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NCRB रिपोर्ट: महिलाओं के खिलाफ अपराध में सबसे ऊपर पश्चिचम बंगाल

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो ने हैरान करने वाले आंकड़े पेश किए हैं

Updated On: Dec 03, 2017 09:56 PM IST

Ravishankar Singh Ravishankar Singh

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NCRB रिपोर्ट: महिलाओं के खिलाफ अपराध में सबसे ऊपर पश्चिचम बंगाल

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) ने 30 नवंबर को जारी अपनी रिपोर्ट में कई खुलासे किए हैं. देश के गृहमंत्री राजनाथ सिंह द्वारा जारी ‘क्राइम इन इंडिया- 2016’ नाम की इस रिपोर्ट में कई ऐसे आंकड़े सामने आए हैं, जो काफी हैरान करने वाले हैं.

इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद कई राज्यों ने अपराध और अपराधियों पर लगाम कसने की तैयारी भी शुरू कर दी है. मध्यप्रदेश की सरकार ने तो यह रिपोर्ट आने से पहले ही एक बड़ा फैसला ले लिया है. मध्यप्रदेश सरकार ने 12 साल तक की बच्चियों से रेप के मामले में गुनाहगारों को फांसी की सजा का प्रस्ताव कैबिनेट से पास कर दिया है.

क्या है रिपोर्ट?

गौरतलब है कि एनसीआरबी की सालाना रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि साल 2015 के मुकाबले 2016 में अपराध का ग्राफ ढाई फीसदी ज्यादा बढ़ा है. रिपोर्ट के मुताबिक महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हुए अपराध में उत्तर प्रदेश सबसे अव्वल है. लेकिन, जनसंख्या और क्षेत्रफल की दृष्टि से दिल्ली और केरल यूपी से कहीं आगे हैं.

गौरतलब है कि साल 2016 में देश में आईपीसी के तहत 29 लाख 75 हजार 711 और स्पेशल एंड लोकल लॉ (एसएलएल) के तहत 18 लाख 55 हजार 804 मामले दर्ज हुए हैं.

उत्तर प्रदेश दो लाख 82 हजार 171 मामलों के साथ सबसे ऊपर है, लेकिन क्राइम रेट के हिसाब से यूपी की रैंकिंग देश में 26वें स्थान पर है. क्राइम रेट रेशियो में दिल्ली सबसे ऊपर है. जहां प्रत्येक एक लाख की जनसंख्या पर 974 अपराध होते हैं. जो कि भारत के किसी भी महानगर से कहीं ज्यादा हैं.

उत्तर प्रदेश अव्वल

उत्तर प्रदेश में हत्या और महिलाओं के खिलाफ छेड़छाड़ के सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं. वहीं बिहार में भी खासकर महिलाओं और दूसरे हत्या के मामलों में काफी तेजी देखने को मिली है.

गौरतलब है कि गृह मंत्रालय की ओर से हर साल यह आंकड़ा जारी किया जाता है. इस बार की रिपोर्ट की खास बात यह है कि पहली बार पिछले तीन साल के मुकाबले हत्या के मामलों में कमी देखने को आई है. इसके बावजूद उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में मर्डर की संख्या में कोई खास कमी नहीं आई है.

girl child rape case

साल 2016 में उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 4 हजार 889 हत्याएं हुई हैं. यह मामला देश में दर्ज कुल मामलों का 16 प्रतिशत से भी ज्यादा है. बिहार की बात करें तो यहां पर भी 2 हजार 581 हत्याएं हुई हैं. जो कि कुल मामले का लगभग 8 प्रतिशत है.

2015 की तुलना में 2016 में अगर राज्यों में होने वाले क्राइम की बात करें तो उत्तर प्रदेश ओवर ऑल अपराध के मामले में नंबर वन है. आईपीसी क्राइम का लगभग 10 प्रतिशत मामला इसी राज्य में दर्ज हुआ है. इसके बाद दूसरे नंबर पर मध्यप्रदेश रहा. महाराष्ट्र तीसरे और केरल चौथे नंबर रहा.

दंगों का हिसाब किताब

देश में अगर दंगाओं की बात करें तो साल 2015 की तुलना में साल 2016 में दंगा की संख्या में 5 प्रतिशत की कमी आई है. देश में जहां 2015 में 65 हजार 255 दंगों के मामले दर्ज हुए थे तो वहीं 2016 में 61 हजार 974 मामले ही सामने आए हैं.

एनसीआरबी रिपोर्ट में अगर महिलाओं की बात करें तो बीते साल देश में महिलाओं के खिलाफ तीन लाख 38 हजार 954 मामले सामने आए हैं. सबसे ज्यादा 49 हजार 262 मामले यूपी में दर्ज हुए हैं. यह कुल मामलों का 14.5 प्रतिशत है.

पश्चिम बंगाल में ऐसे मामलों की संख्या 32,513 रही जो कि राष्ट्रीय स्तर पर दर्ज मामलों का 9.6 प्रतिशत है. हालांकि, क्राइम रेट के आधार पर दिल्ली में महिलाओं के साथ अपराध सबसे ज्यादा हुए हैं.

