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नोएडा में जेवर हवाई अड्डे को केंद्र की हरी झंडी, एयर कार्गो हब भी बनेगा

नोएडा में इस एयरपोर्ट के बनने से दिल्ली हवाई अड्डे पद दबाव काफी कम हो जाएगा

Updated On: Jun 24, 2017 05:36 PM IST

Bhasha

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नोएडा में जेवर हवाई अड्डे को केंद्र की हरी झंडी, एयर कार्गो हब भी बनेगा

जेवर में बनने वाले अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को केंद्र सरकार ने सैद्धांतिक सहमति दे दी है. अंतरराष्ट्रीय स्तर के इस हवाई अड्डे के लिये करीब 3,000 हेक्टेयर जमीन की आवश्यकता होगी. पहले चरण में एक हजार हेक्टेयर जमीन की जरूरत होगी. यहां देश का पहला एयर कार्गो हब भी बनाया जायेगा.

इस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के बन जाने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों का आर्थिक विकास होने, पर्यटन को बल मिलने और रोजगार और व्यवसाय के अवसर बढ़ने की उम्मीद है. इस हवाई अड्डे के निर्माण में 15 से 20 हजार करोड़ रूपए खर्च होने का अनुमान है. यमुना एक्सप्रेसवे डेवलपमेंट अथारिटी (येडा) ने इसके लिये तीन हजार एकड़ जमीन चिह्नित कर ली है.

'2003 में बनी योजना, पिछली सरकारों ने नहीं किया काम'

उत्तर प्रदेश प्रदेश के नागरिक उड्डयन मंत्री नंद गोपाल नंदी और स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने शुक्रवार को लखनऊ में एक प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि दिल्ली के हवाई अड्डे पर यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुये नोएडा के जेवर में 2003 में एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की योजना बनाई गई थी. प्रदेश की पिछली सरकारों ने इस पर कोई विशेष ध्यान नही दिया. योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री बनने के बाद इस दिशा मे केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय से बात की और जेवर हवाई अड्डे के काम को आगे बढ़ाया गया.

नोएडा में बनने वाले इस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से पश्चिम उत्तर प्रदेश के आगरा, मथुरा, वृन्दावन, मुजफ्फरनगर, मेरठ, अलीगढ, बुलंदशहर तथा मुरादाबाद सहित एनसीआर क्षेत्र में आर्थिक विकास, पर्यटन, रोजगार और व्यवसाय के अवसर बढ़ने की उम्मीद है.

नंदी ने बताया कि पहले चरण में करीब 1000 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण यमुना एक्सप्रेस वे डेवलपमेंट ऑथोरिटी द्वारा किया जाएगा जिसपर करीब 2000 करोड रूपये खर्च होंगे. इसके अलावा येडा एनसीआर क्षेत्र से पश्चिमी जिलों को सड़क, रेल और मेट्रो से जोड़ने का काम करेंगी.

'दिल्ली एयरपोर्ट पर कम होगा दबाव; पर्यटन, उद्योग को फायदा'

स्वास्थ्य मंत्री सिंह ने बताया कि अभी दिल्ली के हवाई अड्डे पर प्रतिवर्ष करीब छह करोड़ यात्री आते जाते है और यह संख्या हर साल बढती ही जा रही है. इन हालात में दिल्ली के नजदीक एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का महत्व बढ़ जाता है. इसलिए केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार इस जेवर हवाई अड्डे को जल्द से जल्द बनाना चाहती है.

उन्होंने कहा कि नोएडा में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बन जाने से इस क्षेत्र में औद्योगिक निवेश बढ़ेगा. जैसे बहुराष्ट्रीय कंपनी सैमसंग यहां निवेश कर रही है, उसे अपना व्यवसाय बढ़ाने में काफी मदद मिलेगी. इसी तरह प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग फार्मास्युटिकल पार्क बनाने की योजना बना रहा है उसे भी इस हवाई अड्डे से काफी मदद मिलेंगी.

एक सवाल के जवाब में सिंह ने कहा कि कुशीनगर हवाई अडडे को एयरपोर्ट अथारिटी ऑफ इंडिया के अंतर्गत लेने पर भी बातचीत चल रही है. इसके अलावा बुद्ध सर्किट को और अधिक सुविधाएं देने के लिये वाराणसी से सारनाथ तक हेलीकाप्टर सेवा शुरू करने पर विचार चल रहा है.

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