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अगले हफ्ते फिर क्यों सुर्खियों में रहेगी सीबीआई?

सीबीआई के अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव की नियुक्ति के खिलाफ दायर एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट अगले हफ्ते सुनवाई कर सकता है.

Updated On: Jan 16, 2019 08:42 PM IST

Ravishankar Singh Ravishankar Singh

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अगले हफ्ते फिर क्यों सुर्खियों में रहेगी सीबीआई?

सीबीआई के अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव की नियुक्ति के खिलाफ दायर एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट अगले हफ्ते सुनवाई कर सकता है. बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने एक एनजीओ 'कॉमन कॉज' की याचिका को स्वीकार कर लिया है. एनजीओ 'कॉमन कॉज' ने 14 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर नागेश्वर राव को सीबीआई का अंतरिम डायरेक्टर बनाए जाने के फैसले को चुनौती दी थी.

दो साल पहले भी सीबीआई निदेशक अनिल सिन्हा के रिटायरमेंट के बाद राकेश अस्थाना को सीबीआई को इंचार्ज डायरेक्टर बनाए जाने पर इसी एनजीओ ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने उस समय राकेश अस्थाना की नियुक्ति को सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज किया था.

बुधवार को एनजीओ 'कॉमन कॉज' की ओर से वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए. प्रशांत भूषण ने मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की नेतृत्व वाली तीन सदस्यीय पीठ से शुक्रवार को ही इस मामले पर सुनवाई करने का अनुरोध किया. इस पर सीजेआई गोगोई ने कहा कि इस मामले की सुनवाई शुक्रवार को करना संभव नहीं है. सीजेआई ने कहा कि अगले हफ्ते ही इस मामले की सुनवाई की जाएगी.

बुधवार को ही सीबीआई से संबंधित एक दूसरी खबर आई. यह खबर सीबीआई के नए डायरेक्टर के चयन को लेकर सेलेक्ट कमेटी की बैठक बुलाने को लेकर थी. ऐसा कहा जा रहा है कि सीबीआई डायरेक्टर का चयन करने वाली कमेटी की बैठक 24 जनवरी को होने की संभावना है. सीबीआई डायरेक्टर का चयन करने वाली सेलेक्ट कमेटी में देश के प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश और नेता प्रतिपक्ष शामिल होते हैं.

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बता दें कि केंद्र सरकार ने 10 जनवरी को नागेश्वर राव को सीबीआई का अंतरिम निदेशक नियुक्त किया था. केंद्र की मौजूदा सरकार रहते यह दूसरा मौका है, जब केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ एक एनजीओ एक्टिंग डायरेक्टर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा हो और उस पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की बात कही हो.

10 जनवरी को केंद्र सरकार ने सीबीआई के नए निदेशक की नियुक्ति होने तक सीबीआई के अतिरिक्त निदेशक नागेश्वर राव को अंतरिम प्रमुख का प्रभार सौंपा था. इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली सेलेक्ट कमिटी ने आलोक कुमार वर्मा को भ्रष्टाचार और कर्तव्य की उपेक्षा के आरोपों के कारण सीबीआई के डायरेक्टर पद से हटा दिया था.

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने सीबीआई के पूर्व डायरेक्टर आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना को बीते साल 23 अक्टूबर को छुट्टी पर भेज दिया था. दोनों अधिकारी को छुट्टी पर भेजे जाने के बाद भी केंद्र सरकार ने नागेश्वर राव को ही सीबीआई का अंतरिम डायरेक्टर बनाया था. लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने 8 जनवरी को आलोक वर्मा को दोबारा से बहाल करते हुए केंद्र सरकार के फैसले को रद्द कर दिया था.