अगर बात हम बात करते हैं बच्चों के साथ होने वाले अपराध की तो यूपी बच्चों के साथ अपराध और अपहरण की घटनाओं को लेकर भी सबसे ऊपर है. यूपी में बच्चों के अपहरण और बंधक बनाए जाने के 9 हजार 657 मामले सामने आए हैं. यूपी के बाद बच्चों के खिलाफ हुए अपराध में महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश का नंबर आता है.

इस रिपोर्ट की सबसे खास बात यह है कि देश की महिलाएं घर के अंदर हों या बाहर कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं. साल 2016 में 3 लाख 39 हजार 457 मामले महिलाओं के खिलाफ हुए.

महिलाओं के साथ वारदात के आंकड़े 

सबसे हैरान करने वाली बात यह सामने आई है कि महिलाओं के साथ होने वाली हर तीसरी वारदात पति ने या फिर नजदीक के किसी रिश्तेदार ने किया है. एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक साल 2016 में महिलाओं के साथ रेप के सबसे ज्यादा मामले मध्यप्रदेश में रहे. इस दौरान 4 हजार 882 महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया. यह संख्या किसी भी राज्य की तुलना में ज्यादा है. दूसरा नंबर उत्तर प्रदेश का आता है. यहां पर 4,816 महिलाओं के साथ रेप के मामले सामने आए हैं. 4,189 मामलों के साथ तीसरे नंबर पर महाराष्ट्र है.

महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध में सबसे अधिक केस पश्चिम बंगाल में दर्ज हुए हैं. उत्तर प्रदेश महिला अपराध में हर क्षेत्र को मिलाकर दूसरा नंबर हासिल किया है. महिलाओं के बाद रिपोर्ट में सबसे अधिक चिंता बच्चों से जुड़े अपराधों पर रही. साल 2016 में बच्चों के खिलाफ एक लाख 6 हजार 958 मामले सामने आए हैं. यह साल 2015 की तुलना में 10 प्रतिशत ज्यादा है. इनमें लगभग 35 प्रतिशत मामले सिर्फ शारिरिक शोषण से जुड़े हैं.

क्या है साइबर क्राइम का हाल?

अगर बात करें साइबर क्राइम की तो साल 2015 की तुलना में 2016 में साइबर क्राइम काफी बढ़ा है. साल 2016 में उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 2 हजार 639 मामले सामने आए हैं. वहीं महाराष्ट्र में 2,380 मामले निकल कर आए हैं.

एनसीआरबी की रिपोर्ट में कहा गया है कि साइबर क्राइम के लिहाज से मुंबई देश का सबसे असुरक्षित शहर है. नोटबंदी के बाद से साइबर क्राइम में काफी तेजी आई है. जहां साल 2014 में साइबर क्राइम के कुल 9,622 मामले दर्ज किए गए. वहीं 2015 में यह आंकड़ा बढ़कर 11 हजार 592 तक पहुंच गई. साल 2016 में साइबर क्राइम का यह आंकड़ा 12 हजार 317 तक पहुंच चुकी है.

जानकारों का मानना है कि जब अगले साल 2017 का क्राइम रिपोर्ट का डाटा एनसीआरबी लेकर आएगी तो साइबर क्राइम में पहले से कहीं ज्यादा बढ़ोतरी देखने को मिलेगी. क्योंकि, नोटबंदी के बाद से सबसे ज्यादा साइबर क्राइम की शिकायत मिल रही है. देश में डिजिटाइजेशन के सामने साइबर क्राइम एक सबसे बड़ी बाधा बन कर खड़ी है.

क्या है चौंकाने वाले तथ्य?

एनसीआरबी की रिपोर्ट में एक अहम ही चौंकाने वाली बात सामने आई है. यूपी के कई शहर देश के दूसरे शहरों की तुलना में कहीं ज्यादा सुरक्षित हैं. रिपोर्ट की खास बात यह है कि देश की 19 मेट्रो सिटी में आईपीसी के तहत दर्ज मामलों में सबसे ज्यादा मामला दिल्ली, बेंगलुरु और मुंबई का स्थान आता है. साल 2016 में दिल्ली में सबसे ज्यादा 479 हत्याएं हुई हैं. यूपी के तीन शहरों लखनऊ, कानपुर और गाजियाबाद का स्थान इस सूची में 12वें, 18वें और 17वें नंबर पर आता है.

Cyber Crime

एनसीआरबी की क्राइम रिपोर्ट सामने आने के बाद यह कहा जा सकता है कि तमाम संसाधनों की कमी के बावजूद भारत में पुलिस बल की कोई कमी नहीं है. अगर क्षेत्रफल के लिहाज से बात करें तो रूस के पास सिर्फ 11 लाख पुलिसकर्मी हैं. अमेरिका के पास 10 लाख पुलिसकर्मी हैं. वहीं विश्व का सातवां सबसे बड़ा देश भारत के पास लगभग 30 लाख पुलिसकर्मी मौजूद हैं.

इसके बावजूद कानून व्यवस्था को बनाए रखने की बात करें तो पुलिस को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. रिपोर्ट सामने आने के बाद अब जरूरत यह है कि सरकार पुलिस ड्यूटी के साथ-साथ अपराधियों पर अंकुश लगाने की दिशा में कारगर कदम उठाए.

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