S M L

पर्सनल लॉ बोर्ड ने की तीन तलाक बिल को ‘जल्दबाजी’ में पारित करने की निंदा

दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर तीन तलाक देने वालों को तीन साल के बजाय 10 साल कैद की सजा दिलाने की मांग की है

Bhasha Updated On: Dec 28, 2017 10:14 PM IST

0
पर्सनल लॉ बोर्ड ने की तीन तलाक बिल को ‘जल्दबाजी’ में पारित करने की निंदा

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने गुरुवाार को लोकसभा में तीन तलाक के खिलाफ बिल पारित किए जाने की निंदा करते हुए कहा कि वह इस बिल में संशोधन कराने या उसे रद्द कराने के लिए सभी लोकतांत्रिक तरीके अपनाएगा.

बोर्ड के प्रवक्ता मौलाना खलीलउर्रहमान सज्जाद नोमानी ने कहा कि बोर्ड को इस बात का बहुत अफसोस है कि तीन तलाक संबंधी बिल को इतनी जल्दबाजी में पेश किया गया. इस जल्दबाजी की कोई वजह समझ में नहीं आती.

उन्होंने कहा कि गुरुवार को लोकसभा में इस विधेयक पर चर्चा के दौरान कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कई बार बोर्ड को उद्धत किया. बीजेपी की एक सांसद ने बोर्ड अध्यक्ष राबे हसनी नदवी द्वारा इस विधेयक को रोकने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लिखे पत्र के एक-एक बिंदु का जवाब देने की कोशिश की. जाहिर है कि सरकार ने बोर्ड को एक प्रतिनिधि संगठन माना है. ऐसे में उसका हक था कि उसके अध्यक्ष के खत के सम्मान में बिल को चंद दिन के लिए रोक दिया जाता.

बिल को जल्दबाजी में पेश करना गैर जरूरी

मौलाना नोमानी ने कहा कि जिस तरह इस बिल को जल्दबाजी में पेश और पारित किया गया उसकी हम निंदा करते हैं और उसे गैर जरूरी और ‘गैर दानिशमंदाना’ (नासमझीभरा) करार देते हैं. उन्होंने तीन तलाक संबंधी बिल का विरोध करने या उसमें संशोधन की हिमायत करने वाले सांसदों का शुक्रिया अदा किया.

इस बारे में बोर्ड के अगले कदम के बारे में पूछे जाने पर नोमानी ने कहा कि बोर्ड अभी हालात पर बारीकी से नजर रख रहा है. उन्होंने कहा कि बोर्ड अभी अदालत जाने के विषय में कोई विचार नहीं कर रहा है. इस विधेयक में संशोधन कराने या उसे रद्द कराने के लिए जो भी लोकतांत्रिक तरीके होंगे वे अपनाए जाएंगे.

मुस्लिम वुमेन पर्सनल लॉ बोर्ड ने बिल का किया स्वागत

इस बीच, ऑल इंडिया मुस्लिम वुमेन पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष शाइस्ता अम्बर ने संसद में बिल पेश किये जाने का स्वागत करते हुए कहा कि इससे महिलाओं में एक नई उम्मीद जगी है. तीन तलाक एक अभिशाप है और इसके खात्मे के लिए उठाया जाने वाला हर कदम सराहनीय है.

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अगर प्रस्तावित कानून कुरान शरीफ की रोशनी के अनुरूप नहीं हुआ तो वह उन्हें स्वीकार नहीं होगा.

इधर, उत्तर प्रदेश शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर तीन तलाक देने वालों को तीन साल के बजाय 10 साल कैद की सजा दिलाने की मांग की है.

रिजवी ने एक बयान में कहा कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड एक बार में तीन तलाक़ को सही मानते हुए इससे संबंधित बिल का विरोध कर रहा है, जोकि खेदनीय है. एक बार में तीन बार तलाक कह देने से तलाक हो जाना शरई मामला नहीं है. यह महिलाओं के प्रति अत्याचार तथा शोषण का मामला है, जोकि अपराध की श्रेणी में आता है. इसे आपराधिक कृत्य मानते हुए भारतीय दंड संहिता के तहत दंडनीय अपराध होना चाहिए.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
SACRED GAMES: Anurag Kashyap और Nawazuddin Siddiqui से खास बातचीत

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi