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सोशल एक्टिविस्ट्स ने मुंबई में डांस बार पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का किया स्वागत

सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र में होटल, रेस्तरां और बार रूम्स में अश्लील नृत्य पर प्रतिबंध और महिलाओं की गरिमा की रक्षा अधिनियम, 2016 के कुछ प्रावधानों को खारिज कर दिया

Updated On: Jan 17, 2019 06:09 PM IST

Bhasha

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सोशल एक्टिविस्ट्स ने मुंबई में डांस बार पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का किया स्वागत

महाराष्ट्र में डांस बार खोलने की अनुमति देने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सामाजिक कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया है.

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अपने एक फैसले में कहा कि डांस बार के लिए ‘विनियमन’ यानी कि पैसे दिए जा सकते हैं, टिप के रूप में  हो सकता है लेकिन इस पर ‘पूरी तरह प्रतिबंध’ नहीं लगाया जा सकता. साथ ही अदालत ने 2016 के कानून के कुछ प्रावधानों को दरकिनार कर दिया, जिसमें लाइसेंसिंग और कामकाज को लेकर प्रतिबंध लगाए गए थे.

इंडियन बार गर्ल्स संघ की अध्यक्ष वर्षा काले ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बड़ी ‘जीत’ करार दिया है. वह बार डांसर्स के हितों की लड़ाई लड़ती रही हैं. उन्होंने कहा, ‘हम इस मामले में कई बार जीते (दूसरी अदालतों में) लेकिन यह जीत बड़ी है.’

उन्होंने कहा, ‘मुझे उम्मीद है कि राज्य के अधिकारी डांस बार को लाइसेंस जारी करना शुरू कर देंगे ताकि हजारों बार डांसर वापस लौट सकें और अपनी जिंदगी शुरू कर सकें.’

काले ने कहा कि डांस बार में उस समय 75 हजार से अधिक महिलाएं रोजगार पाती थीं जब राज्य सरकार ने 2005 में कथित तौर पर अश्लीलता को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए उन्हें बंद करने का निर्णय किया था.

उन्होंने दावा किया कि 40 हजार महिलाओं ने जहां यह पेशा छोड़ दिया और जीविका के लिए दूसरे काम करने लगीं वहीं करीब 35 हजार महिलाएं अब भी दूसरे होटलों में वेटर और गायिका का काम करती हैं.

पूर्व नौकरशाह और सामाजिक कार्यकर्ता आभा सिंह ने कोर्ट के आदेश को ‘प्रोग्रेसिव’ बताया और कहा कि राज्य सरकार डांस बार को विनियमित कर सकती है लेकिन उसे पूरी तरह नहीं रोक सकती.

डांस बार फिर से खोलने के आंदोलन का नेतृत्व करने वाले मनजीत सिंह सेठी ने भी निर्णय का स्वागत किया. डांस बार मालिक संगठन के पूर्व अध्यक्ष सेठी ने कहा कि इससे हजारों बार डांसर को गरिमामय तरीके से जीने में सहयोग मिलेगा.

बीजेपी के स्थानीय नेता प्रेम शुक्ला ने कहा कि कोर्ट के आदेश पर राज्य सरकार कानूनी विशेषज्ञों से राय लेगी.

सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र में होटल, रेस्तरां और बार रूम्स में अश्लील नृत्य पर प्रतिबंध और महिलाओं की गरिमा की रक्षा अधिनियम, 2016 के कुछ प्रावधानों को खारिज कर दिया. इसमें डांस बार में सीसीटीवी कैमरे लगाने जैसे प्रावधान को खारिज करते हुए कहा कि इससे निजता का उल्लंघन होता है.

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