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बीजेपी के लिए क्यों खास है पीएम मोदी का उदयपुर दौरा?

राजस्थान में 200 विधानसभा सीटें हैं जिनमें से 2013 में मोदी लहर के चलते 163 सीट बीजेपी के खाते में आई थी. इस बार भी बीजेपी मोदी फैक्टर पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है

Mahendra Saini Updated On: Aug 30, 2017 04:42 PM IST

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बीजेपी के लिए क्यों खास है पीएम मोदी का उदयपुर दौरा?

प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी पहली बार महाराणा प्रताप की धरती यानी मेवाड़ दौरे पर आए हैं. प्रधानमंत्री ने उदयपुर से 15 हजार करोड़ की योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया. इनमें कई हाईवे प्रोजेक्ट हैं तो कोटा में चंबल नदी पर बना हैंगिंग ब्रिज भी है. 1.4 किलोमीटर लंबा अपनी तरह का ये देश का सिर्फ तीसरा ब्रिज है. खास बात ये है कि इस ब्रिज को बनाने में 9 देशों की तकनीक और इंजीनियरों ने मेहनत की है.

इस दौरान प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बनाए प्रताप गौरव केंद्र को भी विजिट किया. संघ इस केंद्र का उद्घाटन मोदी के हाथों ही करवाना चाहता था लेकिन कुछ कारणों के चलते ये सरसंघचालक मोहन भागवत के हाथों संपन्न हुआ. बीजेपी नेताओं का कहना है कि मोदी तभी से यहां आने की इच्छा जता रहे थे. लेकिन 29 अगस्त, 2017 को मोदी के उदयपुर दौरे को जो सबसे खास बनाता है वो है दौरे की टाइमिंग और लक फैक्टर.

बीजेपी के लिए 'लकी कबूतर' है उदयपुर!

राजस्थान बीजेपी ने प्रधानमंत्री के दौरे के साथ विधानसभा चुनाव-2018 की तैयारी का आगाज भी कर दिया है.

राजस्थान में 200 विधानसभा सीटें हैं जिनमें से 2013 में मोदी लहर के चलते 163 सीट बीजेपी के खाते में आई थी. बीजेपी ने अपने कार्यकर्ताओं को इस बार टारगेट-180 का नारा दिया है. इस एवरेस्ट सरीखे लक्ष्य के मैनेजमेंट के लिए ही अमित शाह पिछले महीने 3 दिन के जयपुर दौरे पर रहे थे और अब प्रधानमंत्री उदयपुर पहुंचे.

मोदी के उदयपुर दौरे के पीछे सबसे बड़ी वजह है, मेवाड़ से जुड़ा मिथक. राजस्थान के राजनीतिक गलियारों में ये मान्यता है कि जिस पार्टी ने मेवाड़ यानी उदयपुर संभाग को फतह किया, उसी ने जयपुर यानी सत्ता पर राज किया.

बीजेपी और खुद मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे तो इससे भी आगे उदयपुर को और ज्यादा लकी मानती हैं. राजे के नजदीकी लोगों के अनुसार वे मानती हैं कि अगर चुनाव अभियान का आगाज मेवाड़ से किया जाए तो सत्ता उनकी मुठ्ठी में होगी.

2003 में वसुंधरा राजे ने चारभुजा नाथ से परिवर्तन यात्रा निकाल कर चुनाव अभियान शुरू किया तो राजस्थान में पहली बार पूर्ण बहुमत से बीजेपी की सरकार बनी. 2013 में भी राजे ने चारभुजा नाथ से ही सुराज संकल्प यात्रा निकाल कर चुनाव अभियान शुरू किया तो बीजेपी को 80% से ज्यादा सीटों पर जीत का प्रचंड बहुमत मिला. इसके उलट, 2008 में बीजेपी का प्रचार अभियान उदयपुर संभाग से शुरू नहीं किया गया तो सत्ता ही चली गई.