इस फैसले के 36 घंटे के अंदर एक बार फिर से आलोक वर्मा को सेलेक्ट कमेटी ने सीबीआई डायरेक्टर के पद से हटा दिया. सेलेक्ट कमेटी के फैसले के बाद केंद्र सरकार ने एक बार फिर से नागेश्वर राव को सीबीआई का अंतरिम निदेशक बना दिया.

बता दें कि सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा 9 जनवरी को वापसी के बाद से ही एक्शन में दिख रहे थे. उन्होंने अंतरिम प्रमुख एम. नागेश्वर राव द्वारा किए गए कई ट्रांसफर आदेशों को रद्द कर दिया था.

हालांकि, कोर्ट ने कहा था कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक आलोक वर्मा कोई बड़ा फैसला नहीं ले सकते. आलोक वर्मा ने 77 दिन बाद अपना कार्यभार बीते 9 जनवरी को संभाला था.

सीबीआई के अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव इन सब से बेपरवाह सीबीआई के अंदर ढांचागत बदलाव शुरू कर दिया है. सीबीआई के अंदर कामकाज को आसान बनाने के लिए राव ने वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक की है. हाल के दिनों सीबीआई के अंदर घटित घटनाक्रमों के बाद सीबीआई की विश्वनीयता पर सवाल उठने लगे थे.

कहा जा रहा है कि वर्तमान में चल रही कई जांचों पर भी इसका प्रभाव पड़ा है. काफी दिनों के बाद लगने लगा था कि सीबीआई के अंदर थोड़ी स्थिरता आ गई है. लेकिन, अंतरिम निदेशक के मुद्दे पर एक बार फिर मामला कोर्ट में जाने के बाद और कोर्ट के द्वारा सुनवाई के बाद एक बर फिर से सीबीआई के अंदर अस्थिरता आ सकती है.

सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा और स्पेशल निदेशक राकेश अस्थाना के बीच विवाद के बाद सीबीआई के दोनों वरिष्ठ अधिकारियों को अवकाश पर भेज दिया गया था. इस मामले को वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. इसके बाद पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट ने वर्मा को अवकाश पर भेजे जाने के फैसले को पलटते हुए उन्हें दोबारा सीबीआई निदेशक बनाया.

सेलेक्शन पैनल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ सुप्रीम कोर्ट के दूसरे सबसे वरिष्ठ जस्टिस एके सीकरी थे. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने खुद को इस फैसले से अलग करते हुए जस्टिस सीकरी को अपनी जगह पैनल में भेजा था. हालांकि पैनल के इस फैसले के बाद भी काफी विवाद हुआ था. ट्रांसफर किए जाने के बाद आलोक वर्मा ने पद से इस्तीफा दे दिया था.

बता दें कि कॉमन कॉज नाम की यही एनजीओ लगभग डेढ़ साल पहले 1984 बैच के आईपीएस अधिकारी राकेश अस्थाना को सीबीआई में एडिशनल डायरेक्टर से पदोन्नत कर स्पेशल डायरेक्टर बनाने पर सुप्रीम कोर्ट गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया था.

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प्रशांत भूषण ने उस समय सुप्रीम कोर्ट में तर्क दिया था कि राकेश अस्थाना को एक कंपनी की ओर से गैरकानूनी तरीके से फायदा पहुंचाया गया है. इसलिए सीबीआई उस कंपनी और कुछ सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ जांच पूरी नहीं कर लेती तब तक राकेश अस्थाना को सीबीआई से किसी दूसरी एजेंसी में तबादला कर दिया जाए.

1 दिसंबर 2016 को भी मोदी सरकार ने आधी रात को एक चौंकाने वाला निर्णय करते हुए सीबीआई में नंबर 2 रहे स्पेशल डायरेक्टर रूपक कुमार दत्ता को गृमंत्रालय में ट्रांसफर कर दिया था और सीबीआई में ही एडिशनल डायरेक्टर के रूप में काम कर रहे नंबर तीन आईपीएस अधिकारी राकेश अस्थाना को इंचार्ज डायरेक्टर बना दिया था.

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