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आलोचनाओं पर नीति आयोग उपाध्यक्ष की सफाई: सरकार ने हमें GDP डेटा सीरीज के निरीक्षण के लिए कहा था

राजीव कुमार ने कहा है कि मौजूदा आंकड़े इस बात के गवाह हैं कि सरकार सकारात्मकता की ओर बढ़ रही है, परिवहन वाहनों की बिक्री, मुद्रा ऋण के वितरण और ईपीएफओ के आंकड़े सरकार की आर्थिक क्षेत्र में सकारात्मक छवि की ओर इशारा कर रहे हैं

Updated On: Dec 03, 2018 02:24 PM IST

FP Staff

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आलोचनाओं पर नीति आयोग उपाध्यक्ष की सफाई: सरकार ने हमें GDP डेटा सीरीज के निरीक्षण के लिए कहा था

CSO यानी सेंट्रल स्टैस्टिक्स ऑफिस के पिछले हफ्ते GDP पर जारी की गई डेटा सीरीज के दौरान नीति आयोग की उपस्थिति को लेकर आयोग के उपाध्याक्ष राजीव कुमार ने स्पष्टीकरण दिया है. राजीव कुमार ने कहा है कि उनके डिपार्टमेंट को ताकीद की गई थी कि ये डेटा रिलीज किए जाने से पहले एक बार निरीक्षण कर लिया जाए. उन्होंने कहा कि सरकार इस बात के लिए भी तैयार थी कि अगर किसी तरह की तथ्यात्मक या कोई अन्य गड़बड़ी मिले तो उसे ठीक भी किया जाएगा.

देश के पूर्व चीफ स्टैटिसटिशियन प्रणब सेन ने इसे लेकर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि जो डेटा सीरीज जारी की गई है उसमें नीति आयोग का क्या काम? अभी तक कोई भी डेटा CSO ही जारी करता था. यह पहली बार हुआ है जब CSO ने नीति आयोग के साथ मिलकर डाटा जारी किया है. अर्थशास्त्रियों की आपत्ति है कि CSO तो सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अंतर्गत आता है. इसका नीति आयोग से क्या लेना-देना?

इन आपत्तियों पर जवाब देते हुए राजीव कुमार ने कहा है, ' बहुत पुरानी बात नहीं है इसलिए सभी को पता ही होगा कि ये मंत्रालय तो योजना आयोग का हिस्सा हुआ करता था. हमेशा से इन दोनों के बीच एक सामंजस्य और संबंध रहा है. और ऐसा होना भी बेहद सामान्य है क्योंकि दोनों ही डिपार्टमेंट डेटा का इस्तेमाल बड़े स्तर पर करते हैं. उदाहरण के तौर, रोजगार के आंकड़ों पर टास्क फोर्स को मेरे पूर्ववर्ती ने चेयर किया था. उनकी सिफारिशों पर अब काम हो रहा है जो सीएसओ कर रहा है. ऐसे जब उन्होंने ये सीरीज जारी करने की योजना बनाई तो हमें भी एक बार देखने के लिए कहा.'

'इसे लेकर नीति आयोग ने दो बैठकें भी की जिनमें विशेषज्ञों ने अपनी राय दी. इसके बाद मंत्रालय की तरफ से हमें इस डेटा रिलीज के मौके पर रहने की रिक्वेस्ट की गई. नीति आयोग और सांख्यिकी मंत्रालय दोनों ही भारत सरकार के हिस्से हैं , अब इसमें राजनीति वाली क्या बात हो गई? मुझे लगता है डॉ. प्रणब सेन ने ये विषय अनावश्यक रूप से उठाया है. ये डेटा सीरीज सिर्फ आंकड़े नहीं हैं बल्कि इसमें मैक्रो इकॉनमी के कई आयाम शामिल हैं.'

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