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निपाह वायरस से केरल की टूरिज्म इंडस्ट्री पर भी संकट के बादल

केरल के लिए हुई ट्रैवल बुकिंग रोजाना सैकड़ों की संख्या में रद्द हो रही हैं. वायरस के मामलों का असर पूरे राज्य और तमाम क्षेत्रों में महसूस किया जा रहा है

Updated On: May 25, 2018 02:02 PM IST

TK Devasia

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निपाह वायरस से केरल की टूरिज्म इंडस्ट्री पर भी संकट के बादल

मॉनसून सीजन में वायरल बुखार जैसी संक्रामक बीमारियों, खास तौर पर डेंगू बुखार का प्रकोप केरल में पिछले एक दशक से भी ज्यादा से पर्यटन उद्योग के लिए चिंता का विषय रहा है. इस साल मॉनसून से पहले ही निपाह नामक दुर्लभ और खतरनाक वायरस ने उसकी चिंताओं को और बढ़ा दिया है. राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में इस वायरस के हमले को लेकर आ रही खबरों से सैलानियों में डर पैदा हो रहा है.

वायरस के डर के कारण रोजाना सैकड़ों बुकिंग हो रही हैं रद्द

केरल पर्यटन उद्योग परिसंघ (सीकेटीआई) के अध्यक्ष ई. एम. नजीब ने बताया कि पिछले हफ्ते मीडिया में कोझीकोड जिले के एक परिवार के तीन सदस्यों की मौत की खबर आने के बाद राज्य के लिए हुई ट्रैवल बुकिंग रोजाना सैकड़ों की संख्या में रद्द हो रही हैं. हालांकि, वायरस का मामला राज्य के उत्तरी जिले तक सीमित है, लेकिन इसका असर पूरे राज्य और तमाम क्षेत्रों में महसूस किया जा रहा है. नजीब को आशंका है कि देश में और इसके बाहर बाहर मौजूद राज्य के प्रतिस्पर्धियों द्वारा पर्यटकों के बीच डर फैलाया जा रहा है.

उनका कहना था, 'वे केरल में वायरस के प्रकोप को ऐसी संक्रामक बीमारी के तौर पर पेश कर रहे हैं, जो राज्य में आने वाले लोगों के लिए खतरनाक है. यह गलत है. इस वायरस से कोझीकोड जिले के महज कुछ हिस्से प्रभावित हैं. पर्यटन के तमाम ठिकाने, हवाई अड्डे, रेलवे स्टेशन और होटल होलिडे गतिविधियों के लिए पहले की तरह ही सुरक्षित हैं.'

नजीब ने फ़र्स्टपोस्ट को बताया कि केरल के बाकी जिलों के जो लोग इस संक्रमण के शिकार हुए हैं, वे वैसे लोग हैं जो किसी तरह से प्रभावित गांवों और उन अस्पतालों में संक्रमित लोगों के संपर्क में आए थे, जहां इस वायर से संक्रमित लोगों का इलाज चल रहा था. पास के मलप्पुरम जिले में जिन दो लोगों की मौत हुई, उन्हें यह संक्रमण कोझीकोड मेडिकल कॉलेज में हुआ था, जहां वे अपने परिजनों को देखने गए थे. ज्यादातर मरीजों का इलाज इसी मेडिकल कॉलेज में चल रहा है.

विदेशी मुल्कों के एडवाइजरी जारी करने पर और खराब हो सकते हैं हालात

अगर विदेशी मुल्क राज्य की यात्रा नहीं करने को लेकर एडवाइजरी जारी कर देते हैं, तो निपाह वायरस हमले के नतीजे भयंकर होंगे. अब तक सिर्फ मध्य पूर्व के देश बहरीन ने इस तरह की एडवाइजरी जारी की है. संयुक्त अरब अमीरात ने अब तक अपने नागरिकों को सिर्फ एहतियाती उपाय करने और सुरक्षा को लेकर संबंधित भारतीय विभागों द्वारा जारी किए गए निर्देशों का पालन करने की सलाह दी है.

