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पीएम: लिखने की आजादी का मतलब गलत लिखना नहीं

चेन्नई के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के साथ रजनीकांत भी थे

Updated On: Nov 06, 2017 01:16 PM IST

FP Staff

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पीएम: लिखने की आजादी का मतलब गलत लिखना नहीं

तमिल अखबार दीना थांति की 75वीं सालगिरह पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मीडिया के ऊपर कई बाते कहीं. प्रधानमंत्री ने तथ्यात्मक रूप से गलत खबरों, गवर्नेस में मीडिया की भूमिका और क्षेत्रीय मीडिया की भूमिका पर बात की.

10 बजे चेन्नई पहुंचे नरेंद्र मोदी ने पहले चेन्नई में बाढ़ के हालात पर मुख्यंत्री पलनिस्वामी से बात की. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि चेन्नई को बाढ़ से निपटने के लिए केंद्र से जरूरी सहायता मिलेगी.

इसके बाद उन्होंने मद्रास यूनिवर्सिटी हॉल में अभिनेता रजनीकांत के साथ कार्यक्रम में हिस्सा लिया. मोदी ने कहा कि आज के अखबार सिर्फ खबर नहीं देते. मीडिया दुनिया को देखने के हमारे नजरिये को बदलता है. इसीलिए उसे लोकतंत्र का चौथा खंभा कहते हैं.

क्षेत्रीय मीडिया की ज़रूरत पर बात करते हुए पीएम ने कहा कि ब्रिटिश मीडिया भारतीय वर्नाकुलर प्रेस से डरता था. इसीलिए 1878 में वो वर्नाकुलर प्रेस ऐक्ट लेकर आए. आज भी स्थानीय भाषाओं में छपने वाले अखबारों की अपनी अहमियत है.

विपक्ष बीजेपी सरकार पर मीडिया की आजादी रोकने के आरोप लगाता रहा है. पीएम ने इसके ऊपर कहा कि एडिटोरियल फ्रीडम का इस्तेमाल लोगों के हित में होना चाहिए. इसमें तथ्यात्मक गलतियां करने की स्वतंत्रता नहीं हो सकती. महात्मा गांधी ने प्रेस को चौथा एस्टेट कहा था. मीडिया ताकतवर है मगर उसका गलत इस्तेमाल आपराधिक है.

मीडिया संस्थानों के मालिक भले ही निजी लोग हैं, मगर इसका हित जनता की सेवा है. मीडिया पर सरकार और न्यायपालिका से ज्यादा सामाजिक जिम्मेदारी है. मोदी ने अखबारों को क्लाइमेट चेंज की खबरों को जगह देने और उपलब्धियों पर बात करने की सलाह भी दी.

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