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मी टू: नंदिता दास के पिता जतिन दास के खिलाफ यौन उत्पीड़न मामले में चौथी महिला आई सामने

आरोप लगाने वाली महिला ने कहा,चित्रकार ने '1999 या 2000' में उनका शोषण किया जब वह उनके सहायक के तौर पर उनके साथ काम कर रही थी

Updated On: Oct 19, 2018 11:23 AM IST

Bhasha

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मी टू: नंदिता दास के पिता जतिन दास के खिलाफ यौन उत्पीड़न मामले में चौथी महिला आई सामने
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चित्रकार जतिन दास के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों का सिलसिला बढ़ता ही जा रहा है और इस कड़ी में चौथी महिला ने दावा किया कि चित्रकार ने '1999 या 2000' में उनका शोषण किया जब वह उनके सहायक के तौर पर उनके साथ काम कर रही थी.

गरुषा कटोच नाम की महिला ने अपने ट्विटर अकाउंट पर एक लम्बी पोस्ट के जरिए शेयर किया कि दिसम्बर 2013 में जब वो इंटर्नशिप की तलाश में थी तभी उन्हें पता चला कि जतिन दास सेंटर ऑफ आर्ट्स (JDCA) में इंटर्न की जगह है. उस वक्त उनके मुताबिक वह बस 20 साल की थी. गरुषा ने इंटर्नशिप के लिए JDCA में टेस्ट दिया और पास भी हुई. इसके बाद इंटर्नशिप के लिए जतिन दास के ऑफिस पहुंचीं जहां पहले से ही कुछ इंटर्न्स काम कर रहे थे.

गरुषा ने लिखा कि कुछ दिन में जतिन दास का व्यवहार उनके लिए काफी बदल गया था. एक दिन जतिन, गरुषा के पास धूम्रपान करते हुए पास आकर बैठ गए और बोले -मैं सिगरेट ज्यादा पीता हूं ना? अगली बार मुझे रोक लेना. उन्होंने लिखा कि उस दिन मुझे बहुत अजीब महसूस हुआ.

इसके बाद वह लिखती हैं कि एक दिन काम करते हुए मुझे काफी वक्त हो गया था, साथ के सभी साथी घर चले गए थे लेकिन मैं काम ज्यादा होने की वजह से रुकी रही. उस वक्त घड़ी में 7 या 8 बज रहे होंगे. मैं जैसे ही काम ख़त्म कर के जाने लगी तो उन्होंने (जतिन दास) दरवाजा बंद कर दिया और मुझे अपने साथ रुकने के लिए कहा.

जतिन ने मुझे बंद कमरे में जबरदस्ती किस करने की कोशिश की

गरुषा ने लिखा कि जतिन बोले मैं तुम्हारे घरवालों से बात कर लूंगा, तुम यहीं रुक जाओ, मेरे पास एक कमरा खाली है. मैं बहुत डरी हुई थी फिर उन्होंने अपनी कार से मुझे घर छोड़ने के लिए कहा, उन दिनों ओला-उबर जैसी कोई सुविधा नहीं थी और तकरीबन रात के 9 बज रहे थे तो किसी भी ऑटो के मिलने की उम्मीद नहीं थी. वहीं साल भर पहले निर्भया  जैसा काण्ड देश भर में डर व्याप्त करा चुका था, उनके साथ जाने के अलावा मेरे पास कोई रास्ता था.

रास्ते में उन्होंने एशियाड विलेज में उनके खाली कमरे को देखने को कहा, उन्होंने मुझे वहां अपने स्टाफ से मुझे रूबरू कराया और उनसे कहा कि मैं वहीं रुकने वाली हूं. मैं जैसे ही कमरे में गईं उन्होंने (जतिन दास) ने मुझे जकड़ लिया और किस करने की कोशिश की. उस वक्त मेरी आंखों में आंसू थे और मुझे यकीन है उन्होंने भी उसे देखा ही होगा. इस घटना के बाद गरुषा का लिखना है कि वह बहुत मुश्किल से उस पल से निकलीं, उन्होंने इस बारे में अपने सीनियर और घरवालों से बात की और बहुत ही जल्द वह शहर भी छोड़ दिया साथ ही अपना फोन नम्बर भी बदल लिया.

दास ने आरोपों से किया इंकार

दास ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उनका इनसे कुछ लेना देना नहीं है. भारत में चल रहे मी टू अभियान के तहत कागज बनाने वाली एक कंपनी की सह संस्थापक निशा बोरा ने सबसे पहले 16 अक्टूबर को उनके खिलाफ आरोप लगाए थे. बोरा ने दावा किया कि दास ने 14 साल पहले अपने स्टूडियो में उनसे छेड़छाड़ की.

मी टू कार्यकर्ता संध्या मेनन द्वारा गुरुवार को साझा की गई एक पोस्ट में मालविका कुंडू ने आरोप लगाया कि जब वह 18 वर्ष की थीं तो दास ने उनसे दुर्व्यवहार किया था. पीटीआई-भाषा ने जब 76 वर्षीय दास से संपर्क किया तो उन्होंने कहा, 'यह बेहद अभद्र है. मैं नहीं जानता कि वो लोग वहां क्या करने की कोशिश कर रहे हैं. मेरा इससे कुछ लेना देना नहीं है. मैं नहीं जानता कि और क्या कह सकता हूं.'

कुंडू ने आरोप लगाया कि दास 'अनावश्यक रूप से' उसे छूते थे और लगातर  'बेबी' कह कर पुकारते थे. वह भी तब जब वह उन्हें ऐसा करने के लिए मना कर रही थी. जब वह उनके लिए काम करती थीं तो वह उनके 'बेहद करीब' खड़े हो जाते थे.

उन्होंने लिखा कि यह सबकुछ नौकरी के पहले ही दिन दास के घर पर हुआ. उन्होंने मुझे इतना असहज कर दिया कि मैं इस नौकरी में बिताए गए तीन दिनों में ही उनसे नफरत करने लगी. मना करने के बाद भी उनका मुझे बेबी कहना नहीं रुका. लगातार बेबी कहने के अलावा वह अक्सर मुझे अनावश्यक रूप से छूते थे.

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