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इसरो में लौटेंगे नम्बी नारायणन, जासूसी के मामले में गलत तरीके से हुई थी गिरफ्तारी

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में 'मनगढ़ंत' मामला बनाने और नारायणन की गिरफ्तारी तथा उन्हें 'भयानक प्रताड़ना' और 'अत्यंत दुख' पहुंचाए जाने को लेकर केरल पुलिस की भूमिका की जांच के लिए उच्चस्तरीय जांच का भी आदेश दिया था

Updated On: Sep 17, 2018 08:51 AM IST

FP Staff

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इसरो में लौटेंगे नम्बी नारायणन, जासूसी के मामले में गलत तरीके से हुई थी गिरफ्तारी

इसरो के पूर्व वैज्ञानिक नम्बी नारायणन को अदालत ने रिहा कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने 1994 के जासूसी मामले में मानसिक यातना को लेकर नारायणन को 50 लाख रुपए का मुआवजा देने का भी निर्देश दिया है.

इस बारे में इसरो के चेयरमैन के सिवन ने कहा कि 'इस मामले में कहीं इसरो शामिल नहीं है.' यह केस केरल सरकार के खिलाफ था. जब यह फैसला आ गया है कि नम्बी नारायण को गलत तरीके से गिरफ्तार किया गया है तो अब वह इसरो में लौटेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा है कि नम्बी नारायण को गलत तरीके से गिरफ्तार किया गया था.

क्या कहना है नारायणन का?

रिहा होने के बाद नारायणन का कहना है कि उन्हें जासूसी के मामले में फंसाने वालों का मकसद अलग था लेकिन पीड़ित एक ही था. नारायणन के अनुसार इसरो जासूसी मामला 20 अक्टूबर 1994 को मालदीव की नागरिक मरियम रशीदा की गिरफ्तारी के समय से ही झूठा था.

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में 'मनगढ़ंत' मामला बनाने और नारायणन की गिरफ्तारी तथा उन्हें 'भयानक प्रताड़ना' और 'अत्यंत दुख' पहुंचाए जाने को लेकर केरल पुलिस की भूमिका की जांच के लिए उच्चस्तरीय जांच का भी आदेश दिया था. जब नारायणन की गिरफ्तारी हुई थी उस वक्त वह क्रायोजनिक परियोजना के निदेशक थे.

(भाषा से इनपुट)

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