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'हिंदू राष्ट्रवादी' नेताओं के 'संदेहास्पद मौत' पर बनेगी फिल्म

यह फिल्म श्यामा प्रसाद मुखर्जी, दीनदयाल उपाध्याय, लाल बहादुर शास्त्री और रघु वीरा की मौत को दिखाएगी

Updated On: Feb 23, 2018 06:42 PM IST

FP Staff

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'हिंदू राष्ट्रवादी' नेताओं के 'संदेहास्पद मौत' पर बनेगी फिल्म

राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म निर्माता उज्ज्वल चटर्जी 'हिंदू राष्ट्रवादी' नेताओं के 'संदिग्ध मौतों' पर एक फिल्म बनाने का फैसला किया है. यह फिल्म श्यामा प्रसाद मुखर्जी, दीनदयाल उपाध्याय और रघु वीरा की मौत को दिखाएगी.

इसके साथ ही फिल्म में पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की संदिग्ध मौत को भी दिखाया जाएगा. उज्जवल चटर्जी को साल 1992 में बांग्ला फीचर फिल्म गोंडी के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुका है.

चटर्जी ने बताया कि 1948 में महात्मा गांधी की हत्या के बाद जवाहरलाल नेहरू ने सभी संघ नेताओं को गिरफ्तार कर लिया था. यह रूसी एजेंसी केजीबी के साथ मिलकर किया गया था.

इस साल के अंत तक रिलीज हो सकती है फिल्म 

न्यूज 18 में छपी खबर के मुताबिक निर्देशक इस फिल्म को इसी साल रिलीज करने की योजना बना रहे हैं. इसके लिए वह ए ग्रेड के कलाकारों से बात कर रहे हैं. उनके मुताबिक यह फिल्म डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मृत्यु से शुरू होगा, फिर शास्त्री, वीरा और अंत में दीनदयाल उपाध्याय की रहस्यमय मौत को दिखाएगा. चटर्जी इनकी मौत को राजनीतिक मर्डर मानते हैं.

फिल्म की पटकथा अतुल गंगवार द्वारा लिखी जा रही है. वह इस समय इन नेताओं की रहस्यमय मौत पर शोध कर रहे हैं और किताब लिख रहे हैं. उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय आंदोलन में कई ऐसे चेहरे थे जो इसका मुख्य चेहरा थे. लेकिन एक खास विचाराधारा के लोगों को इससे बाहर रखा गया. वे आज मुख्यधारा में नहीं दिख रहे हैं.

जब उनसे पूछा गया कि शास्त्री तो कांग्रेसी थे, उनकी कहानी को इसमें क्यों शामिल किया गया. उनका कहना था कि शास्त्री नेहरु और इंदिरा के बीच आए थे. वह भारतीय जनमानस के रग - रग में बस चुके थे. यही वजह थी कि वह केजीबी के बनाए कहानियों में फिट नहीं बैठ पाए और वह खत्म हो गए.

उन्होंने कहा कि दीनदयाल उपाध्याय की हत्या कर दी गई थी लेकिन आधिकारिक तौर पर बताया गया कि उन्हें डकैतों ने मारा है.

लाल बहादुर शास्त्री की मौत से भी उठ सकता है पर्दा 

गंगवार ने कहा 'यह संदिग्ध है क्योंकि उसके बिस्तर के अलावा उसके पास से कुछ भी गायब नहीं हुआ था. उसपर खून के निशान थे. इसी तरह, वीरा और मुखर्जी की मौत संदेहजनक है. हमें उनकी मृत्यु पर दोबारा गौर करने और उसे सही परिप्रेक्ष्य को लाने की जरूरत है.

उपाध्याय का 11 फरवरी 1 9 68 को उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में निधन हो गया था. उस वक्त वह ट्रेन में यात्रा कर रहे थे. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की हिरासत में मृत्यु हो गई थी.

1966 में ताशकंद में भारत और पाकिस्तान के बीच ताशकंद समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद लालबहादुर शास्त्री की मृत्यु हो गई थी. दावा किया गया था कि दिल का दौरा पड़ने की वजह से उनकी मृत्यु हुई है. फिल्म पर काम कर रहे टीम का मानना है कि ये सभी 'राजनीतिक हत्याएं थी.

जानकारी के मुताबिक हाल ही में, आरएसएस की भारतीय चित्र सादर्श ने भारतीय फिल्मों में भारतीय नेताओं को दिखाने के लिए "चित्रभारती फिल्म समारोह" का आयोजन किया.

(न्यूज 18 के लिए इरम आगा की रिपोर्ट) 

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