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कश्मीर में सरकार गिरने के बाद अमरनाथ यात्रा को लेकर सरकार अलर्ट

जम्मू-कश्मीर में पीडीपी-बीजेपी की सरकार गिरने के बाद अमरनाथ यात्रा की पूरी जिम्मेदारी अब केंद्र सरकार की हो गई है और केंद्र इसमें कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती है

Updated On: Jun 25, 2018 11:04 PM IST

Ravishankar Singh Ravishankar Singh

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कश्मीर में सरकार गिरने के बाद अमरनाथ यात्रा को लेकर सरकार अलर्ट
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अमरनाथ यात्रा 28 जून से शुरू होने वाली है. इस यात्रा को लेकर केंद्र सरकार और सुरक्षा एजेंसियां, दोनों सतर्कता बरत रही हैं. इसी का नतीजा है कि पिछले 24 घंटों में सरकार के दो वरिष्ठ मंत्रियों ने अमरनाथ यात्रियों की सुरक्षा को लेकर अलग-अलग बैठकें की. देश की रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने आर्मी चीफ बिपिन रावत के साथ जम्मू-कश्मीर में अमरनाथ यात्रियों के कैंप का जायजा लिया. वहीं गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने घाटी के हालात पर सुरक्षा एजेंसियों के साथ अलग से बैठक की.

अमरनाथ यात्रियों की सुरक्षा इंतजाम का जायजा लेने के बाद रक्षा मंत्री ने सेना के अधिकारियों के साथ बैठक की. निर्मला सीतारमण के मुताबिक इस बार  अमरनाथ यात्रा के लिए तीन स्तरीय सुरक्षा इंतजाम का बंदोबस्त किया गया है.  पुरानी घटनाओं से सीख लेते हुए नई रणनीति तैयार की गई है. सेना के वरिष्ठ अधिकारी खुद मौके पर मौजूद रहेंगे और अमरनाथ यात्रियों को किसी भी परेशानी से बचाएंगे.

कहां है बेस कैंप?

जम्मू-कश्मीर की शीतकालीन राजधानी जम्मू से बालटाल और दक्षिण कश्मीर के पहलगाम में दो बेस कैंप हैं. इन दोनों बेस कैंप के बीच की दूरी करीब 400 किलोमीटर है. इस 400 किलोमीटर लंबे मार्ग की सुरक्षा के लिए इस बार सेना की 215 अतिरिक्त कंपनियां तैनात की गई हैं. तीर्थयात्रियों को पहलगाम के रास्ते से पहुंचने में चार दिन का समय लगता है. वहीं बालटाल मार्ग से जाने वाले यात्री उसी दिन गुफा में प्रार्थना कर बेस कैंप पहुंचते हैं.

दूसरी तरफ देश के गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने दिल्ली में सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों के साथ बैठक की. सुरक्षा एजेंसियों ने भी अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा के लिए जबरदस्त रणनीति तैयार की है. सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम के साथ यात्रियों के लिए अलग तरह के गाइडलाइंस बनाए गए हैं. अमरनाथ यात्रा के दौरान नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (एनएसजी) कमांडो को विशेष जिम्मेदारी दी गई है.

बढ़ी हैं आतंकी घटनाएं

पिछले कुछ महीनों से जम्मू-कश्मीर खासकर घाटी के इलाके में आतंकी गतिविधियां बढ़ गई हैं. पिछले दिनों ही बीजेपी के पीडीपी सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद अमरनाथ यात्रा की सारी जिम्मेदारी केंद्र सरकार और सुरक्षा एजेंसियों पर आ गई है. ऐसे में केंद्र सरकार इस बार काफी सतर्क है.

पिछले साल 10 जुलाई को अनंतनाग में गुजरात के अमरनाथ यात्रियों की बस पर आतंकी हमले में 9 अमरनाथ यात्रियों की मौत हो गई थी. इस घटना में 19 यात्री घायल भी हुए थे. पिछले दिनों ही जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग मुठभेड़ में जिंदा पकड़े गए आतंकी के खुलासे के बाद भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने चौकसी बढ़ा दी है. भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को पता चला था कि हिजबुल मुजाहिदीन और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठन इस साल अमरनाथ यात्रा के दौरान बड़े हमले को अंजाम दे सकते हैं.

क्या हैं जरूरी दिशा निर्देश?

इस साल अमरनाथ यात्रा 28 जून से शुरू हो कर 26 अगस्त को खत्म होगी. पिछले साल भी अमरनाथ यात्रियों पर हमला हो चुका है लिहाजा इस बार भारतीय सुरक्षा एजेंसियां पहले से ही एहतियात बरत रही है.

सरकार ने अमरनाथ यात्रा को लेकर कई दिशानिर्देश जारी किए हैं. खासकर यात्रियों और ट्रांसपोर्ट्स को लेकर. अमरनाथ यात्रा को लेकर टूर एंड ट्रैवल्स ऑपरेटर्स और खासकर ड्राइवर को सख्त हिदायत दी गई है. ड्राइवर को नई गाइडलाइंस के मुताबिक अपने रूट पर ही गाड़ी चलाने को कहा गया है.

दूसरी तरफ यात्रा की परमिट हासिल करने के लिए ऑपरेटर्स को पहले अपना रूट प्लान देना होगा. एक बार यात्रा शुरू होने के बाद यात्री या ड्राइवर रात को वहीं आराम करेंगे जहां जम्मू-कश्मीर सरकार ने तय किया होगा. शाम होने के बाद कोई भी श्रद्धालु यात्रा नहीं करेगा. सरकार के इस नियम का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी की जा सकती है.

यात्रियों की सुविधा को लेकर भी अमरनाथ श्राइन बोर्ड ने कई उपाए किए हैं. बोर्ड ने यात्रा मार्ग पर शिविरों में वाहनों की पार्किंग, खाने-पीने और अन्य सुविधाओं को लेकर विशेष इंतजाम किए गए हैं.

मुश्किल बहुत लेकिन उत्साह कम नहीं

जम्मू-कश्मीर में पिछले कुछ सालों से हालात में कोई सुधार नहीं हुए हैं. इसके बावजूद अमरनाथ यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है. जम्मू-कश्मीर में पिछले कुछ महीनों से सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच लगातार मुठभेड़ चल रही है. ऐसे में माना जा रहा है कि इस बार अमरनाथ यात्रा काफी मुश्किल भरा हो सकता है.

वैसे कुछ जानकारों का मानना है कि अमरनाथ यात्रा की सफलता और असफलता पाकिस्तान की आंतरिक स्थिति पर काफी कुछ निर्भर करने वाला है. पिछले कुछ महीनों से अनंतनाग, शोपियां में सेना के साथ मुठभेड़ में कई आतंवादी मारे जा चुके हैं. आतंकियों की इतनी संख्या में मारे जाने के बाद आतंकी संगठनों में काफी बौखलाहट है.

अधिकांश आतंकी इस कार्रवाई के बाद या तो जंगल में छिप गए हैं या फिर रिहायशी इलाकों में शरण ले रखी है. ऐसे में माना जा रहा है कि 28 जून से शुरू हो रहे अमरनाथ यात्रा के दौरान कुछ आतंकी गतिविधि फिर से देखने को मिले. इसके बावजूद भारतीय सेना लगातार चौकस और सजगता से मुंह तोड़ जवाब देने में सक्षम है.

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