुद पीएम मोदी ने एक रैली में खुलासा किया कि रात के अंधेरे में कई कारें नोट फेंकने का काम कर रही हैं.

Anyway. नोटबंदी को लेकर बैंकों और एटीएम में खड़ा एक धड़ा ये मानता है कि इस फैसले को ठीक से समझने में 50 दिन तो लगेंगे ही. तब तक तस्वीर भी साफ हो जाएगी और कालेधन की तिजोरियां भी.

(नोटबंदी से त्रस्त एक लेखक के ये अपने काल्पनिक विचार हैं. आप इनसे इत्तेफाक न रखें तो कोई बात नहीं.)

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