2003 में बीजेपी को उदयपुर संभाग में 30 में से 21 और 2013 में 28 में से 25 सीटें मिलीं. जबकि 2008 में पार्टी की हार में उदयपुर ने बड़ा रोल अदा किया जब बीजेपी को यहां से सिर्फ 6 सीटें मिली थी. यही कारण है कि अब मोदी की यात्रा और चुनाव अभियान के आगाज के लिए खास उदयपुर को चुना गया.

Narendra Modi Vasudra Raje.1

और फिर एक और खास बात ये है कि दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम राजस्थान के इस इलाके की सीमाएं इसी साल चुनाव होने वाले गुजरात के 5 जिलों से भी जुड़ती हैं. राजस्थान और गुजरात में दोनों तरफ इस इलाके में आदिवासी बहुतायत में रहते हैं.

राहुल हों या मोदी, लक्ष्य आदिवासी

2019 में केंद्रीय सत्ता में वापसी के लिए बीजेपी फिलहाल एकसाथ कई मोर्चों पर काम कर रही है. बीजेपी को आशंका है कि विपक्ष मोदी के खिलाफ उसी तरह एकजुट होकर लड़ने की कोशिश कर सकता है जैसे 1977 में इंदिरा गांधी के खिलाफ जनता पार्टी. ऐसे में पार्टी किसी भी मतदाता समूह को हल्के में लेने के मूड में नहीं है.

उदयपुर (मेवाड़) संभाग आदिवासी बहुल है. 2003 से पहले तक आदिवासी वोटर कांग्रेस का कट्टर समर्थक माना जाता था. लेकिन संघ की मेहनत का फायदा अब बीजेपी को मिल रहा है. आजादी के बाद से ही संघ आदिवासी क्षेत्रों में जमीनी स्तर पर काम कर रहा है. इसका नतीजा ये रहा कि आदिवासी वोटर कांग्रेस से छिटक कर केसरिया खेमे में आ गया.

बीजेपी की कोशिश है कि 2018 के विधानसभा चुनाव ही नहीं बल्कि 2019 के लोकसभा चुनाव में भी ये परंपरा बनी रहे.

लेकिन कांग्रेस ने भी कमर कस ली है. पार्टी अपने छिटके हुए वोट बैंक की घर वापसी की पूरी कोशिशों में जुटी है. कांग्रेस ने कुछ दिन पहले ही बांसवाड़ा में राहुल गांधी की एक सफल रैली आयोजित कर बीजेपी को बेचैन कर दिया था.

कांग्रेस ने अब मोदी के दौरे पर भी सवालिया निशान लगाए हैं. पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बीजेपी पर आंकड़ेबाजी का आरोप लगाते हुए कहा है कि जिन परियोजनाओं का शिलान्यास या उद्घाटन किया गया उनमें से अधिकतर कांग्रेस राज के दौरान पुराने नाम से मंजूर की गई थी.

गहलोत ने प्रधानमंत्री पर राजस्थान की उपेक्षा के भी आरोप लगाए. गहलोत ने ट्वीट कर पूछा कि मोदी उस समय राजस्थान क्यों नहीं आए जब यहां लोग बाढ़ से बेहाल थे. मोदी ने बाढ़ प्रभावित गुजरात का दौरा किया. बिहार के लिए भी 500 करोड़ का एलान किया. मुंबई में जलभराव पर मुख्यमंत्री से हालात का जायजा लिया. लेकिन राजस्थान की बाढ़ का अब तक कहीं जिक्र नहीं जैसे यह कोई संकट ही नहीं.

वहीं, राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट ने मुख्यमंत्री पर केंद्र सरकार के सामने राजस्थान की समस्याओं को सही तरीके से नहीं रख पाने का आरोप लगाया है. पायलट का कहना है कि अगर ऐसा होता तो राज्य को किसानों से जुड़ी समस्याओं के हल के लिए भी अच्छी सहायता मिल सकती थी.

हालांकि अब प्रधानमंत्री ने जाते-जाते जोर देकर कहा कि विकास के रास्ते पर किसी भी परेशानी को दूर करने के लिए राजस्थान की हर संभव मदद की जाएगी.

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