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अफगानिस्तान शांति बैठक में तालिबान से अनाधिकारिक बैठक से विदेश मंत्रालय का इनकार

नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता उमर अब्दुल्ला द्वारा सरकार के इस कदम की आलोचना के बाद मंत्रालय ने दी सफाई

Updated On: Nov 10, 2018 08:14 PM IST

FP Staff

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अफगानिस्तान शांति बैठक में तालिबान से अनाधिकारिक बैठक से विदेश मंत्रालय का इनकार
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शुक्रवार को विदेश मामलों के मंत्रालय (एमईए) ने तालिबान के साथ 'गैर-आधिकारिक' वार्ता में भारत की भागीदारी की रिपोर्ट पर अपनी सफाई दी. मंत्रालय ने कहा कि अफगान शांति शिखर सम्मेलन में भारतीय प्रतिनिधि आतंकवादी समूह के साथ बातचीत करेंगे यह मंत्रालय ने कभी नहीं कहा.

एमईए के प्रवक्ता रविेश कुमार ने नई दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, 'हमने सिर्फ यह कहा है कि अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ घनी द्वारा अफगानिस्तान पर आयोजित बैठक में हम भाग लेंगे.

इसके साथ ही कुमार ने कहा कि भारत बैठक का हिस्सा है क्योंकि यह सुलह प्रक्रिया का समर्थन करता है. उन्होंने कहा, 'अगर कोई भी प्रक्रिया अफगानिस्तान पर हमारी नीति के अनुरूप है, तो हम इसका हिस्सा बनेंगे. हमने पहले से ही यह स्पष्ट कर दिया है कि हमारी भागीदारी गैर-आधिकारिक स्तर पर है.'

मंत्रालय का ये बयान नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने शुक्रवार को जब इन रिपोर्टों पर सरकार को घेरा उसके बाद आया है. अब्दुला ने सरकार को लताड़ लगाते हुए नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली सरकार से पूछा था कि आखिर क्यों सरकार जम्मू-कश्मीर में इस तरह की बातचीत की शुरुआत कर सकती है. अब्दुल्ला ने लिखा था- अगर मोदी सरकार तालिबान के साथ अनाधिकारिक बातचीत कर सकती है तो फिर जम्मू कश्मीर में क्यों नहीं कर सकती है.

रूसी विदेश मंत्रालय ने पिछले हफ्ते कहा था कि अफगानिस्तान पर मास्को प्रारूप बैठक 9 नवंबर होगी और अफगान तालिबान कट्टरपंथी आंदोलन के प्रतिनिधि इसमें भाग लेंगे. रूसी समाचार एजेंसी टीएएसएस के मुताबिक, यह दूसरी बार है जब रूस युद्ध प्रभावित अफगानिस्तान में शांति स्थापित करने के तरीकों की तलाश में क्षेत्रीय शक्तियों को एकसाथ लाने का प्रयास कर रहा है.

4 सितंबर को प्रस्तावित ऐसी पहली बैठक को अफगान सरकार ने आखिरी पलों में वापस ले लिया था. रूसी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए अफगानिस्तान, भारत, ईरान, चीन, पाकिस्तान, अमेरिका और कुछ अन्य देशों को निमंत्रण भेजा गया था.

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