नजीब ने बताया कि अगर खाड़ी के और देश एडवाइजरी जारी करते है, तो इससे इन मुल्कों में काम करने वाले केरल के प्रवासियों पर भी असर पड़ सकता है. जो प्रवासी छुट्टी पर आए हुए हैं, उन पर इसका सबसे ज्यादा असर होगा. ऐसी स्थिति में मुमकिन है कि छुट्टी या वीजा खत्म होने के बाद वे उन देशों में लौटने में सक्षम नहीं हों.

वह कहते हैं, 'पहली मौत की खबर आने के बाद अगर सरकारी मशीनरी तत्काल हरकत में आती, तो यह वायरस इस स्तर पर नुकसान नहीं पहुंचाता. दुखद बात यह रही कि 12 दिनों के बाद इस वायरस के कारण हुई दूसरी मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग की नींद खुली.'

सरकारी मशीनरी के देर से हरकत में आने से बिगड़ा मामला

कोझीकोड जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष टी. सिद्दीकी ने बताया कि 5 मई को सरकारी अस्पताल में सैबिथ नामक शख्स की हुई मौत के बाद उसका ब्लड या अन्य सैंपल भी नहीं लिया गया. सैबिथ के भाई स्वलिह की 17 मई को एक प्राइवेट अस्पताल में मौत होने और उनसे संबंधित सैंपल की जांच के बाद ही इस वायरस का पता चल सका.

कांग्रेस नेता का कहना था, 'इसके बाद इस परिवार के दो और सदस्यों की मौत हुई. ज्यादातर लोग (जिनमें उन लोगों का इलाज करने वाली नर्स भी शामिल थीं) की मौत किसी तरह से संक्रमित लोगों के संपर्क में आने के कारण हुई. अगर स्वास्थ्य विभाग ने समय पर कदम उठाया होता, तो इनमें से ज्यादातर लोगों की जिंदगी और राज्य को इसके असर से बचाया जा सकता था.'

सामाजिक स्तर पर भी हो रहा है वायरस का असर

उन्होंने बताया कि राज्य के सामाजिक क्षेत्रों में भी इस वायरस का असर महसूस किया जा रहा है. सिद्दीकी ने कहा, 'प्रभावित गांवों के लोगों का बहिष्कार किया जा रहा है. ऑटो और टैक्सी ड्राइवर ऐसे लोगों को ले जाने से मना कर रहे हैं. उन्हें पूजा स्थलों समेत तमाम सार्वजनिक स्थानों पर भी अलग-थलग किया जा रहा है.'

राज्य के विभिन्न अस्पतालों में संक्रमित लोगों का इलाज कर रही नर्सों ने भी इसी तरह की शिकायत जाहिर की है. कोझीकोड के पेरम्बरा सरकारी अस्पताल की नर्सों का कहना था कि उन्हें और यहां तक कि उनके परिवार वालों को भी मुहल्ले के लोगों से भेदभाव का साामना करना पड़ रहा है. इस अस्पताल में संक्रमित कई लोगों का इलाज हुआ था. दिलचस्प बात यह है कि इस इलाके के लोगों द्वारा पेरम्बरा अस्पताल की ही उपेक्षा की जा रही है. पहले इस अस्पताल में रोजाना मरीजों की भीड़ इकट्ठा रहती थी, वहीं अब यहां नहीं के बराबर लोग आ रहे हैं. एनडीटीवी की एक रिपोर्ट में अस्पताल के एक डॉक्टर के हवाले से बताया गया कि वायरस के फैलने के बाद अस्पताल में रोजाना आने वाले मरीजों की संख्या 1,000-1,500 से घटकर महज 100 रह गई है.

