S M L

मुजफ्फरपुर बालिका गृह यौन शोषण की सही जांच कई बड़ी मछलियों को लपेटे में ले सकती है

बालिकाओं के यौन शोषण का खुलासा टाटा इन्सटीट्यूट ऑफ सोशल साइंस (टिस) ने अपनी सोशल ऑडिटिंग के क्रम में किया था.

Updated On: Jul 23, 2018 08:46 PM IST

Kanhaiya Bhelari Kanhaiya Bhelari
लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं.

0
मुजफ्फरपुर बालिका गृह यौन शोषण की सही जांच कई बड़ी मछलियों को लपेटे में ले सकती है

आखिरकार सोमवार को मुजफ्फरपुर बालिका गृह यौन शोषण कांड की गूंज लोकसभा में सुनाई दे ही गई. राष्ट्रीय जनता दल के बागी सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने इस वीभत्स कांड के बारे में लोकसभा के मार्फत पूरे देश को बताते हुए सीबीआई जांच की मांग की. पप्पू यादव ने लोकसभा में यहां तक कह दिया कि इन मासूम बच्चियों को रसूखदार लोगों के पास भी ‘मनोरंजन’ के लिए भेजा जाता था. वैसे कुछ दिन पहले पटना उच्च न्यायालय ने भी इस मुद्दे पर राज्य सरकार से पूछा है, ‘क्यों न इस घटना की जांच सीबीआई से कराई जाए?’

दरअसल जब से इस बेहद दर्दनाक व शर्मनाक घटना का खुलासा हुआ है तभी से कई सियासी पार्टियों के नेता, सरकार के मुलाजिम जो कभी न कभी उत्तर बिहार के इस मशहूर शहर में कार्यरत रहे हैं, तथा समाज के तथाकथित इज्जतदारों के बीच बेचैनी है. विपक्ष भी अभी तक इस शोषण कांड के खिलाफ मुखर होकर आवाज उठाने से कतराता रहा है. हालांकि मई के अंतिम सप्ताह मे घटना उजागर होने के 10 दिन बाद विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी यादव और उनकी बहन और राज्यसभा सांसद मीसा भारती ने ट्वीट करके अरोप लगाया था कि सरकार इस केस को दबाना चाहती है क्योंकि सत्ता पक्ष के कई सफेदपोशों के नाम इसमें शामिल हैं. लेकिन विपक्षी दल के किसी नेता ने इस कांड के खिलाफ आंदोलन करने का आह्वान गंभीरता से नहीं किया है. ठीक वैसे ही जैसे वो आमतौर पर छोटी-छोटी घटनाओं के खिलाफ करते रहते हैं.

tejaswi yadav

बालिका गृह में रह रही कुल 46 नाबालिग बच्चियों का पिछले कई वर्षों से यौन शोषण किया जा रहा था. यह हकीकत चार दिन पहले मेडिकल टेस्ट से भी सामने आ गई. मुजफ्फरपुर के सीनियर एसपी हरप्रीत कौर ने माना है कि 16 नाबालिग बच्चियों के साथ लगातार रेप होते रहे. हालांकि दो बड़े अखबारों के मुताबिक मेडिकल रिपोर्ट में क्रमश: 41 और 31 लड़कियों के शोषण की बात है.

पीड़ित बालकाओं में 6 से 16 साल की लड़कियां है जिनमें कम से कम 13 की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है. जांच के क्रम में धीरे-धीरे ये खुलासा भी होने लगा है कि इनमें से कई बच्चियों पर दबाव बनाकर नेताओं और अफसरों के यहां भेजा जाता था. पुलिस की जांच में ये भी बात सामने आ रही है कि इस वीभत्स कांड सरगना बालिका गृह में हर शुक्रवार को महफिल सजाता था जिसमें कई सरकारी मुलाजिम और सफेदपोश शामिल होते थे. पुलिस प्रशासन पर उसकी कितनी मजबूत पकड़ है इसे सिर्फ एक उदाहरण से समझा जा सकता है. फरवरी 2013 में राज्य मानवाधिकार आयोग ने मुजफ्फरपुर जोन के 10 जिलों में तैनात पुलिस कर्मियों के लिए वर्कशॉप किया था. उसमें यौन शोषण कांड का ये सरगना भी एक वक्ता था.

