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मुजफ्फरपुर: बालिका गृह यौन शोषण मामले में CBI को किन वजहों से लगी फटकार?

बालिका गृह यौन शोषण मामले में विपक्षी दलों के बाद अब पटना हाईकोर्ट ने भी एसपी के ट्रांसफर पर सीबीआई से जवाब मांगा है

Updated On: Aug 23, 2018 09:58 PM IST

Ravishankar Singh Ravishankar Singh

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मुजफ्फरपुर: बालिका गृह यौन शोषण मामले में CBI को किन वजहों से लगी फटकार?

मुजफ्फरपुर बालिका गृह यौन शोषण मामले की जांच कर रहे सीबीआई के एसपी जेपी मिश्रा के तबादले पर बिहार में संग्राम मचा हुआ है. विपक्षी पार्टियों का आरोप है कि सीबीआई अधिकारी का तबादला नीतीश कुमार के राजनीतिक रसूख के कारण हुई है. आरजेडी नेता और बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने एसपी के तबादले पर सवाल खड़ा किया है. दूसरी तरफ पटना हाईकोर्ट ने भी गुरुवार को जांच के बीच में ही एसपी के तबादले पर सीबीआई से जवाब-तलब किया है.

जेपी मिश्रा की जगह इस केस की जांच की जिम्मेदारी अब लखनऊ रेंज के सीबीआई एसपी देवेंद्र सिंह को दी गई है. देवेंद्र सिंह के पास यह अतिरिक्त जिम्मेदारी होगी. जबकि, जेपी मिश्रा शुरुआती दिनों से ही यह केस देख रहे थे. मिश्रा की देखरेख में ही बिहार के पूर्व समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा के पति से पिछले दिनों लंबी पूछताछ हुई थी. इस घटना के सामने आने के बाद ही बिहार की समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा को इस्तीफा देना पड़ा था. मंजू वर्मा के पति पर शेल्टर होम के संचालक ब्रजेश ठाकुर से करीबी संबंध होने का विपक्ष लगातार आरोप लगा रही थी.

बता दें कि मुजफ्फरपुर बालिका गृह में बच्चियों के साथ यौन शोषण की मॉनिटरिंग खुद पटना हाईकोर्ट कर रही है. ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि हाईकोर्ट की इजाजत के वगैर इस जांच से जुड़े एक अधिकारी का तबादला कैसे कर दिया गया? गुरुवार को हाईकोर्ट ने सीबीआई को इस मामले में जमकर फटकार लगाई. हाईकोर्ट ने सीबीआई को केस से जुड़े स्टेटस रिपोर्ट को कोर्ट में पेश नहीं करने पर भी लताड़ लगाई. साथ ही कहा कि सीबीआई बताए कि जांच के बीच में ही एसपी का तबादला कैसे कर दिया गया?

दूसरी तरफ नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव इस मामले को लेकर लगातार बिहार सरकार पर हमला बोल रहे हैं. तेजस्वी यादव ने ट्वीट करते हुए कहा 'बिहार के गवर्नर के बाद, सीएम नीतीश ने सीबीआई एसपी का भी तबादला करा दिया. एसपी मुजफ्फरपुर शेल्टर होम रेप केस पर अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट में देने वाले थे. जांच पटना तक पहुंच रही है यह ब्रजेश ठाकुर डायरी में भी शामिल है. चाचा, रुको और देखो, यह कौन है?'

'कोशिश' प्रोजेक्ट के जरिए TISS की टीम मामले को लाई थी सामने

muzaffarpur

शेल्टर होम में रहने वालों के शोषण का यह मामला पहली बार टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज, मुंबई (टीआईएसएस, मुंबई) की एक टीम बिहार सरकार के संज्ञान में लाई थी. टीम के सदस्य संस्थान के फील्ड एक्शन प्रोजेक्ट 'कोशिश' से थे, जो बेघर और बेसहारा लोगों के लिए काम करता है.

बिहार में आरजेडी के आलावा भी अन्य दलों ने आरोप लगाया कि मुजफ्फरपुर शेल्टर होम यौन उत्पीड़न मामले की जांच कर रहे एक वरिष्ठ सीबीआई अधिकारी के तबादले से पड़ताल प्रभावित हो सकती है. हालांकि सत्तारूढ़ गठबंधन के सहयोगियों जेडीयू और बीजेपी ने इस आरोप से इंकार किया है.

