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मुजफ्फरपुर शेल्टर होम मामला: पूर्व मंत्री मंजू वर्मा के आवास समेत चार जिलों में CBI छापे

मुजफ्फरपुर आश्रय-गृह यौन शोषण मामले में सीबीआई ने बिहार की पूर्व मंत्री मंजू वर्मा के पटना तथा बेगूसराय स्थित आवासों सहित चार जिलों में लगभग एक दर्जन संपत्तियों पर छापेमारी की

Updated On: Aug 17, 2018 08:25 PM IST

Bhasha

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मुजफ्फरपुर शेल्टर होम मामला: पूर्व मंत्री मंजू वर्मा के आवास समेत चार जिलों में CBI छापे

मुजफ्फरपुर आश्रय-गृह यौन शोषण मामले में सीबीआई ने बिहार की पूर्व मंत्री मंजू वर्मा के पटना तथा बेगूसराय स्थित आवासों सहित चार जिलों में लगभग एक दर्जन संपत्तियों पर छापेमारी की.

अधिकारियों ने कहा कि मुजफ्फरपुर में सात ठिकानों पर छापेमारी की गई जिनमें मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर का एक होटल तथा उसके कुछ मित्रों और रिश्तेदारों के आवास शामिल हैं. केंद्रीय जांच एजेंसी ने ठाकुर के एनजीओ की गतिविधियों से करीब से जुड़ी रही मधु कुमारी के घर पर भी छापेमारी की. वह फरार है. एजेंसी ने मुजफ्फरपुर जिले के पंचडाहा गांव स्थित ठाकुर के पैतृक आवास पर भी छापा मारा.

मामले में आरोपी एवं मुजफ्फरपुर में जिला बाल संरक्षण अधिकारी के रूप में पदस्थ रहे रवि रौशन के मोतिहारी स्थित आवास पर भी छापेमारी की गई. मामले में रौशन गिरफ्तार हो चुका है.

रौशन की पत्नी ने जांच के दौरान मुजफ्फरपुर में ठाकुर के एनजीओ द्वारा संचालित आश्रय गृह में 34 लड़कियों के यौन शोषण मामले में पूर्व मंत्री मंजू वर्मा के पति चंद्रेश्वर प्रसाद वर्मा का नाम लिया था. उसने आरोप लगाया था कि वर्मा का पति आश्रय गृह में अक्सर जाता था.

मंजू वर्मा ने दिया था मंत्री पद से इस्तीफा

मंजू वर्मा ने यह खुलासा होने के बाद कि उनके पति से ठाकुर ने इस साल जनवरी से लेकर जून तक 17 बार बात की थी, समाज कल्याण मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था.

सीबीआई के अधिकारी आज सुबह दो कारों में पटना के स्ट्रैंड रोड स्थित वर्मा के आवास पहुंचे और वहां की गहन तलाशी ली. एजेंसी ने बेगूसराय के चेरिया बरियारपुर स्थित उनकी ससुराल के घर पर भी छापेमारी की. मंजू वर्मा चेरिया बरियारपुर विधानसभा क्षेत्र से ही विधायक हैं.

पटना में अन्य जिन स्थानों पर छापेमारी की गई, उनमें बुद्ध मार्ग स्थित ठाकुर के हिंदी दैनिक ‘प्रात: कमल’ का कार्यालय और समाज कल्याण विभाग से जुड़े एक काउंसलर का पाटलिपुत्र कॉलोनी स्थित घर भी शामिल है.

लगभग दो महीने पहले यौन शोषण का मामला सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने सीबीआई जांच और हाईकोर्ट से इसकी निगरानी कराए जाने की मांग की थी.

राज्य सरकार ने दबाव में दोनों मांगें स्वीकार कर ली थीं और उच्च न्यायालय से आग्रह किया था कि वह एक विशेष जज की नियुक्ति कर जांच की निगरानी तथा मामले में त्वरित मुकदमा सुनिश्चित करे.

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