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पार्क में नमाज पर विवाद: राजनीतिक बवाल के बीच पुलिस बोली- हम तो सुप्रीम कोर्ट का पालन कर रहे हैं

नोएडा पुलिस द्वारा नमाज पढ़ने पर पाबंदी को लेकर राजनीतिक दलों में आरोपों और प्रत्यारोपों का दौर शुरू हो गया है. कांग्रेस, बीएसपी और एसपी सहित कई राजनीतिक पार्टियों ने जहां यूपी पुलिस की कार्रवाई का विरोध किया है तो वहीं बीजेपी इसे कानूनसंगत कदम करार दे रही है.

Updated On: Dec 26, 2018 09:22 PM IST

Ravishankar Singh Ravishankar Singh

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पार्क में नमाज पर विवाद: राजनीतिक बवाल के बीच पुलिस बोली- हम तो सुप्रीम कोर्ट का पालन कर रहे हैं

दिल्ली से सटे नोएडा के एक पार्क में नमाज पढ़ने पर रोक लगाने के मामले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है. नोएडा पुलिस द्वारा नमाज पढ़ने पर पाबंदी को लेकर राजनीतिक दलों में आरोपों और प्रत्यारोपों का दौर शुरू हो गया है.

कांग्रेस, बीएसपी और एसपी सहित कई राजनीतिक पार्टियों ने जहां यूपी पुलिस की कार्रवाई का विरोध किया है तो वहीं सत्तारूढ़ बीजेपी इसे कानूनसंगत कदम करार दे रही है. बता दें कि नोएडा पुलिस ने बीते दिनों ही सेक्टर 58 के पार्क में नमाज पढ़ने पर पाबंदी लगा दी थी.

नोएडा पुलिस ने सेक्टर 58 में स्थित कई कंपनियों को नोटिस जारी कर कहा था कि अगर पार्क में या खुली जगह पर कंपनियों के कर्मचारी नमाज पढ़ते हैं तो इसकी जिम्मेदार कंपनियों की होंगी.

इस बीच सोशल मीडिया पर इस घटना का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बारे में कहा जा रहा है कि पार्क में नमाज पढ़ने का विरोध करने वालों ने यह वीडियो बनाया है. वीडियो में नमाज पढ़ने वालों से परमिशन को लेकर सवाल-जवाब किए जा रहे हैं.

पार्क में बैठे लोगों ने भी जवाब देते हुए कहा कि हमलोग यहां पर 6 साल से नमाज पढ़ रहे हैं. हमलोगों ने नोएडा आथॉरिटी को इस बारे में लिख कर पहले ही दे रखा है. इस वीडियो में पार्क में मस्जिद बनाने को लेकर भी सवाल-जवाब किए गए.

दूसरी तरफ इस घटना के सामने आने के बाद नोएडा पुलिस का कहना है कि खुले में या पार्क में नमाज पढ़ने के लिए सिटी मजिस्ट्र्ट से अनुमति लेनी पड़ती है जो कि नहीं ली गई. जबकि वीडियो में एक शख्स कह रहा है कि इसके लिए हमलोगों ने 6 साल पहले ही आथॉरिटी को लिख कर दे रखा है.

नोएडा पुलिस द्वारा कंपनियों को दिए नोटिस की कॉपी

नोएडा पुलिस द्वारा कंपनियों को दिए नोटिस की कॉपी

नोएडा पुलिस द्वारा कंपनियों को दिए गए नोटिस पर कंपनी मालिकों को एतराज है. इन कंपनियों का कहना है कि अगर खुली जगह पर हमारे कर्मचारी नमाज पढ़ते हैं तो इसकी जिम्मेदारी कंपनियों की कैसी हो सकती है? नोएडा पुलिस के नोटिस के बाद फैक्ट्री मालिकों में काफी रोष है. कई कंपनी मालिकों ने नोएडा पुलिस के नोटिस का विरोध करना शुरू कर दिया है.

फैक्ट्री मालिकों के विरोध के बाद गौतमबुद्ध नगर जिले के डीएम बी.एन. सिंह ने कहा है कि कंपनियां और कारोबारी हाउसेज की अपने कर्मचारियों के धार्मिक रीति रिवाज और उनके प्रार्थना करने के तौर तरीकों की जिम्मेदार नहीं मानी जा सकती. बीएन सिंह का कहना है कि वो कंपनियों से इस बारे में बात करेंगे और इस बारे में जो गलतफहमी पैदा हुई है, उसे दूर कर लिया जाएगा.

गौतमबुद्ध नगर जिले के डीएम बीएन सिंह के मुताबिक, ‘सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि किसी भी पब्लिक प्लेस पर कोई धार्मिक कार्यक्रम से पहले सिटी मजिस्ट्रेट से अनुमति लेना अनिवार्य है. नोएडा पुलिस ने जो कार्रवाई की है वह नियमसंगत है. अगर वहां पर कोई भी गतिविधि करनी है तो इसके लिए अनुमति लेना अनिवार्य है और सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय सभी धर्मों पर लागू होता है.’

