S M L

आईएस के नाम पर NIA की कार्रवाई राजनीतिक मोड़ ले रही है, विपक्ष के निशाने पर सुरक्षा एजेंसी

कानून के जानकारों का भी कहना है कि एनआईए द्वारा छापेमारी में जो सामग्री जब्त करने का दावा किया जा रहा है उस बात में कितनी सच्चाई है वह अदालत में ही पता चल पाएगा.

Updated On: Dec 31, 2018 09:11 PM IST

Ravishankar Singh Ravishankar Singh

0
आईएस के नाम पर NIA की कार्रवाई राजनीतिक मोड़ ले रही है, विपक्ष के निशाने पर सुरक्षा एजेंसी

बीते रविवार को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने आतंकी संगठन हरकत-उल-हर्ब-ए-इस्लाम के पांच और संदिग्धों को गिरफ्तार किया. ये गिरफ्तारियां यूपी के अमरोहा से हुई हैं. बीते चार-पांच दिनों में एनआईए ने आतंकी गतिविधियों में संलिप्तता को लेकर 15 लोगों को गिरफ्तार किया है. अमरोहा से गिरफ्तार किए गए पांचों लोगों की उम्र 20 से 25 साल के बीच बताई जा रही है. एनआईए ने इन लोगों के पास से आईएसआईएस के झंडे और कुछ संदिग्ध मोबाइल नंबर भी हासिल किए हैं.

एनआईए का कहना है कि अमरोहा से गिरफ्तार सभी शख्स आईएसआईएस के स्लीपर सेल के तौर पर काम कर रहे थे. गिरफ्तार किए गए सभी संदिग्धों से एनआईए मुख्यालय में पूछताछ चल रही है. एनआईए सूत्रों का मानना है कि इन पांचों की गिरफ्तारी के बाद देश में कई और लोग एनआईए के रडार पर आ गए हैं.

दूसरी तरफ एनआईए सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि उस विदेशी शख्स की पहचान कर ली गई है, जो इन लोगों के संपर्क में था. ऐसा कहा जा रहा है कि उस विदेशी हैंडलर का नाम अबू मलिक पेशवानी है जो एक पाकिस्तानी नागरिक है. एनआईए को आशंका है कि आईएसआईएस के बैनर तले भारत में हमले के पीछे कहीं पाकिस्तानी आईएसआई का हाथ तो नहीं है? एनआईए इस बात की भी गहराई से जांच कर रही है कि विदेशी हैंडलर ने भारत के अंदर कितने मॉड्यूल तैयार किए हैं?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एनआईए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि रविवार को पूर्वी दिल्ली के जाफराबाद इलाके में कुछ स्थानों पर छापेमारी के दौरान मिले सुराग के आधार पर ही यूपी के अमरोहा में फिर से छापेमारी की गई. दिल्ली के जाफराबाद और सीलमपुर इलाके में बीते रविवार को एनआईए ने कुछ संदिग्धों से पूछताछ की थी. इसी पूछताछ के आधार पर यूपी के अमरोहा से पांच लोगों की गिरफ्तारी संभव हो पाई है.

NIA IG

चार दिन पहले भी एनआईए ने अपनी कार्रवाई में इस आतंकवादी समूह के प्रमुख मुफ्ती मोहम्मद सुहैल सहित 10 लोगों को दबोचा था. गिरफ्तार सभी संदिग्धों को कोर्ट ने 12 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज रखा है. एनआईए के मुताबिक आईएसआईएस के नए मोड्यूल के जरिए दिल्ली-एनसीआर में कुछ राजनीतिक हस्तियों और सुरक्षा प्रतिष्ठानों के साथ-साथ भीड़भाड़ वाले स्थानों पर आतंकी हमले की साजिश रची जा रही थी.

एनआईए ने 26 दिसंबर को भी दिल्ली और उत्तर प्रदेश के अमरोहा, लखनऊ, मेरठ और हापुड़ में 17 से अधिक स्थानों पर छापेमारी की थी. एनआईए ने इस छापेमारी में 150 राउंड गोला-बारूद, देश में निर्मित रॉकेट लांचर, 12 पिस्तौल, 112 अलार्म घड़ी, 100 मोबाइल फोन, 135 सिम कार्ड, कई लैपटॉप और विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक उपक्रमों को बरामद किए थे.

एनआईए के मुताबिक देश में पनप रहे इस नए मोड्यूल का मास्टरमाइंड मोहम्मद सोहेल है, जो यूपी के अमरोहा का रहने वाला है, लेकिन दिल्ली के जाफराबाद इलाके में भी पिछले कई सालों से रह रहा था.

हाल के कुछ महीनों में सोहेल दोबारा अमरोहा में एक मौलवी के तौर पर सक्रिय था. पिछले कुछ दिनों से सोहेल अमरोहा में मौलवी के तौर पर काम कर संगठन को स्थापित करने के काम में लगा हुआ था. एनआईए का कहना है कि सोहेल इसी ग्रुप का मोटिवेटर है जो विदेश में बैठे आईएसआईएस के एक हैंडलर के संपर्क में था. एनआईए का कहना है कि पिछले दिनों गिरफ्तार शख्स जाफराबाद इलाके के अलग-अलग गलियों में रहता था.

