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मुस्लिम राष्ट्रीय मंच: मुसलमानों को संघ से जोड़ने की कोशिश

मुस्लिम समाज को लेकर संघ और बीजेपी के नजरिए को शक की नजरों से देखा जाता है.

Updated On: Nov 28, 2016 09:19 AM IST

Amitesh Amitesh

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मुस्लिम राष्ट्रीय मंच: मुसलमानों को संघ से जोड़ने की कोशिश

आमतौर पर मुस्लिम समाज को लेकर संघ और बीजेपी के नजरिए को शक की नजरों से देखा जाता है. आरएसएस की हिंदुत्व की नीति देश के अल्पसंख्यक समाज में एक भय का वातावरण बनाती है. जिसे लेकर अल्पसंख्यक समाज के बीच में कई तरह के भ्रम भी हैं. आरएसएस मुस्लिम राष्ट्रीय़ मंच के जरिए इसी भ्रम को दूर करने की कोशिश करता है.

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के मार्गदर्शक आरएसएस की अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य इन्द्रेश कुमार कहते हैं कुछ देसी और विदेशी ताकतों ने देश के मुसलमानों के भीतर आरएसएस को लेकर एक भयानक छवि बनाई थी. बाद में जब देश के मुसलमानों ने इस पर गौर किया तो उन्हें लगा कि आरएसएस तो एक गैर राजनीतिक संगठन है तो फिर इतना जहर क्यों घोला जा रहा है इसके खिलाफ? इसके बाद जल्द ही मुसलमानों के साथ डायलाग शुरू हुआ, जिसके बाद मुस्लिम राष्ट्रीय मंच बना और मुसलमानों का संघ के साथ संवाद शुरू हुआ.

यह एक आंदोलन है: इंद्रेश कुमार 

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के संरक्षक और मार्गदर्शक आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार कहते हैं कि मुस्लिम राष्ट्रीय मंच मुसलमानों द्वारा, मुसलमानों में, मुसलमानों के लिए चलाया जा रहा आंदोलन है. अब इसी आंदलोन के जरिए संघ भी मुस्लिम समाज में अपनी जड़े जमाने की कोशिश कर रहा है.कोशिश यह की जा रही है कि मुसलमानों को राष्ट्रवाद की विचारधारा जोड़ा जाए. दरअसल, आरएसएस के भीतर एक तबका ऐसा है, जो शुरू से ही मानता रहा है कि देश के अधिकांश मुसलमान मुख्यधारा से जुड़ नहीं पाए हैं.

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तस्वीर: इंद्रेश कुमार, मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के संरक्षक और मार्गदर्शक

अब उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने की कोशिश की जा रही है. संघ का मानना है जब देश के मुसलमान मुख्यधारा से जुड़ेंगे तो उनके अंदर राष्ट्रवाद की भावना तो अपनेआप पनपेगी. इसके लिए बकायदा मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की तरफ से अब तक देश के 9387 मदरसों में स्वतंत्रता दिवस से लेकर गणतंत्र दिवस के दिन तक तिरंगा फहराने से लेकर राष्ट्र गान गाने के लिए प्रेरित किया गया है. मंच की कोशिश है कि मुसलमानों के आईकान ऐसे राष्ट्रवादी हों जिनके चेहरे को सामने रखकर मुसलमानों को भटकने से रोका जा सके.

इसके लिए मंच की तरफ से उनकी शिक्षा पर जोर दिया जा रहा है. मंच का नारा है ‘दीनी तालीम के साथ दुनियावी तालीम’. दूसरा नारा है ‘आधी रोटी खाएंगे, पर बच्चों को पढ़ाएंगे.’ इंद्रेश कुमार मुसलमानों के अबतक के हालात के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराते हैं.

राह में हैं कई मुश्किलें 

कभी योगी आदित्यनाथ तो कभी साक्षी महराज. ये कुछ ऐसे नाम हैं जिनके बयान अक्सर विवाद पैदा करने वाले होते हैं. मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के सामने सबसे बड़ी मुश्किल यही है कि ऐसे नेताओं के अतिवादी बयान का जवाब कैसे दिया जाए. ऐसे में संघ की कोशिश कितनी कारगर हो पाएगी.

इस पर मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के संयोजक मो. अफजल कहते हैं कि यह एकतरफा नहीं है. अगर आजम खान, ओवैसी, अबु आजमी और मौलामा बुखारी जैसे लोग कोई टिप्पणी न करें तो हिंदू समाज के लोग ऐसा कुछ भी नहीं कहेंगे.

