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पीएनबी घोटाला: न्यूयॉर्क के लग्जरी होटल में है नीरव मोदी

न्यूयॉर्क स्थित लग्जरी मेडीसन एवेन्‍यू ज्‍वैलरी रिटेल स्‍टोर के पास बने होटल ने नीरव मोदी के ठहरने की पुष्टि की है.

Updated On: Feb 16, 2018 01:51 PM IST

FP Staff

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पीएनबी घोटाला: न्यूयॉर्क के लग्जरी होटल में है नीरव मोदी

पंजाब नेशनल बैंक में घोटाले के आरोपी नीरव मोदी फिलहाल न्‍यूयॉर्क में हैं. सीएनएन न्यूज18 को मिली एक्‍सक्‍लूसिव जानकारी के अनुसार, नीरव न्‍यूयॉर्क के एक फाइव स्टार होटल में ठहरे हुए हैं. यह होटल नीरव मोदी के न्यूयॉर्क स्थित लग्जरी मेडिसन एवेन्‍यू ज्‍वैलरी रिटेल स्‍टोर के पास ही स्थित है. नीरव की होटल में बुकिंग और ठहरने की पुष्टि स्‍वयं होटल प्रशासन की ओर से की गई है.

बता दें कि कल ही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने नीरव मोदी की 5,100 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है. जब्त की गई संपत्ति में ज्वैलरी, सोना और कैश शामिल है. ईडी ने पासपोर्ट अधिकारियों से नीरव मोदी, मेहुल चोकसी और अमी मोदी के पासपोर्ट रद्द करने की मांग की है.

पंजाब नेशनल बैंक से जुड़े करीब 11,330 करोड़ रुपये के घोटाले में एफआईआर दायर होने से पहले ही इसके मुख्‍य सूत्रधार और डायमंड व्‍यापारी नीरव मोदी के देश छोड़कर भागने की खबर मिली थी. सूत्रों के मुताबिक, नीरव 1 जनवरी को ही देश छोड़ चुके हैं. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुरुवार को नीरव मोदी के 12 ठिकानों पर छापे मारे. ईडी ने नीरव मोदी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग और धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है.

जानें, किस तरह पीएबी में हुआ 11,333 करोड़ रुपए का महाघोटाला

भारतीय बैंकिंग इतिहास के सबसे बड़े घोटालों में एक पंजाब नेशनल बैंक के 11,333 करोड़ रुपए के स्‍कैम ने बैंकिंग सिस्‍टम की चूलें हिला दी हैं. हैरतअंगेज करने वाली बात यह है कि ये फर्जी ट्रांजैक्‍शंस पिछले 7 साल से चल रहे थे और देश के इस दूसरे सबसे बड़े पीएसयू बैंक को इसकी भनक तक नहीं लगी. इस घोटाले की जद में अब अन्‍य बैंक भी आने लगे हैं. कम से कम तीन भारतीय बैंकों- प्राइवेट सेक्‍टर के एक्सिस बैंक और सरकारी क्षेत्र के इलाहाबाद बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की विदेशी शाखाओं के इस फ्रॉड में शामिल होने की बात सामने आ रही है.

सामान्‍य तौर पर बैंकों के बीच इस तरह के लेनदेन के लिए एक तरह की आपसी सहमति होती है. और अगर एक बैंक इस तरह का लेटर ऑफ अंडरटेकिंग जारी करता है तो दूसरा बैंक उसका सम्‍मान करते हुए ट्रेडर्स या बायर्स को इतने का क्रेडिट उपलब्‍ध कराता है.

चूंकि भारत के इन बैंकों की विदेशी शाखाओं के संबंध वहां ऑपरेट कर रही ज्‍वैलरी कंपनियों के आउटलेट्स से होते हैं, ऐसे में इन आउटलेट्स ने बैंक कर्मियों की मिलीभगत से इस अंडरटेकिंग का जरूरत से काफी अधिक फायदा उठा लिया. इसके अलावा, पीएनबी कर्मियों द्वारा फर्जी अंडरटेकिंग भी जारी की गई, जो इस घोटाले का मूल कारण है.

इन ज्‍वैलरी कंपनियों के विदेशी ठिकानों जैसे- हांगकांग, दुबई और न्‍यूयॉर्क आदि में दुकानें हैं. ये दुकानें एलओयू के आधार पर बायर्स क्रेडिट का लाभ 2010 से ही लेती रही हैं. लेकिन मामला तब गड़बड़ा गया जब पिछले 25 जनवरी को की जाने वाली पेमेंट नहीं हो पाई.

