S M L

#NoConditionsApply: औरतों ने की बेड़ियां तोड़ने की एक और शुरुआत

इस कैंपेन के तहत बंगाली हिंदू के 400 साल पुरानी सिंदूर खेला प्रथा को बदल रही हैं. सिंदूर खेला दशहरे के अंतिम दिन सुहागन स्त्रियों द्वारा अपने शादीशुदा होने के जश्न के रुप में मनाया जाता है

Updated On: Oct 14, 2018 07:30 PM IST

FP Staff

0
#NoConditionsApply: औरतों ने की बेड़ियां तोड़ने की एक और शुरुआत

अब महिलाओं के लिए लगाए गए समाज के बंधनों को खुद महिलाओं द्वारा तोड़ने का दौर चल पड़ा है. पहले महिलाओं ने घर की देहरी लांघी, फिर अब जमीन, आसमान हर जगह खुद को पुरुषों के बराबर लाकर खड़ा कर दिया. लेकिन क्योंकि हमारा समाज पुरुष प्रधान है तो महिलाओं को दबाने, कुचलने और उन्हें पीछे खींचने की तमाम कोशिशें होती रही हैं. लगातार हो भी रही हैं.

मी टू कैंपेन ने दिखाया कि वर्कप्लेस पर महिलाओं को किस तरह से प्रताड़ित किया गया. और मी टू से पता चला कि महिलाएं कब से और किस तरह की प्रताड़ना को बर्दाश्त करते हुए आगे बढ़ रही हैं. इसी तरह अब महिलाएं रीति रिवाजों, ढकोसलों और नियमों को तोड़ने में और अपने हिसाब से संस्कृति की नई इबारत लिख रही हैं. इसका एक और उदाहरण है #NoConditionsApply कैंपेन.

कोलकाता में शुरु हुआ ये कैंपेन:

कोलकाता में पिछले साल टाइम्स ऑफ इंडिया द्वारा ये कैंपेन शुरु किया गया था. इस कैंपेन के तहत बंगाली हिंदू के 400 साल पुरानी सिंदूर खेला प्रथा को बदल रही हैं. सिंदूर खेला दशहरे के अंतिम दिन सुहागन स्त्रियों द्वारा अपने शादीशुदा होने के जश्न के रुप में मनाया जाता है. जबकि विधवाएं, अविवाहित औरतें, तलाकशुदा औरतें, समलैंगिक महिलाओं को इसमें भाग लेना मना होता था.

#NoConditionsApply कैंपेन के जरिए अब इस प्रथा को तोड़ा जा रहा है. इस कैंपेन के जरिए उन सभी महिलाओं को साथ लाया जा रहा है. बदलाव की इस शुरुआत में महिलाओं को उनके बैकग्राउंड, उनकी सामाजिक पहचान हर कुछ को किनारे रखकर एक नई प्रथा की शुरुआत की जा रही है जिसमें महिलाओं के बीच के बहनत्व को बढ़ावा दिया जा रहा है.

#NoConditionsApply कैंपेन से बंगाल की कई जानी मानी शख्सियत जुड़ी है. और बंगाल की महिलाएं इसे आगे बढ़कर स्वीकार भी कर रही हैं.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
Jab We Sat: ग्राउंड '0' से Rahul Kanwar की रिपोर्ट

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi