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मोदी सार्वजनिक स्वास्थ्य कवरेज को प्राथमिकता देने वाले पहले भारतीय पीएम: लांसेट

ब्रिटेन की एक मशहूर मेडिकल जर्नल ने कहा है कि गैर संक्रामक रोगों से घिरे भारत में नरेंद्र मोदी ‘आयुष्मान भारत’ कार्यक्रम के तहत अपने राजनीतिक मंच के अंतर्गत सार्वजनिक स्वास्थ्य कवरेज को प्राथमिकता देने वाले पहले पीएम हैं

Updated On: Sep 13, 2018 07:50 PM IST

Bhasha

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मोदी सार्वजनिक स्वास्थ्य कवरेज को प्राथमिकता देने वाले पहले भारतीय पीएम: लांसेट
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ब्रिटेन की एक मशहूर मेडिकल जर्नल ने कहा है कि गैर संक्रामक रोगों से घिरे भारत में नरेंद्र मोदी ‘आयुष्मान भारत’ कार्यक्रम के तहत अपने राजनीतिक मंच के अंतर्गत सार्वजनिक स्वास्थ्य कवरेज को प्राथमिकता देने वाले पहले प्रधानमंत्री हैं.

‘द लांसेट’ जर्नल के चीफ एडिटर रिचर्ड होर्टन ने कहा है कि प्रधानमंत्री ने स्वास्थ्य के महत्व को न केवल नागरिकों के प्राकृतिक अधिकार के तौर पर बल्कि भारत के उभरते मध्यवर्ग की बढ़ती आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए राजनीतिक औजार के तौर पर लिया है.

हालांकि हाटर्न का राहुल गांधी के प्रति रुख आलोचनात्मक रहा है और कहा कि कांग्रेस प्रमुख ‘मोदीकेयर के मुकाबले में पीछे’ है.

उन्होंने जर्नल के लेख में लिखा है, ‘कांग्रेस को फिर से सशक्त करने और यह साबित करने में कि भारत के महान राजनीतिक वंश के पास देने के लिए कुछ है, राहुल गांधी निम्न जातियों, जनजातियों और ग्रामीण गरीबों की मदद करने का वादा करने के बावजूद मोदीकेयर के मुकाबले में पीछे हैं.’लांसेट के चीफ एडिटर ने इस बात पर बल दिया है कि भारत में अगले आम चुनाव में स्वास्थ्य एक निर्णायक मुद्दा होगा.

स्वास्थ्य अगले साल होने वाले चुनाव में निर्णायक मुद्दा बनेगा

बुधवार को द लांसेट ग्रुप ऑफ जर्नल्स में गैर संक्रामक बीमारियों पर भारत के विशेष संदर्भ में पांच रोगों के बोझ संबंधी अध्ययन के संदर्भ में होर्टन ने कहा कि भारत के भविष्य के प्रति विभिन्न दृष्टिकोणों को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच चल रही प्रतिस्पर्धा के बीच स्वास्थ्य अगले साल के आम चुनाव में एक उपयुक्त निर्णायक मुद्दा बनेगा.’

पिछले महीने लंदन स्कूल ऑफ इकॉनोमिक्स में राहुल गांधी द्वारा यह कहे जाने पर कि भारत में पूर्ण संकट है, का हवाला देते हुए लांसेट के चीफ एडिटर ने कहा कि कांग्रेस प्रमुख नौकरियों के संकट का जिक्र कर रहे थे लेकिन लांसेट की विशेषज्ञता संबंधी तीन पत्रिकाओं में प्रकाशित पांच शोधपत्रों में खुलासा किया गया है कि भारत में स्वास्थ्य संकट भी है.

आलेख में कहा गया है, ‘सालों की अनदेखी के बाद भारत सरकार ने स्वास्थ्य के बारे में व्यापक जन असंतोष को पहचाना. इस साल शुरू की गई आयुष्मान भारत नामक पहल के तहत प्रधानमंत्री ने दो नए अहम कार्यक्रम शुरू किए.’

आलेख में कहा गया है, ‘आयुष्मान भारत के दो स्तंभ हैं: सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के लिए प्राथमिक देखभाल सुविधाओं का मेरुदंड प्रदान करने के लिए 1,50,000 स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों का निर्माण तथा सलाना पांच लाख रुपए प्रति परिवार का कवरेज प्रदान करने के लिए स्वास्थ्य बीमा जिससे दस करोड़ से अधिक गरीब परिवार लाभान्वित होंगे.’ आलेख के अनुसार इससे उत्तम स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार आएगा और इलाज पर लोगों की जेब कम ढीली होगी.

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