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नगरोटा अटैक: हमले का एक और सबक

नगरोटा हमला पाकिस्तानी सेना की भागीदारी के बिना संभव नहीं है...

Updated On: Nov 29, 2016 06:49 PM IST

सुरेश बाफना
वरिष्ठ पत्रकार

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नगरोटा अटैक: हमले का एक और सबक

जम्मू-कश्मीर के नगरोटा में सेना के कैंप पर हुए आतंकी हमले में एक पैटर्न स्पष्ट दिखाई देता है. एक दिन पहले ही भारत में पाकिस्तान के हाई कमिश्नर अब्दुल बासित ने बातचीत की प्रक्रिया फिर से शुरु करने का प्रस्ताव किया. तीन दिन बाद अमृतसर में अफगानिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय बैठक होनेवाली है, जिसमें विदेशी मामलों पर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के सलाहकार सरताज अजीज भाग लेनेवाले हैं.

पाकिस्तान की तरफ से यह एक पैटर्न बन गया है कि शांति वार्ता के प्रस्ताव या किसी अमेरिकी सरकार के वरिष्ठ प्रतिनिधि की भारत यात्रा के ठीक पहले जम्मू और कश्मीर में किसी न किसी आतंकवादी घटना को अंजाम दिया जाता है.

पठानकोट और उरी के बाद अब नगरोटा में जिस तरह से सेना के कैम्प पर हमला किया गया है, वह पाकिस्तानी सेना की सक्रिय भागीदारी के बिना संभव नहीं है. प्रशिक्षण, आधुनिकतम हथियार, संचार उपकरण और घुसपैठ कराने से लेकर सभी स्तरों पर पाकिस्तानी सेना ने इस हमले को अंजाम देने में भूमिका निभाई है.

यह बात भी भी इस आतंकी हमले से गहरे जुड़ी हुई है कि मंगलवार को रावलपिंडी में पाकिस्तान के नए सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा कार्यभार ग्रहण कर रहे हैं.

इस आतंकी हमले के माध्यम से पाकिस्तान ने संदेश दिया है कि नए सेना प्रमुख के आने की वजह से भारत के प्रति पाकिस्तान की नीति में कोई बदलाव नहीं होनेवाला है.

दिसंबर में बर्फबारी होने के ठीक पहले पाकिस्तानी सेना की तरफ से बड़े पैमाने पर आतंकवादियों की घुसपैठ कराने की कोशिश की गई है. भारतीय सेना ने पिछले चार महीनों के दौरान घुसपैठ की कई कोशिशों को विफल किया है और बड़ी संख्या में आतंकवादियों को मार गिराया है. भारतीय सेना के अनुसार जम्मू-कश्मीर में लगभग 300 आतंकवादी सक्रिय हैं.

पाकिस्तानी सेना की रणनीति यह है कि कश्मीर घाटी से लगी नियंत्रण रेखा की बजाय जम्मू क्षेत्र में आतंकी हमलों को अंजाम दिया जाए. कश्मीर घाटी में हालात जब सामान्य होते नजर आते हैं तो पाकिस्तानी सेना भारतीय सेना के शिविरों पर आत्मघाती हमलों के माध्यम से हालात खराब करने की कोशिश करती है.

यह मानना होगा कि नगरोटा में पाकिस्तानी सेना द्वारा भेजे गए आत्मघाती आतंकवादी भारतीय सेना को अपेक्षित नुकसान पहुंचाने में विफल रहे. उरी और पठानकोट में सैन्य शिविरों पर हुए हमलों के बाद जम्मू और कश्मीर में सेना ने अपने शिविरों की सुरक्षा मजबूत की है. नगरोटा सैन्य शिविर में घुसते ही आतंकवादियों को चुनौती दी गई. दुख की बाद है कि इस आतंकी हमले में हमारे एक मेजर और दो जवान शहीद हो गए.

नगरोटा का संदेश स्पष्ट है कि पाकिस्तान के नेताओं और अधिकारियों की बातों पर विश्वास नहीं किया जा सकता है. पाकिस्तान के साथ बातचीत की प्रक्रिया तभी शुरु की जा सकती है, जब वह जमीन पर लश्कर-ए-तैयबा व जैश-ए-मोहम्मद जैसे भारत-विरोधी आतंकी संगठनों पर कार्रवाई करें.

मुंबई, पठानकोट, उरी और अब नगरोटा पर हुए आतंकी हमले में पाकिस्तानी सेना का सीधा हाथ है, इसलिए उनके द्वारा जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई असंभव है. पिछले 26 साल से पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ अघोषित युद्ध छेड़ रखा है. इस अघोषित युद्ध का जवाब कूटनीतिक स्तर पर नहीं दिया जा सकता है. पाकिस्तान को इस बात का अहसास कराना होगा कि इस युद्ध की उसे बड़ी कीमत चुकानी होगी.

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