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'कॉरपोरेट टैक्स घटाने का वादा पूरा करें फाइनेंस मिनिस्टर'

फिक्की के प्रेसीडेंट ने कहा, फाइनेंस मिनिस्टर कॉरपोरेट टैक्स में कमी लाएं

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: Jan 29, 2017 05:44 PM IST

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'कॉरपोरेट टैक्स घटाने का वादा पूरा करें फाइनेंस मिनिस्टर'

इस बार बजट में देश की अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए कई बड़े फैसले लिए जा सकते हैं. फ़र्स्टपोस्ट हिंदी के साथ बातचीत में फिक्की के प्रेसीडेंट और जायडस कैडिला के सीएमडी पंकज पटेल कहते हैं कि फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली को इंटरेस्ट रेट और कॉरपोरेट टैक्स में कटौती करनी चाहिए. पेश है इस साक्षात्कार के अहम अंश.

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नोटबंदी के बाद फिक्की ने वित्त मंत्री अरुण जेटली से क्या मांग की है. टैक्स स्लैब और खासकर कॉरपोरेशन टैक्स को लेकर फिक्की का क्या कहना है?

देखिए जेटली जी ने पहले भी  कॉरपोरेट टैक्स 30 फीसदी से घटाकर 25 फीसदी करने की बात की थी. वे अपना बादा पूरा करें. मुझे आशा है कि इस बार कॉरपोरेट टैक्स स्लैब घटाकर 25 फीसदी कर दिया जाए. अगर 25 प्रतिशत नहीं होता है तो कम से कम कुछ तो कम हो जाए. जिससे लोगों को बिजनेस करने में थोड़ा आसानी हो जाए.

इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए इनवेस्टमेंट को बढ़ावा देना चाहिए. साथ ही इंटरेस्ट रेट में भी कमी की जाए ताकि देश की इकोनॉमी को ग्रोथ मिल सके.

भारत में टैक्स कानून को और आसान बनाने के लिए फिक्की की तरफ से क्या सुझाव दिए गए हैं. टैक्स संबंधी प्रोसेस को और आसान करने के लिए सरकार से क्या उम्मीद है.

भारत में टैक्स कानून और उसके एडमिनिस्ट्रेशन के तरीके को भी आसान किया जाना चाहिए. जब दुनिया के बहुत सारे देश में ऐसा हो रहा है तो भारत में क्यों नहीं हो सकता है. हम टेक्नोलॉजी के जरिए इसे और आसान बना सकते हैं. जिस तरह टैक्स रिफंड के तरीके को आसान बनाया गया उसी तरह से आईटीआर फाइल करने से लेकर और दूसरी प्रक्रिया को भी आसान किया जाना चाहिए.

नोटबंदी के बाद बैंकिंग सेक्टर में काफी लिक्वीडिटी आया है. रेवेन्यू ग्रोथ भी अच्छा है. क्या आने वाले बजट में कम इंटरेस्ट रेट पर कुछ फिक्स लोन देने की घोषणा की जा सकती है.

बिल्कुल, ये जरूरी है कि छोटे और मझोले उद्यमियों को सस्ती दरों पर लोन मिल सके. इससे छोटे उद्योगपतियों में कॉम्पिटिशन शुरु होगा, जो देश की अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा होगा. इससे आगे चल कर हम वर्ल्ड के कॉम्पिटिशन में भी रह सकेंगे.

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मोदी सरकार सत्ता में बड़े-बड़े नारे और घोषनाओं के साथ आई थी. पीएम ने घोषणा की थी कि पांच साल में हम 10 करोड़ लोगों को रोजगार देंगे. रोजगार के क्षेत्र में काफी उम्मीद थी. वावजूद आज तक प्राइवेट इंवेस्टमेंट एक लेवल तक नहीं आ पाया जिससे रोजगार मिल सके.

Income tax

इंडिया में तो इकोनॉमी ग्रोथ हुआ है, पर ग्लोबल इकोनॉमी की ग्रोथ डाउन है. ग्लोबल इकोनॉमी डाउन होने से हमारा एक्सपोर्ट प्रभावित हुआ है. आप देख रहे हैं कि एक्सपोर्ट की वेल्यू कम हो गई है. पूरी दुनिया की इकोनॉमी में मंदी आई है. देश के साथ-साथ वर्ल्ड इकोनॉमी में सुधार से ही रोजगार के अवसर बढ़ेंगे. सवाल- कॉरपरेट टैक्स पर सरकार कहती है कि जितने भी इंसेंटिव अभी मिल रहा है, उसमें धीरे-धीरे कम करेंगे.

कैशलेस इकोनॉमी को लेकर भी बड़ी-बड़ी बाते की जा रही हैं. देश की ज्यादातर आबादी गांव में रहती है. सरकार को खासकर ग्रामीण इलाके में किस स्तर पर काम करने की जरूरत है.

कैशलेस के अपने फायदे हैं. जब इकोनॉमी डिजिटल हो जाएगी तो हर लेनदेन का रिकॉर्ड बनेगा. आज कोई आदमी बैंक में जाता है तो बैंक इनकम प्रूफ दिखाने को कहता है. बहुत सारे लोग नहीं दिखा पाते हैं. आप कहां से दिखाओगे. पर इस सिस्टम से आपको यही सब फायदा होगा.

एक फरवरी को पेश होने वाला बजट अपने समय से पहले आ रहा है. सरकार को समय से पहले बजट पेश करने की क्या जरूरत आन पड़ी.

समय से पहले बजट आना काफी अच्छा कदम है. अभी तक ये होता था कि बजट आता था और उसको अप्रूव होने में जून तक समय लग जाता था. जिससे सरकार बजट में जो प्रावधान करती थी उसको लागू करने में कम समय मिलता था. अब क्या होगा कि बजट प्रावधान को लागू करने में ज्यादा समय मिलेगा.

रेलवे का बजट इस बार आम बजट के साथ मर्ज कर दिया गया. आप बताएं कि इससे आम लोगों पर क्या प्रभाव पड़ेगा. आप इस कदम को किस प्रकार देख रहे हैं

देखिए रेल बजट को अलग पेश करने की कोई जरूरत नहीं थी. अब एक साथ पेश होने से अकाउंटिंग ट्रांसपैरेंसी बढ़ेगी.

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