नोएडा पुलिस का कहना है कि इस इलाके में पिछले कुछ हफ्तों से शुक्रवार को पार्क में नमाज पढ़ने वालों की संख्या में काफी तेजी आ गई थी. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से कहा गया था कि यहां पहले केवल 10-15 लोग ही नमाज पढ़ते थे, लेकिन दो हफ्ते पहले इस पार्क में करीब 700-800 लोगों ने नमाज पढ़ी. इलाके में रहने वाले कई लोग चीज को लेकर आपत्ति भी जता चुके हैं, जिसके बाद ये निर्देश जारी किए गए हैं.

गौतमबुद्ध जिले के एसएसपी डॉ. अजयपाल शर्मा भी मीडिया से बात करते हुए जिलाधिकारी बीएन सिंह की ही बात को दोहराते दिखे. अजयपाल शर्मा मीडिया से बात करते हुए कहा, ‘जो लोग बिना परमिशन के एक जगह पर इकट्ठा हो जाते हैं, उनकी वजहों से ये जरूरी कदम उठाए गए हैं. एसएसपी ने साफ कहा कि नोएडा पुलिस का नोटिस किसी धर्म विशेष के लिए नहीं है, ये सभी धर्मों को मानने वाले पर लागू होता है.

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पार्क में नमाज पढ़ने का विरोध करने वाले शिकायतकर्ताओं में से एक शिकायतकर्ता संजय गुप्ता फर्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए कहते हैं, देखिए हमलोग एक सामान्य आदमी हैं कोई राजनीतिक व्यक्ति नहीं हैं. भारत में सभी धर्मों के लोगों को अपने-अपने धर्मों के साथ जीने का अधिकार है. सेक्टर 58 के आस-पास जो लोग रहते हैं या फिर यहां काम करने जो लोग आते हैं वे लोग यहां नमाज पढ़ें हमलोगों को कोई आपत्ति नहीं है. लेकिन, लाउडस्पीकर बजाना और नोएडा के अन्य जगहों से वहां भीड़ जुटाने का क्या मतलब है? पहले 10-20 लोग ही इस पार्क में नमाज पढ़ते थे, लेकिन पिछले कुछ महीनों से इस पार्क में हजारों लोग जुटने लगे. शुक्रवार को यहां गाड़ियां और बाइक की वजह से आम आदमी को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है. हमलोगों ने अपनी सुरक्षा और भविष्य को ध्यान में रख कर ही पुलिस को लिखित शिकायत दर्ज कराई है. इतनी भीड़ अगर एक जगह जुटने लगे तो थोड़ा अजीब तो लगता ही है.’

नोएडा के सेक्टर 58 पार्क से सटे बिशुनपुरा गांव के रहने वाले एक और शिकायतकर्ता पुरुषोत्तम नागर फ़र्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए कहते हैं, ‘देखिए पार्क उठने-बैठने और टहलने के लिए होता है. लेकिन पार्क में आप दरियां बिछाएं और फिर नमाज पढ़ें और फिर उन दरियों को दोबारा से समेटें. इन सब चीजों से पार्क में उठने-बैठने वाले लोगों को दिक्कतें आती हैं. हमलोगों ने मुस्लिम भाइयों से कहा कि आप लोग मस्जिद में जाकर नमाज पढ़ें. अक्सर न्यूज आती रहती है कि पार्क में माता की चौकी या और गतिविधि होती है तो पुलिस हटवा देती है.'

स्थानीय लोगों की शिकायत की कॉपी

स्थानीय लोगों की शिकायत की कॉपी

नागर आगे कहते हैं, 'बगल के सेक्टर 54 के पार्क में भी पहले इसी तरह से नमाज अता की जाती थी लेकिन बाद में वहां पर मस्जिद बना दी गई. देखिए मैं तो यह कहूंगा कि यह तो शासन-प्रशासन का पूरा फेलियर है. इतने दिनों से सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवेहलना हो रही थी और प्रशासन कुछ नहीं कर पा रहा था. नोएडा प्रशासन को बहुत पहले ही इसे बंद कराना चाहिए था. मेरी तो मांग है कि अगर आरएसएस की शाखाएं भी पार्क में चलती हैं और वहां भी लाउडस्पीकर बजते हैं तो उसको भी बंद करा देना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट का नियम सब पर लागू होता है. थोड़ी चिंगारी भड़क जाए तो आपसी भाईचारा बिगड़ सकता है. मैं नहीं चाहता हूं कि आपसी भाईचारे में किसी तरह का कोई खलल पड़े.’

नोएडा के सेक्टर 58 स्थित पार्क में नमाज अता और नहीं अता करने को लेकर अगले कुछ दिनों तक देश में बहस होती रहेगी. राजनीतिक बयानबाजियां भी आनी शुरू हो गई है. विश्व हिंदू परिषद ने जहां इस कदम का स्वागत किया है तो वहीं लोकसभा सांसद और मजलिस-ए-इत्तेहादुल-मुसलमीन के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने इस मामले को लेकर योगी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा है कि यह वही सरकार है जो कांवड़ियों के रास्ते में हेलीकॉप्टर से फूल बरसाती है और मुस्लिमों को नमाज अता करने से इनको डर लगता है. वहीं दूसरी तरफ नोएडा पुलिस लगातार तर्क दे रही है कि यूपी पुलिस ने तो सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन किया है. यह नियम किसी एक धर्म विशेष के लिए नहीं बल्कि यह नियम सभी धर्मों पर समान रूप से लागू होता है.

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