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केंद्र सरकार के फैसले के बाद मुश्किल होगा ओबीसी होना, जानिए कैसे

आयोग में एक अध्यक्ष, एक उपाध्यक्ष और तीन अन्य सदस्य होंगे

Bhasha Updated On: Mar 24, 2017 03:16 PM IST

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केंद्र सरकार के फैसले के बाद मुश्किल होगा ओबीसी होना, जानिए कैसे

केंद्रीय कैबिनेट ने सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा वर्ग के लिए राष्ट्रीय आयोग एनसीईबीसी के गठन को गुरूवार को मंजूरी दे दी. इस आयोग को संवैधानिक दर्जा प्राप्त होगा.

गुरुवार को केंद्र की मोदी सरकार ने पिछड़ा वर्ग आयोग की जगह नया आयोग बनाने के लिए कैबिनेट की मंजूरी दे दी. अब कैबिनेट की मंजूरी के बाद सरकार इसके लिए संसद में संशोधन विधेयक लाएगी.

ओबीसी तबके की मांग

सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्गों, ओबीसी की मांग स्वीकार करते हुए आयोग के गठन को मंजूरी दी है.

ओबीसी तबके की मांग थी कि उनके लिए अनुसूचित जाति आयोग एवं अनुसूचित जनजाति आयोग की तर्ज पर संस्था का गठन किया जाए.

अनुसूचित जाति आयोग एवं अनुसूचित जनजाति आयोग संवैधानिक संस्थाएं हैं.

कैबिनेट ने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग एनसीबीसी को भंग करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी. इससे वह कानून निष्प्रभावी हो जाएगा जिसके तहत आयोग की स्थापना की गई थी.

नए नियम के लागू होने से क्या अंतर आएंगे

-अभी तक पिछड़ा वर्ग आयोग को वैधानिक दर्जा मिला हुआ था.

-अब संवैधानिक दर्जा मिल जाने के बाद आयोग किसी जाति को पिछड़े वर्ग में जोड़ने और हटाने को लेकर सरकार को प्रस्ताव भेज सकता है.

-इसमें केंद्र की ओबीसी सूची में नई जातियों को शामिल करने के लिए संसद की मंज़ूरी लेना अनिवार्य होगा.

- नए आयोग में एक अध्यक्ष, एक उपाध्यक्ष और तीन अन्य सदस्य होंगे.

क्या है एनसीबीसी

एनसीबीसी सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के तहत एक वैधानिक संस्था थी. इसकी स्थापना 14 अगस्त 1993 को हुई थी.

इस आयोग का काम भेदभाव की शिकायतों और अधिकारियों की ओर से आरक्षण नियमों को लागू नहीं किए जाने जैसे विभिन्न मुद्दों पर पिछड़े वर्ग से संबंधित लोगों की शिकायतों को प्राप्त करना था.

बहरहाल, एनसीबीसी को ओबीसी से संबंधित लोगों की शिकायतों पर विचार करने का अधिकार नहीं था.

संविधान के अनुच्छेद 338 (10) के साथ अनुच्छेद 338 (5) को पढ़ने पर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग पिछड़े वर्गों से जुड़े लोगों की सभी शिकायतों, अधिकारों एवं सुरक्षा उपायों पर विचार करने के लिए सक्षम संस्था है.

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