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NEET 2018 के नए नियमों ने तोड़ा कइयों के डॉक्टर बनने का सपना

NEET 2018 ने अपने नए नियमों में ऐसे बदलाव किए हैं जिनकी वजह से कई स्टूडेंट इस परीक्षा में शामिल नहीं हो पाएंगे

Mahesh Peri Updated On: Feb 11, 2018 11:29 AM IST

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NEET 2018 के नए नियमों ने तोड़ा कइयों के डॉक्टर बनने का सपना

'इसने मेरे डॉक्टर बनने के सपने को तोड़ दिया. इसके लिए **** एमसीआई पूरी तरह जिम्मेदार है. अगर मैं सो कर कल नहीं उठा (अगर मैंने सुसाइड कर लिया तो) तो वही इसके लिए जिम्मेदार होंगे.' हमारे प्रश्न-उत्तर प्लेटफॉर्म पर आशंकित कर देने वाली यह एक स्टूडेंट की टिप्पणी थी.

हमने हड़बड़ी में उसे फोन किया और उसे समझाने की कोशिश की तो जो हमें सुनने को मिला, उसने नए नियमों के प्रति हमारे गुस्से को और बढ़ाया ही. काउंसलिंग कई बार दिल को बड़ी तकलीफ पहुंचाने वाला काम होता है. NEET का नोटिफिकेशन, जिसका एमबीबीएस करने की ख्वाहिश रखने वाला स्टूडेंट बड़ी शिद्दत से इंतजार करता है, काफी देर से आया. और ये कई दुखदायी नियमों के साथ आई जिसने गहरा सदमा दिया और कईयों का सपना तोड़ दिया.

नियम 1- एडिशनल सब्जेक्ट के रूप में बॉयोलोजी पढ़ने वाले हुए अयोग्य

एक स्टूडेंट ने एक घंटे के अंदर चार बार फोन किया. उसने बारहवीं में एडिशनल सब्जेक्ट के तौर पर बायोलॉजी लिया था. उसने बाकी स्टूडेंट्स की तरह ही बायोलॉजी की पढ़ाई की और परीक्षा दी थी. अब वह NEET की परीक्षा की तैयारी के लिए दो साल से कोटा में था. लेकिन NEET नोटिफिकेशन ने बॉयोलॉजी को एडिशनल सब्जेक्ट के रूप में पढ़ने वाले सभी स्टूडेंट्स को अयोग्य करार दे दिया था. लड़के का दिल टूट गया था और फोन लाइन पर दूसरी तरफ वह बुरी तरह रो रहा था. लेकिन सीबीएसई के पास उसकी आवाज सुनने के लिए कान नहीं हैं.

नियम 2- एनआईओएस से पढ़ने वाले नहीं दे सकेंगे NEET

उन्होंने आगे कदम बढ़ाते हुए इस धमकी पर अमल भी कर दिया. मानव संसाधन मंत्रालय के तमाम आश्वासनों के बावजूद एमसीआई ने अपने मन की चलाई और तत्काल प्रभाव से नियम में बदलाव भी कर दिया था. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपेन स्कूलिंग (एनआईओएस) को NEET से अयोग्य करार दे दिया गया है. एनआईओएस बनाने का मकसद मुख्यधारा की शिक्षा व्यवस्था के अनुपूरक के तौर पर था, और इसमें काम-धंधे से जुड़े लोगों को आगे पढ़ाई करने का मौका मिलता था, लेकिन इनके सपने अब राख हो चुके हैं.

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मौजूदा समय में 3500 से ज्यादा सेंटर में पंजीकृत 27 लाख स्टूडेंट के साथ एनआईओएस दुनिया में सबसे बड़ा एजुकेशन सिस्टम होने का दावा करता है. 40 लाख से ज्यादा स्टूडेंट एनआईओएस से पास होने का सर्टिफिकेट रखते हैं. और नीट का नोटिफिकेशन पूरी तरह एनआईओएस की स्थापना के विचार को ध्वस्त कर देता है.

इसके लिए तर्क दिया जा रहा है कि विज्ञान के विषयों में प्रैक्टिकल परीक्षा जरूरी है. अगर यही करना है तो एनआईओएस बायोलॉजी या विज्ञान की पढ़ाई क्यों कराता है? और इनमें 20% अंक प्रैक्टिकल के भी होते हैं, जो कि नियमित स्कूलों में भी होते हैं. उन्होंने अगर यह बात दो साल पहले बता दी होती तो इन लोगों ने इस कोर्स का चुनाव ही नहीं किया होता. इन बच्चों को कोर्स खत्म करने के बाद यह बात बताना एक अपराध है.

नियम 3- फिर से आयु सीमा हुई 25 साल

उम्र की सीमा फिर से 25 साल कर दी गई है. इससे फिर से एक लंबी कानूनी लड़ाई शुरू होगी. ये सभी नियम स्टूडेंट्स को अयोग्य करार देने के लिए हैं. ये उन्हें शामिल करने के बजाय बाहर करने के लिए हैं. इन्हें तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है. और इन्होंने एकदम से उम्मीदों को तोड़ डाला है.

अभी हाल में ही एक परीक्षा के लिए नियम बनाया गया कि लड़के सिर्फ दाहिने हाथ के अंगूठे का निशान इस्तेमाल करेंगे और लड़कियां बाएं हाथ के अंगूठे का. एक स्टूडेंट ने हमारी हेल्पलाइन पर फोन किया और रोते हुए कह रहा था, 'सर, मेरे दाहिने हाथ का अंगूठा नहीं है. मुझे क्या करना चाहिए?' हमने यह मामला अधिकारियों के सामने उठाया और उनकी तरफ से किसी भी हाथ के अंगूठे का नियम कर दिया गया. लेकिन बेताल फिर से पेड़ जा बैठा. हाल की एम्स परीक्षा में नए सिरे यही गलती फिर दोहराई गई.

स्टूडेंट्स के साथ ऐसी उदासीनता कोई नई बात नहीं है. असम, मेघालय और जम्मू कश्मीर के आधार कार्ड नहीं रखने वाले स्टूडेंट्स की समस्या का समाधान किए बिना साल के बीच में ही, नेशनल एप्टीट्यूट टेस्ट इन आर्किटेक्चर (NATA) के आवेदन फॉर्म में आधार को जरूरी बना दिया गया. जब कैरियर360 ने इस मुद्दे को उठाया तो NATA परीक्षा का संचालन करने वाली टीसीएस ने जवाब दियाः टटीसीएस आईओएम डिजिटल लर्निंग हब से संपर्क करने के लिए शुक्रिया. आप आधार कार्ड नंबर के स्थान पर 00000000000 भर सकते हैं.'

एक सवाल जिसका जवाब नहीं मिल पाता है- क्या नियम बनाते समय स्टूडेंट के बारे में भी सोचा जाता है?

(लेखक महेश पेरी Careers360.com. के संस्थापक हैं)

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