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राफेल सौदे पर सभी तथ्य सामने, विपक्ष से बात करना बेकार: निर्मला सीतारमण

राफेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि जब सभी तथ्यों को संसद के सामने रखा जा चुका है तो इस मुद्दे पर विपक्षी दलों से बातचीत करना बेकार है.

Updated On: Sep 15, 2018 05:14 PM IST

Bhasha

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राफेल सौदे पर सभी तथ्य सामने, विपक्ष से बात करना बेकार: निर्मला सीतारमण

अरबों डॉलर के राफेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर मचे राजनीतिक हंगामे के बीच रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि जब सभी तथ्यों को संसद के सामने रखा जा चुका है तो इस मुद्दे पर विपक्षी दलों से बातचीत करना बेकार है. उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष देश को गुमराह कर रहा है और भारत की रक्षा तैयारियों से जुड़े एक संवेदनशील मुद्दे पर निराधार आरोप लगा रहा है.

सीतारमण ने कहा कि पाकिस्तान और चीन के जरिए स्टेल्थ लड़ाकू विमान शामिल कर अपनी हवाई शक्ति तेजी से बढ़ाए जाने के मद्देनजर सरकार ने आपातकालीन कदम के तहत राफेल लड़ाकू विमानों की केवल दो स्क्वाड्रन खरीदने का फैसला किया. उन्होंने कहा, 'क्या विपक्ष को बुलाने और सफाई देने का कोई मतलब है? वे देश को ऐसी चीज पर गुमराह कर रहे हैं जो यूपीए के दौरान हुई ही नहीं थी. वे आरोप लगा रहे हैं और कह रहे हैं कि फर्जीवाड़ा हुआ है. उनको वायुसेना की अभियानगत तैयारियों की चिंता नहीं है.' रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि राफेल सौदे की तुलना बोफोर्स मुद्दे से बिल्कुल नहीं की जा सकती है जैसा कि विपक्ष कोशिश कर रहा है क्योंकि उन्होंने रक्षा मंत्रालय को बिचौलियों से पूरी तरह मुक्त कर दिया है.

वहीं कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने एक ट्वीट के जरिए रक्षा मंत्री की निंदा करते हुए कहा, 'जब किसी के पास कोई जवाब नहीं होता है तो झूठी वाहवाही और अहंकार दिखाता है.' वहीं नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने कहा, 'यहां अहंकार का प्रदर्शन किया जा रहा है. किसी भी सरकार को विपक्षी पार्टियों के साथ बातचीत से इनकार नहीं करना चाहिए.' इनके बाद रक्षा मंत्री के प्रवक्ता ने स्पष्ट करते हुए कहा कि मंत्री ने इन शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया कि विपक्ष कुछ बताए जाने का हकदार नहीं है और तर्क यह था कि तथ्य संसद के सामने रखे जा चुके हैं.

यह है आरोप

कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दल मोदी सरकार पर हमला करता रहा है और आरोप लगाता रहा है कि वह फ्रांस से 36 लड़ाकू विमान अत्यधिक ऊंचे दामों पर खरीद रही है. कांग्रेस ने कहा है कि यूपीए सरकार ने 126 राफेल लड़ाकू विमानों का सौदा करते समय एक लड़ाकू विमान की कीमत 526 करोड़ रुपए तय की थी लेकिन वर्तमान सरकार प्रत्येक विमान के लिए 1,670 करोड़ रुपए का भुगतान कर रही है, जबकि विमानों पर हथियार और वैमानिकी विशेषताएं वैसी ही रहेंगी.

सीतारमण ने कहा कि यूपीए के जरिए किए गए समझौते की तुलना में राफेल विमान में हथियार प्रणाली, वैमानिकी और अन्य विशिष्टताएं अत्यंत उच्च स्तर की होंगी. मोदी सरकार ने 2016 में 58,000 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत से 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के लिए फ्रांस के साथ सरकार से सरकार के बीच एक सौदे पर हस्ताक्षर किए थे.

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