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तस्वीर: मोहम्मद अफजल, मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के संयोजक

वे कहते हैं कि हमारा मकसद है नकारात्मक तत्वों को खत्म कर एक राष्ट्र बनाना. यही हमारा राष्ट्र है, हमारे पुरखों ने यहीं जन्म लिया और इसी की मिट्टी में समा गए. इस देश पर हमारा भी उतना ही अधिकार है जितना दूसरों का. संविधान भी इसकी इजाजत देता है.

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच का अभियान

इंद्रेश कुमार के संरक्षण में मुस्लिम राष्ट्रीय मंच अबतक कई तरह से जनजागरण अभियान चलाता रहा है. मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के संयोजक मो. अफजल का कहना है कि मंच मुख्य तौर से सामाजिक सद्भाव का प्रयास करता रहता है. इसी कड़ी में गोकशी के खिलाफ मंच ने अभियान चलाया था. अफजल कहते हैं आरएसएस की तरफ से विश्व मंगल गो-ग्राम यात्रा 2009 में निकली थी, जिसमें मंच ने 12 लाख से अधिक मुसलमानों ने हस्ताक्षर किया था.

इसके अलावा सलाम 1857 नाम से राष्ट्र के शहीदों को याद करने के लिए कार्यक्रम चलाया गया. बकौल मो. अफजल यह मुस्लिम राष्ट्रीय मंच का ही प्रभाव है कि देवबंदशरीफ की तरफ से कहा गया कि आतंकवादी मुसलमान नहीं है. इसके बाद मुस्लिम समाज में पैठ बनी.

मंच की तरफ से 2015 से रोजा इफ्तार पार्टी की भी शुरुआत हुई. अब तक संघ परिवार का रोजा और इफ्तार पार्टी से कोई दूर-दूर तक नाता नहीं रहा है. खासतौर से मोदी सरकार बनने के बाद तो सियासी गलियारों में रोजा इफ्तार पार्टी का प्रचलन काफी हद तक कम हो गया है.

लेकिन, संघ परिवार से जुड़े इस मंच ने पहली बार रोजा-इफ्तार की भी शुरुआत की है. संसद परिसर में हुई इफ्तार पार्टी में देश की कई जानी मानी हस्तियों के अलावा भारत में मुस्लिम देशों के राजदूतों ने भी शिरकत की थी.

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच का उदय

इस मंच की नींव रखी थी आरएसएस के भूतपूर्व सरसंघचालक के सी सुदर्शन ने. आज भी मंच के संयोजक मो.अफजल के सी सुदर्शन को प्रेरणास्रोत मानते हैं. उनके मुताबिक, 24 दिसंबर 2002 को दिल्ली में ईद मिलन के एक कार्यक्रम में सुदर्शन ने कहा था ‘मजहबे इस्लाम का शाब्दिक अर्थ होता है सलामती मतलब सुरक्षा. लेकिन इसका चेहरा बदल गया है. सभी मुस्लिम इस बदलते चेहरे से वाकिफ भी हैं तो क्या ये मुसलमानों की जिम्मेदारी नहीं बनती कि इस्लाम के अर्थ के मुताबिक काम किया जाए और उसकी छवि को बदला जाए?’

के सी सुदर्शन का यह बयान उस वक्त की एनडीए सरकार के कार्यकाल में गृह-मंत्री लालकृष्ण आडवाणी और मुस्लिम उलेमा मौलामा जमील अहमद इलियासी, निजामुद्दीन दरगाह के सज्जादा हसन सानी निजामी और मौलाना वहीदुद्दीन की मौजूदगी में दिया था.

माई हिंदुस्तान संगठन ने ली थी जिम्मेदारी

इसके बाद माई हिंदुस्तान संगठन ने इसकी जिम्मेदारी ली और कहा कि हम देशभर में इस बाबत आंदोलन चलाएंगे. इसके बाद 30-31 अगस्त को दिल्ली के विश्व युवा केन्द्र में कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें माई हिंदुस्तान का नाम बदलकर राष्ट्रवादी मुस्लिम आंदोलन ‘एक नई राह’ रखा गया.

फिर बाद में जयपुर के अंदर 2006-07 में एक बड़ा सम्मेलन हुआ जिसमें संगठन का नाम मुस्लिम राष्ट्रीय मंच कर दिया गया. तब से मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के नाम से ही संगठन चल रहा है.

आज मुस्लिम राष्ट्रीय मंच संघ से जुड़े एक संगठन के रूप में देश भर में अपना दायरा बढ़ा रहा है.अब संघ का दावा है मुस्लिम समाज के लोग अंधेरे से रोशनी में आ रहे हैं. भटकने की बजाए एक नई राह पर चल पड़े हैं. जिसका परिणाम बहुत सार्थक होने वाला है.

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