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सीतारमण की फ्रांस यात्रा पर राहुल गांधी ने उठाए थे सवाल, रक्षामंत्री ने दी सफाई

सीतारमण ने कहा कि रिलायंस डिफेंस को इस डील में जॉइंट वेंचर के तौर पर चुनने में सरकार का कोई हाथ नहीं था

Updated On: Oct 12, 2018 10:06 AM IST

FP Staff

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सीतारमण की फ्रांस यात्रा पर राहुल गांधी ने उठाए थे सवाल, रक्षामंत्री ने दी सफाई

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी एनडीए सरकार की फ्रांस सरकार के साथ हुई राफेल डील पर लगातार सवाल उठा रहे हैं. गुरुवार को राहुल ने रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण की तीन दिवसीय फ्रांस यात्रा पर सवाल उठाते हुए कहा था कि राफेल डील में कुछ गड़बड़ी है, जिसे निपटाने के लिए रक्षामंत्री को फ्रांस जाना पड़ा है. इसपर निर्मला सीतारमण ने सफाई दी है.

पेरिस में एक प्रेस ब्रीफिंग में सीतारमण ने रिलायंस डिफेंस को चुने जाने पर सफाई देते हुए कहा अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस डिफेंस को इस डील में जॉइंट वेंचर के तौर पर चुनने में सरकार का कोई हाथ नहीं था.

उन्होंने कहा कि उन्हें कोई अंदाजा नहीं था कि राफेल जेट बनाने वाली कंपनी दसॉ एविएशन अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस के साथ पार्टनरशिप करेगी. उन्होने कहा कि 'हम इस बारे में बहुत स्पष्ट हैं. फ्रांस की सरकार के साथ हमने  उड़ने की हालत वाले 36 राफेल डील खरीदने की डील की थी और दो सरकारों के बीच होने वाले समझौते में किसी व्यक्तिगत फर्म या कंपनी का जिक्र नहीं है.'

जब उनसे पूछा गया कि कांग्रेस की ओर से लगाए गए घोर पूंजीवाद के सवालों के बाद क्या भारत अभी भी ये डील जारी रखेगा, इसपर उन्होंने कहा कि 'ये उस कंपनी से पूछिए, जिसने किसी विशेष कंपनी को इस डील के लिए चुना है.'

सीतारमण के दसॉ एविएशन के उस यूनिट पर जाने की संभावना है, जहां भारत के लिए राफेल जेट बनाए जा रहे हैं. अपनी यात्रा के उद्देश्यों पर बात करते हुए सीतारमण ने कहा कि 'जहां तक दसॉ एविएशन के विजिट की बात है तो ये एक न्यौता है और मैं खरीदार भी हूं तो मैं जरूर जाऊंगी.'

बता दें कि अब से तीन हफ्ते पहले फ्रेंच मीडिया में पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के हवाले से छापा गया था कि भारत सरकार ने खुद इस डील के वक्त दसॉ एविएशन के साथ पार्टनरशिप के लिए रिलायंस डिफेंस का नाम सुझाया था.

गुरुवार को राहुल गांधी ने निर्मला सीतारमण की इस फ्रांस यात्रा पर सवाल उठाए थे और कहा था कि अभी इस कॉन्ट्रैक्ट को लेकर और सवाल उठेंगे.

कांग्रेस इस सौदे में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगा रही है और उसका कहना है कि सरकार हर विमान 1670 करोड़ रुपए से अधिक की राशि में खरीद रही है जबकि यूपीए सरकार ने 126 राफेल विमानों की खरीद पर बातचीत के दौरान हर विमान की 526 करोड़ रुपए की राशि तय की थी.

 

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