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नवाजुद्दीन विवाद: एक्टर भले ही बड़े हों, पर पार्टनर छोटे साबित हुए हैं नवाज

कहना लाजिमी होगा कि नवाज या रितिक भले ही एक्टर बन गए हों लेकिन अच्छा पार्टनर बनने के लिए उन्हें अभी लंबी राह चलने की जरूरत है

Swati Arjun Swati Arjun Updated On: Nov 02, 2017 09:02 AM IST

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नवाजुद्दीन विवाद: एक्टर भले ही बड़े हों, पर पार्टनर छोटे साबित हुए हैं नवाज

नवाजुद्दीन सिद्दीकी पिछले कुछ दिनों से सुर्खियों में हैं और इस बार इसकी वजह उनकी कोई नई फिल्म न होकर हाल ही में छपकर बाजार में आई उनकी आत्मकथा है. लेकिन बाजार में आने के कुछ ही दिनों के भीतर नवाज पर इस तरह से चौतरफा हमले हुए कि वो किताब वापस लेने के लिए मजबूर हो गए.

इन्हीं नवाज ने किताब के लॉन्च से पहले अति-उत्साह में दावा किया था, 'किताब में जाहिर की गई हर घटना न सिर्फ सच्ची है बल्कि पूरी तरह से ईमानदार है.' लेकिन, तब भी उन्होंने इस बात का जिक्र जरूर किया था, 'हो सकता है कि कुछ लोगों को इस किताब में दर्ज बातों से ठेस पहुंचे, उन्हें मैं पहले ही सॉरी बोल देना चाहता हूं.'

नवाज ने ईमानदारी के नाम पर खेल किया है?

इसका मतलब ये हुआ कि नवाज को पहले से ही इस बात का अंदेशा था कि किताब में कुछ न कुछ तो ऐसा है जो कुछ लोगों को पसंद नहीं आ सकता है, लेकिन ईमानदारी, सच्चाई, जीवनी, स्टार-स्टेटस जैसे भारी-भरकम शब्दों की बोझ में दबकर उन्होंने वो सबकुछ छपने दिया, जिससे दूसरे पक्ष या यूं कहें कि उनके जीवन में किसी समय में काफी करीब रही महिलाओं का न सिर्फ अपमान हुआ बल्कि एक तरह से कहें तो उनके चरित्र पर उंगलियां भी उठाई गईं.

उनकी दोनों ही पूर्व प्रेमिकाओं सुनीता रजवार और निहारिका सिंह ने न सिर्फ किताब में व्यक्त किए गए उनके रिश्तों से जुड़ी निजी जानकारियों को झूठा और मनगढ़ंत कहा, बल्कि नवाज को एक प्रेमी या व्यक्ति के तौर पर भी- मैनीपुलेटर, विश्वास न करने योग्य और रिश्ते में उनका (महिलाओं का) इस्तेमाल करने वाला बताया. रजवार के मुताबिक, नवाज उन दिनों भी उन दोनों की निजी बातों को दोस्तों और संगी-साथियों के बीच गॉसिप के तौर पर शेयर किया करते थे. वो आदत या कमजोरी आज तक उनके साथ बनी हुई है.

निहारिका सिंह ने जहां नवाज के खिलाफ राष्ट्रीय महिला आयोग का दरवाजा खटखटाया है, वहीं सुनीता रजवार ने एक फेसबुक पोस्ट लिखकर नवाज के सभी दावों को न सिर्फ झूठा बल्कि उन्हें एक चालाक व्यक्ति भी कहा है, जो पब्लिसिटी पाने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है.

हाल के दिनों में कई और फिल्मी कलाकारों की जीवनी सामने आई है, एक हेमामालिनी और दूसरी आशा पारेख की. हेमा मालिनी की बायोग्राफी 'बियॉन्ड द ड्रीम गर्ल', आशा पारेख की 'द हिट गर्ल', ऋषि कपूर की 'खुल्लम खुल्ला' और नसीरुद्दीन शाह की 'एंड देन वन डे', पिछले साल रेखा के जीवन पर आधारित 'रेखा-द अनटोल्ड स्टोरी' सामने आई.

और किसी के साथ ऐसा क्यों नहीं हुआ?

इन सभी किताबों में इन कलाकारों ने अपने जीवन के अंतरंग हिस्सों को पाठकों के साथ बांटा है, जिसमें हेमा-मालिनी की जीतेंद्र के साथ होते-होते रह गई शादी से लेकर आशा पारेख और नासिर हुसैन के बीच प्रेम संबंधों की भी चर्चा है लेकिन इन सबके बावजूद न तो कहीं कोई आपत्ति दर्ज की गई न ही कोई विरोध. फिर नवाज के मामले में गलत क्या हो गया?

