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अहमदाबाद में मोदी-नेतन्याहू: निजी संबंधों को आधार बनाकर देशहित साधने की कोशिश

मोदी के आलोचक उनकी डिप्लोमेसी की हर तरह से आलोचना करने में लगे रहते हैं लेकिन उनकी इसी डिप्लोमेसी ने इन देशों को भारत के और करीब लाने में मदद भी की है

Amitesh Amitesh Updated On: Jan 17, 2018 09:18 PM IST

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अहमदाबाद में मोदी-नेतन्याहू: निजी संबंधों को आधार बनाकर देशहित साधने की कोशिश

अहमदाबाद की सड़कों पर एक बार फिर से पुरानी तस्वीरें ताजा हो गईं. पिछले साल 13 सितंबर को जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रोड शो करते नजर आए थे. साथ में शिंजो आबे की पत्नी भी मौजूद थीं.

अब इस बार नए साल में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ मोदी अहमदाबाद एयरपोर्ट से लेकर साबरमती आश्रम तक साथ नजर आए. हालांकि इस बार रोड शो खुली जीप में नहीं होकर बंद गाड़ी में ही रहा. सुरक्षा कारणों से हो सकता है इजरायल की सुरक्षा एजेंसियां इस बात की अनुमति न दी हों, लेकिन, हर जगह, हर जुबां पर बस चर्चा दोनों नेताओं के रोड शो की ही थी.

मोदी-नेतन्याहू के साथ में नेतन्याहू की पत्नी सारा भी मौजूद रही. तीनों एक ही गाड़ी में अहमदाबाद एयरपोर्ट से साबरमती आश्रम तक आठ किलोमीटर की दूरी तय कर पहुंचे थे. एक बार फिर मोदी अपने दोस्त नेतन्याहू की अगवानी के लिए अहमदाबाद एयरपोर्ट पहुंचे थे. गले लगाकर इस्तकबाल किया और फिर निकल पड़े साबरमती आश्रम के लिए.

Ahmedabad: Israeli Prime Minister Benjamin Netanyahu and wife Sara Netanyahu try their hands on a traditional 'charkha' or spinning wheel as Prime Minister Narendra Modi looks on during their visit to Sabarmati Ashram in Ahmedabad on Wednesday. PTI Photo(PTI1_17_2018_000034B)

दो शासनाध्यक्षों नहीं बल्कि दो दोस्तों की मुलाकात

एयरपोर्ट से लेकर साबरमती आश्रम तक रास्ते में कई जगह सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया था. छोटे-छोटे बच्चे अलग-अलग तरीके से अपने विदेशी खास मेहमान के लिए अपनी पूरी तैयारी में सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर रहे थे.

इस दौरान दोनों नेताओं के बीच एक अलग तरह की कैमेस्ट्री देखने को मिल रही थी.  साबरमती आश्रम में गांधी जी का पारंपरिक चरखा चलाने बैठे इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और साथ में बैठी उनकी पत्नी और वहां खड़े मोदी लगातार चरखा चलाने के तरीके और उस पर हो रही कताई के गुर सिखाते नजर आए.

यह भी पढ़ें: हज सब्सिडी खत्म: बेधड़क हिंदुत्व के एजेंडे पर चल रही है बीजेपी

साबरमती आश्रम में नेतन्याहू को गांधी जी से जुड़ी और कुछ यादगार बातों से रू-ब-रू कराने के दौरान मोदी के साथ उनकी निजता का एहसास हो रहा था. यह दो शासनाध्यक्षों के बीच की मुलाकात न लगकर दो दोस्तों की निजी और व्यक्तिगत मुलाकात ज्यादा लग रही थी.

मोदी की डिप्लोमेसी का हिस्सा है राष्ट्राध्यक्षों की अगवानी का तरीका

मोदी की यही काबिलियत उन्हें अपने पहले के नेताओं से अलग करती है. प्रोटोकॉल तोड़कर राष्ट्राध्यक्षों की अगवानी करना और फिर उन्हें वर्षों से बिछड़े दोस्त की तरह गले लगाना मोदी की उस डिप्लोमेसी का हिस्सा है जो राजकीय दौरे को भी बेहद निजी दौरे में तब्दील कर देती है.

दो राष्ट्रों के बीच बेहतर संबंध ही कूटनीति की कसौटी पर कसने के लिए काफी है. लेकिन, मोदी इस परंपरागत कूटनीति से परे होकर या यूं कहें कि लीक से अलग हटकर कूटनीति के नए आयाम गढ़ने में लगे हैं, जहां दो शासनाध्यक्ष एक बेहतर दोस्त की नजर आने लगते हैं.

Ahmedabad: Prime Minister Narendra Modi, Israeli Prime Minister Benjamin Netanyahu and his wife Sara Netanyahu arrive at Sabarmati Ashram in Ahmedabad on Wednesday. PTI Photo(PTI1_17_2018_000040B)

मोदी की यह कैमेस्ट्री इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ भी है, जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे के साथ भी. अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ भी थी और अब नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है.

इस डिप्लोमेसी को भले ही मोदी के आलोचक हर तरह से आलोचना करने में लगे रहते हैं लेकिन उनकी इसी डिप्लोमेसी ने इन देशों को भारत के और करीब लाने में मदद भी की है.

इजरायल के प्रधानमंत्री के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस तरह से घुलना-मिलना दोनों देशों के रिश्तों की ही एक झलक पेश करता है. कुछ इसी तरह की दोस्ती तब दिखी थी जब मोदी इजरायल के दौरे पर गए थे.

इसके पहले जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे के साथ अहमदाबाद में बुलेट ट्रेन परियोजना का शिलान्यास रखने से पहले मोदी ने इसी तरह रोड शो कर पूरे घटनाक्रम को एक बेहतर इवेंट के तौर पर पेश कर दिया था.

हालांकि उस वक्त गुजरात में विधानसभा का चुनाव होने वाला था लिहाजा मोदी-शिंजो आबे के रोड शो को गुजरात चुनाव में विकास के बयार का प्रचार कर फायदा लेने की कोशिश के तौर पर ही देखा गया था.

लेकिन, अभी गुजरात में चुनाव तो नहीं हैं. लेकिन, मोदी की नेतन्याहू के साथ कैमेस्ट्री को देखकर लगता है कि फिर से वो इस दौरे के दौरान भारत-इजरायल संबंधों में एक नई छाप छोड़ने की कोशिश कर रहे हैं.

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