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आधुनिक बस टर्मिनलों की लागत का चार फीसदी बोझ उठाएगा केंद्र: गडकरी

विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक (एडीबी) से बातचीत की जा रही है जिससे भारत लंदन परिवहन प्राधिकरण मॉडल को दोहरा सके

Updated On: Oct 01, 2017 04:38 PM IST

Bhasha

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आधुनिक बस टर्मिनलों की लागत का चार फीसदी बोझ उठाएगा केंद्र: गडकरी

राज्य सरकार द्वारा बनाए जाने वाले आधुनिक बस टर्मिनलों की लागत का कुछ बोझ केंद्र सरकार उठाने को तैयार है. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि सार्वजनिक परिवहन को प्रोत्साहन के तहत हम इस लागत का कुछ बोझ उठा सकते हैं.

गडकरी ने कहा कि देश में 2,000 से 2,500 बस टर्मिनल हैं. राज्यों के पास जमीन हैं, जहां वे सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) आधार पर बस टर्मिनल बना सकते हैं. इसी महीने राज्यों के परिवहन मंत्री वडोदरा के केंद्रीय बस डिपो गए थे. इसे देश का पहला अंतरराष्ट्रीय स्तर का बस टर्मिनल कहा जा रहा है.

लंदन ट्रांसपोर्ट मॉडल को दोहराने की तैयारी में भारत 

नितिन गडकरी ने कहा कि ‘डिजाइनिंग, मॉडलिंग और निगरानी के लिए हमने लागत का 3.5 प्रतिशत का बोझ उठाने की पेशकश की है. इसे एक प्रतिशत और बढ़ाया जा सकता है.’ उन्होंने कहा कि पूरे देश में वडोदरा, अहमदाबाद और सूरत जैसे बस टर्मिनल बनाए जा सकते हैं. इस बारे में राज्यों का रुख सकारात्मक है.

इससे पहले 19 सितंबर को राज्यों के परिवहन मंत्री वडोदरा बस टर्मिनल देखने गए थे. यहां मंत्रियों को लंदन परिवहन प्राधिकरण के मॉडल का प्रस्तुतिकरण भी दिखाया गया था.

गडकरी ने कहा कि विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक (एडीबी) से बातचीत की जा रही है जिससे भारत लंदन परिवहन प्राधिकरण मॉडल को दोहरा सके. वहां सभी सार्वजनिक परिवहन की बसों को लग्जरी बसों से बदला जा सके और आम आदमी मौजूदा किराए से 40 प्रतिशत कम अदा कर उनमें यात्रा कर सके.

वाहनों की बढ़ती संख्या पर अंकुश लगाने की जरूरत 

गडकरी ने कहा कि देश में वाहनों की बढ़ती संख्या पर अंकुश लगाने की जरूरत है. ‘हमारा वाहन वृद्धि दर 22 प्रतिशत है. यदि यही रफ्तार कायम रहती है तो हमें प्रत्येक तीसरे साल एक राष्ट्रीय राजमार्ग लेन बनानी पड़ेगी.’

उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक लेन जोड़ने की लागत 80,000 करोड़ रुपये बैठेगी, जो व्यावहारिक नहीं है. इसका एकमात्र समाधान सार्वजनिक परिवहन को प्रोत्साहन देना है. इसके लिए भी वैकल्पिक ईंधनों मसलन मेथानॉल, इथेनॉल और इलेक्ट्रिक का इस्तेमाल करना है.

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