अब जबकि वे चारों तरफ से घिर गए हैं तो एक बार फिर उनके बचाव में एक महिला मैदान में उतरी हैं, जिनका नाम अंजली हैं और वे नवाज की पत्नी हैं. और जैसा कि नवाज के जीवन में होता आया है, अंजली ने किताब में व्यक्त विवादास्पद बातों के लिए नवाज की जीवनी लिखने वाली उनकी सह-लेखिका ऋतुपर्णा चटर्जी को दोषी ठहराया है.

अंजली के मुताबिक चूंकि नवाज की अंग्रेजी बहुत अच्छी नहीं है और वे पूरी तरह से ऋतुपर्णा पर निर्भर थे, इसलिए उन्होंने उनपर पूरा भरोसा किया और ऋतुपर्णा ने घटनाओं को अपने हिसाब से लिखा. अंजली के अनुसार अगर किताब हिंदी में लिखी गई होती तो शायद ये सब-कुछ नहीं होता. इसलिए उन्होंने नवाज को किताब वापस लेने की सलाह दी.

आत्मकथा या जीवनी लिखने के दौरान अक्सर सेलिब्रिटीज अपनी निजी जिंदगी की बानगी पाठकों या दर्शकों के सामने लेकर आते हैं, लेकिन जब भी कोई दो लोगों के संबंधों की बात होती है तो इस बात का पूरा ख्याल रखा जाता है कि दूसरे की भावनाएं आहत न हों. अधिकार और आजादी में फर्क होता है, नवाज यहां चूक गए. वे ये भूल गए कि जो कुछ भी उनके रिश्ते में घटा था वो सिर्फ उनका इतिहास नहीं था बल्कि उनकी प्रेमिका भी उसमें बराबर की साझीदार थीं. उस वक्त उन-दोनों का जीवन ‘साझा-जीवन’ था और दोनों का सच ‘साझा-सच’.

नवाज को याद करना चाहिए कि सालों पहले कई फिल्मों में उनके सह-कलाकर रह चुके ओमपुरी की जीवनी लिखने वाली उनकी पत्नी नंदिता पुरी ने जिस तरह से ओम के जीवन की स्याह पक्ष को दुनिया के सामने रखा था, उससे न वे कभी उबर सके न ही पत्नी नंदिता को कभी माफ कर सके. जिसका अंत उन दोनों के तलाक और ओमपुरी की असमय मौत के साथ खत्म हुआ.

om puri

सबसे अहम बात हाल-फिलहाल के दिनों में बॉलीवुड से जुड़ी ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं जहां संबंधों को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का लंबा दौर चला है. सबसे ताजा उदाहरण- कंगना-रितिक विवाद है, जहां पूरी इंडस्ट्री एक तरह से रितिक के समर्थन में खड़ी दिखी. रुपहले पर्दे के ये स्टार साथ काम करते हुए रिश्ते तो बनाते हैं लेकिन रिश्ता बिगड़ने पर कभी भी उसपर साफगोई नहीं बरतते.

इंडस्ट्री में मर्द कुछ भी कर लें, कोई सुनवाई नहीं है

जिया खान की मां आज भी अपनी बेटी को इंसाफ दिलाने की कोशिश में है. सुपरस्टार अक्षय कुमार अपनी साथी कलाकार मल्लिका पर सेक्सिस्ट कमेंट करते हैं तो उनकी पत्नी उनके समर्थन में आ जाती हैं. नवाज के लिए भी अंजली सामने आई हैं. ऐसे में यही कहा जा सकता है कि अमिताभ बच्चन, विनोद खन्ना, हेमा मालिनी, रेखा, आशा पारेख, नंदा और विनोद मेहरा सरीखे कलाकारों ने न सिर्फ फिल्मी पर्दे पर बल्कि असल जिंदगी में भी अपने रिश्तों की गरिमा बचा कर रखी थी.

आज भी हमारे सामने शाहरुख खान, आमिर, सलमान खान, ऐश्वर्या राय, शिल्पा शेट्टी जैसे कलाकार हैं जिन्होंने अपनी निजी रिश्तों का तमाशा नहीं बनाया, न ही क्षणिक फायदों के लिए उसका इस्तेमाल किया.

दिक्कत ये है कि हर इंडस्ट्री की तरह फिल्मी दुनिया में भी हर रोज़ महिलाओं के साथ गलत सुलूक किया जा रहा है, जहां महिलाएं अगर आवाज़ उठाती हैं तो इंडस्ट्री या तो दो हिस्सों में बंट जाती है या चुप्पी मार जाती है, लेकिन कोई पुरुष गलत करता है तो उसे एक मामूली स्कैंडल मानकर भुलाने की कोशिश की जाती है. इसलिए ये कहना लाजिमी होगा कि नवाज या रितिक भले ही एक्टर बन गए हों लेकिन अच्छा पार्टनर बनने के लिए उन्हें अभी लंबी राह चलने की जरूरत है.

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