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मुंबई में बिना टीचर्स के चल रहे हैं नाइट स्कूल

महाराष्ट्र सरकार द्वारा 'एक शिक्षक, एक वेतन' के फैसले के बाद से रात की पाली में चलने वाले कई स्कूलों में शिक्षकों की कमी हो गई है

FP Staff Updated On: Sep 17, 2017 09:20 PM IST

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मुंबई में बिना टीचर्स के चल रहे हैं नाइट स्कूल

पिछले 3 महीनों से मुंबई के चैंबूर इलाके के नाइट स्कूल बिना टीचर्स के चल रहे हैं. इन स्कूलों में आने वाले बच्चे खुद से अपने टेक्टबुक को पढ़ते हैं.

इस ऐकेडमिक इयर में महाराष्ट्र सरकार द्वारा 'एक शिक्षक, एक वेतन' के फैसले के बाद से रात की पाली में चलने वाले कई स्कूलों में शिक्षकों की कमी हो गई है. है। इस फैसले के अनुसार जो शिक्षक दिन की पाली में पढ़ा रहे हैं, वे रात की पाली में नहीं पढ़ा सकते. इस नीति के तहत करीब 1400 शिक्षकों और कर्मचारियों इन नाइट स्कूलों में पार्ट टाइम काम करने से रोक दिया गया है.

इन स्कूलों में अधिकतर कमजोर और गरीब तबके के स्टूडेंट पढ़ते हैं. इन स्कूलों ने राज्य सरकार के इस फैसले के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है.

इससे पहले 11सितंबर को मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने शिक्षक संगठन को आश्वासन दिया था कि सरकार रात पाली के स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों के मामले में जल्द ही निर्णय लेगी.

विधायक कपिल पाटिल के नेतृत्व में शिक्षक भारती का एक प्रतिनिधि मंडल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की.  इस बैठक में शिक्षा विभाग से फैसले पर आपत्ति जताते हुए मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप करने की मांग की गई और स्टूडेंट्स के हित को देखते हुए जल्द से जल्द फैसला लेने का अनुरोध किया गया.

इस पर मुख्यमंत्री ने शिक्षक भारती के प्रतिनिधियों से कहा कि वे इस मामले में जल्द ही एक बैठक बुलाएंगे. इस दौरान उन्होंने शिक्षकों की समस्या का हल निकालने का आश्वासन भी दिया.

गरीब और कमजोर स्टूडेंट्स हो रहे हैं प्रभावित

सरकार कह रही है कि उसके पास सरप्लस टीचर्स हैं लेकिन नाइट स्कूलों के लिए अभी तक किसी शिक्षक को नियुक्त नहीं किया गया है.

नाइट स्कूल में पढ़ने वाले एक स्टूडेंट नूर मुहम्मद ने एनडीटीवी को बताया कि वे सुबह में काम करने जाते हैं और रात में पढ़ाई करते हैं लेकिन स्कूल में कोई शिक्षक नहीं होने से वे 3 घंटे खाली बैठते हैं और उनका समय बर्बाद होता है.

एक और स्टूडेंट लक्ष्मी जायसवाल कहते हैं कि वे नौवीं में फेल हो गए थे, इस वजह से उन्हें किसी और स्कूल में एडमिशन नहीं मिला और उन्हें नाइट स्कूल में एडमिशन लेना पड़ा. लेकिन यहां पर उन्हें पढ़ाने के लिए कोई शिक्षक नहीं है.

स्टूडेंट्स की वकील पूजा थोराट कहती हैं कि मुंबई के अधिकतर नाइट स्कूल या तो बिना शिक्षकों के या एक शिक्षक के सहारे चल रहे हैं. इस वजह से हमने कोर्ट से अपील की है कि वे इन गरीब स्टूडेंट्स को पढ़ाने के लिए शिक्षकों का बंदोबस्त करवाएं.

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