पिछले दिनों बिहार के राज्यपाल सत्यपाल मलिक को जम्मू-कश्मीर का राज्यपाल नियुक्त कर दिया गया था. सत्यपाल मलिक ने इस मामले पर चिंता जताते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को एक पत्र लिखा था. विपक्षी नेता उसी पत्र को आधार बना कर मुख्यमंत्री पर हमला बोल रहे हैं.

जेडीयू ने तेजस्वी के इन आरोपों से साफ इंकार कर किया है कि यह तबादले नीतीश कुमार ने करवाए हैं. जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने विपक्षी दलों को चुनौती दी है कि जांच एजेंसी में प्रशासनिक फेरबदल को लेकर अगर उन्हें कोई परेशानी है तो वे अदालत जा सकते हैं. कुमार ने सवाल किया कि आरजेडी सिर्फ मीडिया और ट्वीटर के जरिए ही बयान क्यों जारी कर रही है? अगर उसे लगता है कि तबादला चिंता का कारण है तो उन्हें अदालत जाना चाहिए. वैसे इस मामले की जांच हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों जगह हो रही है. तेजस्वी यादव अपने वकील के जरिए कोर्ट के सामने यह मामला लाएं.

एक अधिकारी का ट्रांसफर केस की जांच को करेगा प्रभावित: कांग्रेस पार्षद

IPS Upsc police

कांग्रेस के विधान पार्षद प्रेमचंद गुप्ता का कहना है कि यह सभी को समझ में आता है कि अधिकारियों के तबादले होते हैं, लेकिन इस तबादले के समय पर सवाल उठ रहे हैं. गुप्ता के मुताबिक इस समय एक अधिकारी का तबादला हो जाना केस की जांच को प्रभावित करेगा.

वहीं इस केस को शुरुआती दिनों से मीडिया और कोर्ट के सामने लाने वाले संतोष कुमार फर्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए कहते हैं, देखिए गुरुवार को भी इस मामले की हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. बिहार सरकार के एडवोकेट जनरल गुरुवार को कोर्ट में उपस्थित नहीं हुए. उनकी तरफ से गुरुवार की सुनवाई को आगे बढ़ाने की तारीख मांगी गई, जिसमें कोर्ट ने कहा कि नहीं आज ही सुनवाई करेंगे. हाईकोर्ट ने सीबीआई से पूछा कि अभी तक इस केस की स्टेटस रिपोर्ट क्यों नहीं सौंपी गई है?

इस पर कोर्ट ने सख्त नाराजगी जाहिर की. कोर्ट ने सीबीआई को हर हालत में 27 अगस्त की सुनवाई में स्टेटस रिपोर्ट देने को कहा है. साथ ही कोर्ट ने कहा है कि बिना मेरे सहमति के एसपी का ट्रांसफर कैसे कर दिया? जो अधिकारी इस केस की जांच कर रहा था उसकी जगह लखनऊ रेंज के सीबीआई के एक अधिकारी को अतिरिक्त जिम्मेदारी दे दी? कोर्ट ने एसपी के ट्रांसफर पर सीबीआई से बंद लिफाफे में जवाब दाखिल करने को कहा है. साथ ही कहा कि इस केस से जुड़ी जानकारी मीडिया के साथ क्यों शेयर कर रहे हैं.'

एसपी के ट्रांसफर पर विपक्षी दलों के हमले के बाद अब कोर्ट ने सीबीआई से जवाब तलब कर लिया है. इस केस की अगली सुनवाई 27 अगस्त को होने वाली है. बता दें कि मुजफ्फरपुर शेल्टर होम में पिछले महीने ही 34 बच्चियों के साथ दुष्कर्म की पुष्टि हुई थी. मुजफ्फरपुर की इस घटना ने देश की मीडिया में काफी सुर्खियां बटोरी थी. बिहार पुलिस ने कार्रवाई करते हुए शेल्टर होम के संचालक ब्रजेश ठाकुर सहित 11 लोगों को गिरफ्तार भी किया था, लेकिन मीडिया के दबाव और विपक्षी दलों की मांग के बाद बीते 26 जुलाई को राज्य सरकार ने सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी थी. सीबीआई जांच शुरू होने के बाद ही बिहार सरकार की समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा को इस्तीफा देना पड़ा था.

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