जिले के बाकी अस्पतालों में भी हालात ऐसे हैं, जहां निपाह वायरस से प्रभावित लोगों का इलाज चल रहा है. कोझीकोड मेडिकल कॉलेज के सूत्रों के मुताबिक, पहले यहां ओपी रजिस्ट्रेशन औसतन 2,000 रोजाना हुआ करता था, वहीं दो दिन पहले यह घटकर 1,000 के करीब पहुंच गया था. इस अस्पताल में भी निपाह से प्रभावित मरीजों का इलाज चल रहा है.

कोझीकोड जिले की मेडिकल ऑफिसर डॉ. वी. जयश्री ने बताया कि अस्पतालों में आने वाले मरीजों की संख्या में भारी कमी की वजह लोगों के बीच फैला गैर-जरूरी डर है. उनके मुताबिक, डर की वजह वायरस के फैलने को लेकर बढ़ा-चढ़ाकर पेश की गई रिपोर्ट और सोशल मीडिया में अवैज्ञानिक तथ्यों और अफवाहों का फैलना है.

डॉ. जयश्री ने बताया, 'फेसबुक और वॉट्सऐप पर अफवाह और झूठी चीजें फैलाने वालों के खिलाफ हम पहले ही कार्रवाई शुरू कर चुके हैं. अब हम वायरस और संक्रमण से बचाव के लिए एहतियाती कदमों के बारे में लोगों के बीच जागरूकता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं.'

इस संबंध में डर के कारण कई लोगों को अपना निवास स्थान छोड़कर भी भागने पर मजबूर होना पड़ा है. 'डेक्कन क्रॉनिकल' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कोराचुंदु और चकित्ताप्पारा गांवों में 50 परिवारों ने अपने-अपने घरों को खाली कर दिया है. कोराचुंदु गांव से एक शख्स की मौत इस वायरस के कारण हुई, जबकि दूसरे गांव से तीन लोगों के वायरस से संक्रमित होने की आशंका है.

ट्रैवल इंडस्ट्री से जुड़े खिलाड़ियों ने बताया कि अगर राज्य में मॉनसून के दौरान आम तौर पर होने वाली संक्रामक बीमारियों इस बार भी देखने को मिलती हैं, तो निपाह वायरस के कारण बनी राज्य की नकारात्मक छवि का मामला और लंबा खिंच सकता है. राज्य में मॉनसून के इसी महीने के आखिरी हफ्ते में दस्तक दिए जाने की संभावना है. राज्य पिछले एक दशक से भी ज्यादा से हर मॉनसून के दौरान कई तरह की संक्रामक बीमारियों के प्रकोप का शिकार बनता रहा है. संक्रामक बीमारियों से जुड़े सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2017 में राज्य में डेंगू बुखार से 165, लेप्टोस्पायरोसिस से 80, बुखार से 76, हेपटाइटिस से 31 और डायरिया से 8 लोगों की मौत हुई. बीते साल राज्य के 34 लाख लोगों ने बुखार का इलाज कराया. ज्यादातर मामले मॉनसून सीजन यानी जून से अगस्त के दौरान देखने को मिले.

ये आंकड़े सरकारी अस्पतालों में मरीजों के डेटा से संबंधित हैं. अगर इसमें निजी अस्पतालों के मामलों को जोड़ लिया जाए, तो आंकड़े काफी बढ़ जाएंगे. पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि संक्रामक रोगों के फैलने की अहम वजह राज्य में प्रभावकारी और वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन का अभाव है. जबकि इनमें से कई बीमारियों का लंबे समय पहले उन्मूलन हो चुका है.

तिरुवनंतपुरम में रिजॉर्ट चलाने वाले एम गोपाकुमार ने कहा कि मॉनसून के दौरान संक्रामक बीमारियों का फैलना मॉनसून की तरह ही सालाना ट्रेंड बन चुका है. उनका यह भी कहना था कि अगर पर्यावरण संबंधी मुद्दों से निपटने के लिए तत्काल कदम नहीं उठाए जाते हैं, तो केरल देश में अपना अहम दर्जा गंवा देगा.

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