पुलिस ने कांड सरगना समेत लगभग 10 नापाक किरदारों को गिरफ्तार किया है जिनमें सात महिलाएं हैं, जो इस बालिका गृह में कार्यरत थीं. लेकिन पुलिस अभी तक मधु कुमारी को पकड़ने में कामयाब नहीं हो पाई है. मधु के पकड़ में आने का मतलब है कई सफेदपोशों का असली चाल, चेहरा और चरित्र जनता के सामने आना. सबसे ज्यादा सोचने वाली बात तो यह है कि पुलिस आज तक कांड के मुख्य अभियुक्त सह सरगना को रिमांड पर लेकर पूछताछ नहीं की है. आखिर क्यों? इस सवाल का जवाब कोई पुलिस अधिकारी नहीं देना चाहता. इसी बीच ये भी पुष्ट खबर आ रही है कि जिस बच्ची ने सरगना के खिलाफ बयान दिया है वो पिछले एक महीने से मधुबनी बालिका गृह से गायब है.

सरगना बड़ा ही ताकतवर और रसूखवाला है. मुजफ्फरपुर के एक बड़े पुलिस अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताता है, 'उसका अपना अखबार है. जिसके बल पर वो दर्जनों दिग्गज नेता और पदाधिकारियों को अपने पॉकेट में लेकर घुमता रहता है. अखबार वाले भी सावधानी बरतते हुए उसके खिलाफ खबर छापते हैं. मुकदमे के अस्त्र का खौफ दिखाकर पेपर वालों को डराता रहता है. आज सरगना के आवास परिसर में पुलिस के द्वारा खुदाई कराई जा रही है.

31 मई को जब इस कांड का खुलासा हुआ तो मुजफ्फरपुर के नागरिकों के लिए ये बड़ा मानसिक झटका था. वैसे समाज कल्याण विभाग के कुछ बड़े अफसरों को बालिका गृह की अबोध बालिकाओं के साथ खौफनाक व शर्मनाक तरीके से किए जा रहे यौन शोषण की शिकायत 28 मार्च को ही लिखित रूप में मिल गई थी. पुलिस के पास जाकर एफआईआर करने में क्यों 63 दिन लग गया? इसके पीछे की कहानी भी रोचक है जो सुशासन स्थापित करने की जिम्मेदारी ढो रहे अधिकारियों को बेनकाब करती है.

Patna: Bihar chief minister Nitish Kumar addressing a press conference in Patna on Monday. PTI Photo (PTI9_4_2017_000062B)

जानकारी के अनुसार समाज कल्याण विभाग के कुछ अधिकारी रिमांड होम की देखभाल करने वाले एक कर्मचारी की रिटायरमेंट की तिथि 31 मई का इंतजार कर रहे थे. ताकि उसे सेवा निवृति का तमाम लाभ बिना रोक-टोक मिल सके. वह कर्मचारी सूबे के एक उच्चाधिकारी का निकट का संबंधी है. यौन शोषण कांड की जांच अगर सही दिशा में रफ्तार पकड़ेगी तो जाहिर तौर पर वो कर्मचारी लपेटे में आएगा. लेकिन उसके आधिकारिक लाभ श्रोत पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा. इस बात की गारंटी वो उच्चाधिकारी चाहते भी थे. भरोसेमंद सूचना के अनुसार कई अधिकारी इस फिराक में थे कि सतही तौर पर जांच की खानापूर्ति कर-कराके कांड को दफन कर दिया जाय. इसी बीच किसी गुप्तचर ने सीएम नीतीश कुमार के कान में इस वारदात की जानकारी दे दी. कहते हैं सीएम ने कुछ ईमानदार छवि वाले अफसरों के साथ मिलकर इस मुद्दे पर मैराथन बैठक की और दोषियों को पाताल से भी पकड़कर लाने का आदेश दिया.

साढ़े चार लाख रुपए सालाना किराए पर लिए गए कांड के सरगना के मकान में चल रहे इस बालिका गृह में रहने वाली अवयस्क बालिकाओं के यौन शोषण का खुलासा टाटा इन्सटीट्यूट ऑफ सोशल साइंस (टिस) ने अपनी सोशल ऑडिटिंग के क्रम में किया था.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
#MeToo पर Neha Dhupia

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi