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दुर्घटनाग्रस्त नागपुर-मुंबई दूरंतो में सवार रिपोर्टर की आपबीती

अपने 18 डिब्बों पर हरे और पीले रंग के प्रिंट वाली यह ट्रेन सोमवार को रात आठ बजकर 40 मिनट पर नागपुर से चली थी

Bhasha Updated On: Aug 29, 2017 03:16 PM IST

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दुर्घटनाग्रस्त नागपुर-मुंबई दूरंतो में सवार रिपोर्टर की आपबीती

सुबह जब नागपुर-मुंबई दूरंतो एक्सप्रेस पटरी से उतरी, तब उसमें पीटीआई के रिपोर्टर जस्टिन राव भी सवार थे. वह ट्रेन के पटरी से उतरने पर यात्रियों को मिले भयावह अनुभव को साझा कर रहे हैं:

ट्रेन के एसी कोच में मेरी सुबह के समय की झपकी तेज कंपन, भारी झटके और एक तीखी आवाज के साथ खुली.

इसके बाद मैं डिब्बे में अपनी सीट से जमीन पर आ गिरा था. सामान इधर-उधर गिर चुका था और मेरे कुछ सहयात्री चिल्ला रहे थे.

इस घटनाक्रम से स्तब्ध हम लोग ए2 कोच की खिड़की से झांकने के लिए दौड़े. सामने की स्थिति ने हमारे मन की शंका को सही साबित कर दिया था. नागपुर-मुंबई दूरंतो एक्सप्रेस संख्या 12290 पटरी से उतर गई थी.

सुबह साढ़े छह बजे के कुछ ही समय बाद जब यह सुपरफास्ट और पूर्ण वातानुकूलित ट्रेन वासिंद और आसनगांव स्टेशनों के बीच पटरी से उतरी तो इसके अधिकतर यात्री सोए हुए थे. उस समय हम अपने गंतव्य यानी छत्रपति शिवाजी टर्मिनल (मुंबई) से महज 65 किलोमीटर और 90 मिनट की ही दूरी पर थे.

अपने 18 डिब्बों पर हरे और पीले रंग के प्रिंट वाली यह ट्रेन सोमवार को रात आठ बजकर 40 मिनट पर नागपुर से चली थी. महज दो स्टॉप- भुसावल और ईगतपुरी- वाली यह यात्रा सामान्य चल रही थी. यात्रियों ने रात का भोजन कर लिया था, वे हंस रहे थे, बातें कर रहे थे और ताश खेल रहे थे. तभी कर्मचारी वहां सफेद चादरें और कंबल देने आ गए.

बीते 19 अगस्त को पटरी से उतरने के करण 23 लोगों की जान ले लेने वाली ट्रेन का ख्याल हमारे जेहन में दूर-दूर तक नहीं था. हम अपनी रात भर की इस यात्रा में आराम से सोने चले गए. हम में से अधिकतर लोग तभी जागे, जब उन्हें तेज झटके लगे. ये झटके लगभग पांच-दस सेकेंड तक लगते रहे.

हम खुशकिस्मत थे कि ट्रेन के पटरी से उतरने पर किसी की मौत नहीं हुई और कोई गंभीर रूप से घायल नहीं हुआ. यात्री डिब्बे से बाहर आ गए और पटरी से उतरे छह डिब्बों को देखने लगे. शौचालय में बंद लोगों को बाहर आने में कुछ वक्त लगा. ईंजन से लेकर शुरूआती चार डिब्बों पर इस दुर्घटना का असर सबसे ज्यादा हुआ था.

उस समय तेज बारिश हो रही थी और बाहर हर जगह पानी था.

दुर्घटना की वजह स्पष्ट नहीं है. मध्य रेलवे के प्रवक्ता सुनील उदासी का कहना है कि भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन की वजह से ट्रेन पटरी से उतरी लेकिन सजग चालक के मुस्तैदी से आपात ब्रेक लगा देने पर एक बड़ी आपदा टाली जा सकी. हालांकि एक अन्य अधिकारी ने कहा कि बारिश के कारण पटरियों का एक हिस्सा बह गया था.

यह दुर्घटना एक जलाशय के पास हुई थी. हममें से कुछ लोगों ने यह भी देखा कि कोई डिब्बा पानी में तो नहीं गिर गया? लेकिन ऐसा नहीं हुआ था.

उन्होंने कहा कि यात्री भारी बारिश में भीग रहे थे. घटनास्थल पर अफरातफरी का माहौल था.

कुछ समय बाद अधिकरी वहां पहुंचे और उन्होंने यात्रियों से लगभग एक किलोमीटर दूर वासिंद रेलवे स्टेशन तक पैदल चले जाने के लिए कहा. कुछ घंटे बाद एक बचाव ट्रेन शेष बचे यात्रियों को मुंबई ले जाने के लिए वहां पहुंची.

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