सूत्रों के अनुसार, पीएनबी के अधिकारी ज्‍वैलर्स से इस फेसिलिटी और अतिरिक्‍त रकम के एवज में 10 फीसदी अतिरिक्‍त भी लेते थे. चूंकि ज्‍वैलर्स ऐसा करने में अब सक्षम नहीं थे, ऐसे में पूरी फर्जीवाड़ा सामने आ गई. चूंकि पीएनबी ने जारी एलओयू के एवज में पैसे देने से इंकार कर दिया, ऐसे में अन्‍य बैंकों में एक ने मामले को हांग कांग मॉनेटरी अथॉरिटी को रिपोर्ट कर दी, जो लोकल रेगुलेटर है. इसी तरह इस बैंक ने आरबीआई को भी इसकी जानकारी दे दी.

इस स्‍कैम की शुरुआत डायमंड कंपनियों- गीतांजलि जेम्‍स, गिली इंडिया, नक्षत्र और नीरव मोदी ग्रुप की कंपनियों के रफ डायमंड के आयात के लिए लेटर ऑफ क्रेडिट या लेटर ऑफ अंडरटेकिंग जारी करने के मामले में पीएनबी से संपर्क साधने के साथ हुई. लेटर ऑफ क्रेडिट की शर्तों के अनुसार, ज्वैलरी डिजाइनर मोदी की कंपनियों की ओर से  विदेशी सप्लायर्स को खास अवधि के लिए पेमेंट करता था और बाद में यह पैसा मोदी से वसूला जाता था. आम तौर पर इसकी अवधि तीन महीने की होती है. एक्‍सपोर्ट-इम्‍पोर्ट मार्केट में यह व्यवस्था सामान्‍य है. इसमें अगर क्लाइंट लेटर ऑफ क्रेडिट की अवधि के अंत में किसी कारणवश पैसा नहीं दे पाता है तो उसके भुगतान की अवधि बढ़ा दी जाती है. यह स्‍थानीय बैंक की ओर से दिए गए लेटर ऑफ अंडरटेकिंग के आधार पर किया जाता है. इस मामले में नीरव मोदी प्रमुख क्‍लाएंट हैं और यह स्‍थानीय बैंक पीएनबी है.

जारी किए गए फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग

पंजाब नेशनल बैंक के अधिकारियों-कर्मियों ने इन मामलों में जाली लेटर ऑफ अंडरटेकिंग जारी किए थे. इनके आधार पर एक्सिस बैंक और इलाहाबाद बैंक सहित कुछ भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं ने बैंक को डॉलर में लोन दिए थे. डॉलर में दिए गए इस लोन का यूज बैंक के नॉस्ट्रो अकाउंट्स की फंडिंग के लिए किया गया. इन अकाउंट्स से फंड को विदेशों में कुछ कंपनियों के पास भेजा गया. नॉस्ट्रो अकाउंट किसी भारतीय बैंक का किसी विदेशी बैंक में खाता होता है. इस मामले में यह भारतीय बैंक पीएनबी है. पीएनबी कर्मियों और अधिकारियों ने फर्जी लेटर ऑफ क्रेडिट के आधार पर स्विफ्ट नेटवर्क का गलत यूज किया. इसके एक्सिस और इलाहाबाद बैंक को फंड की जरूरत वाले मेसेज भेजने के लिए किया.

इसमें पंजाब नैशनल बैंक के दो कर्मचारियों ने व्यवस्था की कमी का फायदा उठाकर बैंक को बड़ा नुकसान पहुंचाया. फंड हासिल करने और रकम को पीएनबी से बाहर भेजने के लिए इन कर्मचारियों ने 'स्विफ्ट' का इस्तेमाल किया और रोजाना की बैंकिंग ट्रांजैक्शंस को प्रॉसेस करने वाले कोर बैंकिंग सिस्टम  को चकमा दे दिया. 'स्विफ्ट' ग्लोबल फाइनेंशियल मेसेजिंग सर्विस है, जिसका इस्तेमाल प्रत्येक घंटे लाखों डॉलर को भेजने के लिए किया जाता है.

घोटाला सामने आने के बाद से महज दो दिनों में उसके शेयर 17 फीसदी तक टूट चुके हैं, जिससे निवेशकों के 6840 करोड़ रुपए डूब गए हैं. इस घोटाले की राशि पीएनबी के लगभग 36000 करोड़ रुपए के कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन का लगभग एक-तिहाई है.

(साभार न्यूज18)

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