एनआईए, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और यूपी पुलिस की एंटी टेरर स्क्वॉड(एटीएस) द्वारा की जा रही कार्रवाई पर अब सवाल भी उठने लगे हैं. देश के सोशल साइट्स और कुछ बद्धिजीवी वर्गों के द्वारा कहा जा रहा है कि एनआईए की कार्रवाई और आईएसआईएस फिदायीन हमले की साजिश की बातें आपस में मेल नहीं खा रही हैं.

कानून के जानकारों का भी कहना है कि एनआईए द्वारा छापेमारी में जो सामग्री जब्त करने का दावा किया जा रहा है उस बात में कितनी सच्चाई है वह अदालत में ही पता चल पाएगा. एनआईए की इस कार्रवाई पर जहां केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली और प्रकाश जावड़ेकर आईटी एक्ट में बदलाव का नतीजा बता रहे हैं तो वहीं देश के जाने माने वकील प्रशांत भूषण का कहना है कि एनआईए पुराना खेल रही है और बेकसूर मुसलमानों को पकड़कर आईएसआईएस का एजेंट बता कर आतंकी साजिश करार दे रही है.

कांग्रेस सहित कई राजनीतिक पार्टियों ने एनआईए की ताजा कार्रवाई पर अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं. जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती ने कहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय सर्वोपरी है, लेकिन सुतली बम के आधार पर किसी को आईएसआईएस से जुड़े होने का दावा अतार्किक है. वहीं कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहते हैं, ‘जब इतने लंबे समय से इनका नेटवर्क चल रहा था तो आईबी कहां थी? एनआईए को अगर कई महीने पहले ही इसकी भनक लग गई थी तो अब तक क्या कर रही थी?

कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता राशिद अल्वी ने भी आरोप लगाया कि बीजेपी के इशारे पर एनआईए आतंकवाद के नाम पर बेकसूर लोगों को फंसा रही है. राशिद अल्वी ने यूपी और दिल्ली में हुई एनआईए की छापामारी पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि चुनाव से पहले बीजेपी के इशारे पर यह काम किया जा रहा है. उन्होंने गिरफ्तार आरोपितों के परिजनों से मुलाकात की और मामले में गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात करने का आश्वासन दिया.

RASHID ALVI

राशिद अल्वी का कहना है कि बीजेपी सरकार पास तीन महीने ही बचे हैं. इसलिए देश में माहौल खराब करने की साजिश रची जा रही है. उन्होंने कहा कि यहां से बरामद ट्रैक्टर का सामान एनआईए ने रॉकेट लॉन्चर बता दिया. जो सवालों के घेरे में है. चुनाव से कुछ वक्त पहले बीजेपी के इशारे पर एनआईए ने आतंक के फर्जी ऑपरेशन की स्क्रिप्ट लिखी है. अल्वी ने कहा कि अदालत में सच सामने आ जाएगा. कानून पर पूरा भरोसा है. तीन राज्यों के परिणाम से बीजेपी को हार का डर सताने लगा है.

दूसरी तरफ एनआईए तर्क दे रही है कि 2016 में भी आईएसआईएस के हैदराबाद मोड्यूल के द्वारा सुतली बम का इस्तेमाल किया गया था. हैदराबाद से भी इसी तरह के बम बनाने की सामग्री बरामद की गई थी. एनआईए के तरफ से लगातार कहा जा रहा है कि इन लोगों के खिलाफ इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन इंटरसेप्ट और पर्याप्त सुबूत मौजूद हैं. एनआईए फिलहाल इन सुबूतों को सार्वजनिक करना नहीं चाहती है.

गौरतलब है कि वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाईसी मोदी के एनआईए के डीजी बनने के बाद से ही एनआईए की सक्रियता काफी बढ़ गई है. पिछले साल नवंबर महीने वाईसी मोदी ने एनआईए के डीजी बने थे. वाईसी मोदी सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त 2002 के गुजरात दंगों के जांच दल के सदस्य भी रह चुके हैं. इसी एसआईटी ने गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री और मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दंगों से जुड़े गुलबर्ग सोसायटी हत्याकांड में क्लीनचीट दी थी.

दूसरी तरफ इस समय वाईसी मोदी की सक्रियता को जानकार दूसरे नजरिए से भी देख रहे हैं. जानकारों का मानना है कि क्योंकि सीबीआई डायरेक्टर का पद खाली होने वाला है और ऐसे में वाईसी मोदी एनआईए डीजी के तौर पर किए अपने कामों के द्वारा सीबीआई डायरेक्टर के तौर पर मजबूत दावेदारी पेश कर रहे हैं.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
KUMBH: IT's MORE THAN A MELA

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi