यमुना को नुकसान पहुंचाने के लिए आर्ट ऑफ लिविंग संस्था को जुर्माना भरना होगा. गुरुवार को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने इसपर अपना फैसला सुना दिया. ट्रिब्यूनल ने यमुना के डूब क्षेत्र में पर्यावरण को हुए नुकसान के लिए आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर की संस्था को जिम्मेदार ठहराया है.

जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली बेंच ने अपने फैसले में कहा कि इस नुकसान की भरपाई में जो खर्च आएगा उसे आर्ट ऑफ लिविंग को भरना होगा. जानकारी के मुताबिक श्री श्री रविशंकर ने पिछले साल तीन दिन के विश्व संस्कृति समारोह का आयोजन नई दिल्ली में यमुना नदी के किनारे किया था.

भरपाई की जिम्मेवारी दिल्ली विकास प्राधिकरण को 

इसके बाद इस क्षेत्र में पर्यावरण को हुए नुकसान संबंधी मामले की सुनवाई एनजीटी में चल रही थी. नुकसान के लिए ऑर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन पर पांच करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया था. इसे फाउंडेशन ने 2016 में चुका दिया था.

ताजा फैसले में एनजीटी ने कहा है कि अगर इस काम का खर्च पांच करोड़ रुपए से ज्यादा हो जाता है तो उसे ऑर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन से ही वसूला जाएगा.वहीं पैसा बच जाता है तो इसे संस्था को वापस कर दिया जाएगा. एनजीटी ने डूब क्षेत्र में पर्यावरण की भरपाई करने की जिम्मेदारी दिल्ली विकास प्राधिकरण को सौंपी है.

एनजीटी ने इस मामले में पर्यावरण मंत्रालय सहित सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 13 नवंबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था. पीठ में न्यायमूर्ति जे रहीम और विशेषज्ञ सदस्य बीएस सजवान भी शामिल थे.